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बैतूल के 545 गांवों तक पानी पहुंचाने वाली जल निगम की योजना फिर अटकी: दो परियोजनाओं का ठेका रद्द

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बैतूल। मध्यप्रदेश जल निगम की 618.1 करोड़ रुपए की महत्वाकांक्षी ग्रामीण नलजल योजना में काम की रफ्तार फिर सुस्त पड़ गई है। बैतूल जिले के 545 गांवों को नल से पानी उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई चार परियोजनाओं में से दो का ठेका अब टर्मिनेट कर दिया गया है। यह योजना अब कम से कम दो साल और पीछे खिसक गई है।

 

इस योजना के तहत मुंबई की विक्रान इंजीनियरिंग कंपनी और भोपाल की एल.एन. मालवीय इंफ्रा प्रोजेक्ट कंपनी को चार उपपरियोजनाओं का जिम्मा दिया गया था।

विक्रान इंजीनियरिंग को घोघरी समूह जल योजना के तहत आमला, मुलताई और प्रभात पट्टन के 162 गांवों में पानी पहुंचाने का काम 215.55 करोड़ रुपए में दिया गया था।

 

वहीं, एल.एन. मालवीय को गढ़ा (51 गांव), वर्धा (91 गांव) और मेंढ़ा (241 गांव) तक जल आपूर्ति का काम सौंपा गया था।

 

परियोजनाएं शुरू हुए तीन साल बीत चुके हैं, लेकिन अब तक इनका काम पूरा नहीं हो सकी है। जबकि कंपनियों को कई बार एक्सटेंशन दिया जा चुका है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक विक्रान इंजीनियरिंग अब तक 67फीसदी काम पूरा कर चुकी है लेकिन भोपाल की एल एन मालवीय कम्पनी की वर्धा परियोजना में मार्च 2023 से अब तक सिर्फ 29 फीसदी ही काम हो सका है।जबकि निगम इसके एवज में उसे 102करोड़ में से 29करोड़ का भुगतान कर चुकी है। जबकि इसी कंपनी के 245 करोड़ के मेंढ़ा प्रोजेक्ट पर कंपनी को 52 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है । कंपनी की सुस्त रफ़्तार के चलते अब दोनों कामों को कंपनी से छीनकर नए टेंडर कर दिए गए है।।जिसकी प्रक्रिया चल रही है।।ताजा स्थिति के अनुसार, मेंढ़ा और वर्धा योजनाओं का ठेका समाप्त कर दिया गया है।

जल निगम के ईई अविनाश दिवाकर ने बताया कि “दोनों परियोजनाओं की फिजिकल प्रगति बहुत कम थी। एक की 27% और दूसरी की 32% प्रगति होने के कारण ठेके को टर्मिनेट कर दिया गया है। इनका रिटेंडर जारी कर दिया गया है, पोर्टल लाइव है।”

उन्होंने यह भी बताया कि घोघरी स्कीम में 63% काम पूरा हो चुका है । नए टेंडर के बाद आने वाली कंपनी को 18 महीने का समय दिया गया है।

 

राजनीतिक नाराजगी बढ़ी

यह योजना सबसे अधिक बैतूल विधानसभा क्षेत्र के 258 गांवों को कवर करती है। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष और बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल ने हाल ही में भोपाल में जल निगम अधिकारियों के साथ बैठक कर परियोजनाओं की धीमी रफ्तार पर नाराजगी जताई थी। उनका कहना है कि “ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल जल्द उपलब्ध हो, यह हमारी प्राथमिकता है, लेकिन काम की धीमी रफ्तार निराशाजनक है।”

 

कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना

कांग्रेस के पूर्व विधायक निलय डागा ने आरोप लगाया कि “यह योजना 2018 में कमलनाथ सरकार के समय स्वीकृत हुई थी। भाजपा सरकार की लापरवाही के कारण ग्रामीण जनता अब तक पानी से वंचित है। जिन ठेकेदारों ने काम पूरा नहीं किया, उन्हें सिर्फ पेनल्टी नहीं बल्कि टर्मिनेशन के बाद ब्लैकलिस्ट किया जाना चाहिए।”

 

अब नए टेंडर होने पर दो माह में टेंडर होंगे

 

नई प्रक्रिया के तहत दो माह टेंडरिंग प्रक्रिया के लगेंगे। इसके बाद नई कम्पनी को काम सौंपे जाने के बाद उसे काम पूरा करने 18 माह का समय दिया जाएगा। यानी यह परियोजना अब 2027 तक ही पूरी होने की उम्मीद है ।

 

भास्कर ने 9 माह पहले चेताया था

 

इन चारों परियोजनाओं की प्रगति को लेकर भास्कर डिजिटल ने माह मार्च में ही चेताया था कि वर्क प्रोग्रेस धीमी होने से परियोजना समय पर पूरी नहीं हो सकेगी। लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया गया। हालांकि निगम के महा प्रबंधक अविनाश दिवाकर का कहना है कि परियोजनाओं को समय पर पूरा करने कम्पनियों को बार बार चेतावनी पत्र,नोटिस दिए गए है।।उन्हें काम पूरा करने एक्स्टेंशन भी दिया गया था।

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