Logo
ब्रेकिंग
रेगिस्तान में बसा इंजीनियरिंग का चमत्कार: 2200 साल पहले बिना नदी के कैसे बसा शहर ? आज भी वैज्ञानिक इ... बैतूल जिला बना भूकंप का केंद्र, मुलताई और पांढुर्णा में महसूस हुए तेज झटके बैतूल मोहदा के खेरा में बड़ा हादसा: श्रद्धालुओं से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली पलटी, 25 घायल, एक बुजुर्ग की ... बैतूल के बर्राढाना गांव में भीषण आग: 15 से अधिक मकान जले, 90% गांव तबाह पांचवीं,आठवीं फेल के लिए राहत की खबर,1 जून से होगी परीक्षा लल्ली और शिवाजी चौक को बड़े शहरों की तरह बनाए।कलेक्टर ने प्रस्ताव बनाने को कहा बेजुबान के लिए इंसानियत: झुलसे बंदर को युवकों ने गोद में बैठाकर 35 किमी दूर पहुंचाया अस्पताल बैतूल के छात्रों का कमाल: गुंजन देशमुख 10वीं में 5वें स्थान पर, ऋतुजा देशपांडे 12वीं गणित में 7वीं र... बैतूल: शराब दुकानों के टेंडर में लापरवाही, जिला आबकारी अधिकारी अंशुमन सिंह चिढ़ार निलंबित बैतूल जिले की नगरपालिकाओं में एल्डरमैन नियुक्त
Header Ad

रेगिस्तान में बसा इंजीनियरिंग का चमत्कार: 2200 साल पहले बिना नदी के कैसे बसा शहर ? आज भी वैज्ञानिक इसकी जल प्रणाली पर कर रहे शोध

0

खबरम डेस्क ।चारों ओर सूखे पहाड़, तपता रेगिस्तान और सालभर बेहद कम बारिश। ऐसी जगह पर यदि कोई कहे कि करीब 2200 साल पहले यहां 30 से 40 हजार लोगों का एक समृद्ध शहर बसता था, तो यकीन करना मुश्किल होगा। लेकिन जॉर्डन के दक्षिणी रेगिस्तान में स्थित पेट्रा (Petra) इसी असंभव को संभव बनाने वाली प्राचीन सभ्यता का उदाहरण है। यही वजह है कि यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर घोषित किया और इसे दुनिया के सात नए अजूबों में भी शामिल किया गया।

पेट्रा केवल अपनी चट्टानों को काटकर बनाई गई इमारतों के लिए ही प्रसिद्ध नहीं है, बल्कि उसकी अद्भुत जल प्रबंधन प्रणाली (Water Management System) आज भी दुनिया के इंजीनियरों और पुरातत्वविदों के लिए अध्ययन का विषय बनी हुई है।

 

यहां ही शहर क्यों बसाया गया?

 

पहली नजर में पेट्रा शहर बसाने के लिए बिल्कुल उपयुक्त स्थान नहीं लगता। यहां न कोई बड़ी नदी थी और न ही हर समय पानी का स्रोत। इसके बावजूद नबातियन (Nabataean) सभ्यता ने इसी स्थान को चुना क्योंकि यह लाल सागर (Red Sea) और मृत सागर (Dead Sea) के बीच स्थित प्राचीन व्यापारिक मार्ग का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव था।

भारत से आने वाले मसाले, चीन का रेशम, अरब का लोबान (Frankincense) और मिस्र का व्यापार इसी रास्ते से होता था। पेट्रा अरब, मिस्र और सीरिया-फोनीशिया को जोड़ने वाला प्रमुख कारोबारी केंद्र बन गया। व्यापार से मिलने वाली समृद्धि ने इसे उस समय के सबसे धनी शहरों में शामिल कर दिया।

 

साथ ही चारों ओर ऊंचे लाल बलुआ पत्थर के पहाड़ प्राकृतिक किले का काम करते थे। शहर तक पहुंचने का मुख्य रास्ता केवल संकरी घाटी ‘सिक’ (Siq) थी, जिससे दुश्मनों के लिए हमला करना बेहद कठिन था।

 

रेगिस्तान में पानी पहुंचाने का अद्भुत विज्ञान

 

पेट्रा की सबसे बड़ी उपलब्धि उसकी जल प्रबंधन प्रणाली थी। यूनेस्को के अनुसार नबातियन इंजीनियरों ने ऐसी प्रणाली विकसित की थी, जिसने पूरी तरह शुष्क क्षेत्र में भी हजारों लोगों की बसाहट संभव बना दी।

 

इसके लिए उन्होंने—

 

पहाड़ों से आने वाले बरसाती पानी को रोकने के लिए विशाल डायवर्जन डैम (Diversion Dams) बनाए।

 

चट्टानों को काटकर दर्जनों जल नहरें (Rock-cut Channels) तैयार कीं।

 

बाढ़ के पानी को सुरक्षित सुरंगों (Muthlim Tunnel) से शहर के बाहर मोड़ दिया।

 

मिट्टी और पत्थर की पाइपलाइन बनाकर पानी को शहर के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाया।

 

सैकड़ों जलाशय (Reservoirs) और भूमिगत टंकियां (Cisterns) बनाई गईं, जहां बारिश का पानी पूरे वर्ष के लिए संग्रहित किया जाता था।

 

जगह-जगह एक्वाडक्ट (Aqueducts) बनाए गए, जिनसे पानी बिना रुके शहर तक पहुंचता था।

 

यूनेस्को के अनुसार यह पूरी प्रणाली पहली शताब्दी ईसा पूर्व से पहली शताब्दी ईस्वी के बीच विकसित की गई थी और प्राचीन जल इंजीनियरिंग का उत्कृष्ट उदाहरण मानी जाती है।

 

बाढ़ को भी बनाया वरदान

 

रेगिस्तान में सालभर पानी नहीं मिलता, लेकिन कभी-कभी अचानक तेज बारिश से खतरनाक बाढ़ आ जाती थी। नबातियन लोगों ने इस चुनौती को अवसर में बदल दिया।

 

उन्होंने पहाड़ों के बीच ऐसे बांध बनाए जो बाढ़ के पानी को सीधे शहर में आने से रोकते थे। यही पानी बाद में नहरों के माध्यम से जलाशयों में पहुंचाया जाता था। इससे शहर सुरक्षित भी रहता था और सालभर के लिए पानी भी मिल जाता था।

हर बूंद का होता था उपयोग

 

जल प्रणाली इतनी वैज्ञानिक थी कि पानी व्यर्थ नहीं जाता था। नहरों का ढाल (Slope) इस प्रकार बनाया गया था कि पानी लगातार बहता रहे लेकिन तेज गति से पाइप या नहर को नुकसान न पहुंचे।

 

कई स्थानों पर सेटलिंग टैंक बनाए गए थे, जहां मिट्टी और कचरा नीचे बैठ जाता था। इसके बाद अपेक्षाकृत साफ पानी आगे के जलाशयों तक पहुंचता था। इससे पेयजल और घरेलू उपयोग के लिए बेहतर गुणवत्ता का पानी उपलब्ध होता था।

आधा बना, आधा पहाड़ों में तराशा गया शहर

 

पेट्रा की सबसे बड़ी पहचान इसकी विशाल चट्टानों को काटकर बनाई गई इमारतें हैं। इनमें विश्व प्रसिद्ध अल-खज़नेह (The Treasury), रॉयल टॉम्ब्स, कोरिंथियन टॉम्ब, पैलेस टॉम्ब और अद-देयर (The Monastery) शामिल हैं।

 

इन इमारतों में यूनानी (Hellenistic) वास्तुकला और पूर्वी स्थापत्य शैली का अद्भुत संगम दिखाई देता है। यही कारण है कि पेट्रा को विश्व की सबसे समृद्ध पुरातात्विक धरोहरों में गिना जाता है।

 

केवल शहर नहीं, कई सभ्यताओं का इतिहास

 

यूनेस्को के अनुसार पेट्रा क्षेत्र में नवपाषाण काल, लौह युग, यूनानी, रोमन, बीजान्टिन और मध्यकालीन सभ्यताओं के भी अवशेष मिले हैं। यहां प्राचीन चर्च, मंदिर, थिएटर, तांबे की खदानें, किले और धार्मिक स्थल आज भी मौजूद हैं।

 

आज भी क्यों हो रहा शोध?

 

आधुनिक इंजीनियर मानते हैं कि इतनी कम वर्षा वाले क्षेत्र में हजारों लोगों के लिए पानी उपलब्ध कराना आज भी बड़ी चुनौती है। इसलिए पेट्रा की जल प्रबंधन प्रणाली का अध्ययन आधुनिक जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और शुष्क क्षेत्रों के विकास के मॉडल के रूप में किया जा रहा है।

 

पर्यटन और प्राकृतिक खतरे

 

आज पेट्रा हर वर्ष लाखों पर्यटकों को आकर्षित करता है। हालांकि यूनेस्को ने चेतावनी दी है कि तेज बारिश से आने वाली फ्लैश फ्लड, हवा से होने वाला कटाव, चट्टानों का क्षरण और बढ़ता पर्यटन इस विश्व धरोहर के लिए चुनौती बन रहे हैं। इसलिए इसकी प्राचीन जल प्रणाली, बांधों और नहरों का लगातार संरक्षण और रखरखाव किया जा रहा है।

 

रोचक तथ्य

 

लगभग 2200 वर्ष पुराना शहर।

 

दुनिया के सात नए अजूबों में शामिल।

 

1985 से यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल।

 

चट्टानों को काटकर बनाया गया विश्व का सबसे प्रसिद्ध प्राचीन शहर।

 

इसकी जल प्रबंधन प्रणाली को प्राचीन दुनिया की सबसे उन्नत इंजीनियरिंग उपलब्धियों में माना जाता है।

Leave A Reply

Your email address will not be published.