
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार ब्रिटेन की दिग्गज लीकर कंपनी डियाजियो पीएलसी इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) क्रिकेट फ्रैंचाइज रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) में अपनी हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा या पूरी हिस्सेदारी बेचने की संभावना तलाश रही है. डियाजियो के पास यूनाइटेड स्पिरिट्स लिमिटेड की हिस्सेदारी है, जिसकी वजह से टीम में भी कंपनी की मोटी पार्टनरशिप है. कंपनी की ओर से संभावित सलाहकारों के साथ शुरुआती चर्चा कर रही है. हालांकि अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है. लेकिन फ्रैंचाइज की वैल्यू 17 हजार करोड़ यानी 2 बिलियन डॉलर हो सकती है. डियाजियो और यूनाइटेड स्पिरिट्स ने संभावित विनिवेश के बारे में कोई सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया है.
क्यों शुरू हुई ये चर्चा?
यह चर्चा ऐसे समय में शुरू हुई है, जब भारत का स्वास्थ्य मंत्रालय आईपीएल में तंबाकू और शराब ब्रांडों के प्रचार पर प्रतिबंध लगाने और खेल हस्तियों द्वारा दूसरी अनहेल्दी प्रोडक्ट्स के इनडायरेक्ट प्रचार को रोकने पर जोर दे रहा है. भारत में तम्बाकू और शराब उत्पादों का स्पष्ट विज्ञापन प्रतिबंधित है, लेकिन डियाजियो जैसी फर्मों ने टॉप क्रिकेटर्स का उपयोग करके सोडा जैसे दूसरे प्रोडक्ट्स प्रचार किया है. आईपीएल की फाउंडर टीमों में से एक, आरसीबी को शुरू में विजय माल्या ने खरीदा था, जो एक बीयर टाइकून हैं, जिनकी किंगफिशर एयरलाइंस लिमिटेड 2012 में लेनदारों का भुगतान ना कर पाने की वजह से बंद हो गई थी. माल्या के स्पिरिट्स बिजनेस को खरीदने के बाद डियाजियो ने अंततः आरसीबी का अधिग्रहण कर लिया.
कई रिकॉर्ड बना सकती है डील
आरसीबी ने हाल ही में पहली बार आईपीएल जीता है. टीम के सबसे बड़े स्टार विराट कोहली हैं, जिनके पास एथलीट के तौर पर दुनिया में सबसे बड़ी सोशल मीडिया फॉलोइंग है. आईपीएल के बढ़ते वैल्यूएशन ने टीम के स्वामित्व को खेलों में सबसे अधिक मांग वाली संपत्तियों में से एक बना दिया है. यह बिक्री भविष्य की डील्स के लिए एक बेंचमार्क स्थापित कर सकती है जो अब दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती खेल लीगों में से एक है. आईपीएल एक ग्लोबल इंटरटेनमेंट और एड जाएंट के रूप में विकसित हुआ है, जो कमर्शियली नेशनल फुटबॉल लीग और इंग्लिश प्रीमियर लीग को टक्कर देता है.
लीग के छोटे, तीन घंटे के मैच भारत और दुनिया भर में करोड़ों दर्शकों को आकर्षित करते हैं. अमेरिका में, जो डियाजियो का सबसे बड़ा मार्केट है, टैरिफ और उपभोक्ता मंदी ने प्रीमियम शराब की सेल्स पर असर डाला है. विनिवेश से ऐसे समय में पूंजी मिल सकती है जब कंपनी ऑपरेशन को और बेहतर करने में जुटी हुई है और ग्लोबल लेवल पर नॉन कोर असेट्स का रीवैल्यूएशन कर रही है.

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