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लोकायुक्त ट्रैप में फंसे बैतूल नायब तहसीलदार के रीडर को चार साल की सजा

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बैतूल। आठ नवंबर 2017 को बैतूल तहसील कार्यालय में हुए चर्चित लोकायुक्त ट्रैप प्रकरण में नायब तहसीलदार के रीडर यादवराव सूर्यवंशी को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 और 13 के तहत दोषी पाते हुए अदालत ने चार साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।

यह फैसला प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने सुनाया। फरियादी पक्ष की ओर से मामले की पैरवी एडीपीओ अभय सिंह ठाकुर ने की, जबकि डीपीओ एस.पी. वर्मा ने भी पैरवी में सहयोग किया। आज हुई सजा की जानकारी एडीपीओ अजीत सिंह ने दी।

मामला इस प्रकार था

सोहागपुर के किसान कैलाश अतुलकर से खेत का रिकॉर्ड दुरुस्त करने के लिए रीडर यादवराव सूर्यवंशी ने पांच हजार रुपए की रिश्वत मांगी थी। किसान ने एक हजार रुपए पहले ही दे दिए थे। शेष चार हजार रुपए की राशि लेते हुए सूर्यवंशी को लोकायुक्त पुलिस ने 8 नवंबर 2017 को तहसील कार्यालय परिसर में ही रंगे हाथों पकड़ लिया था।

यह कार्रवाई लोकायुक्त डीएसपी नरेंद्र राठौर के नेतृत्व में की गई थी, जिसमें टीआई वी.के. सिंह, निरीक्षक मयूरी गौर सहित 12 सदस्यीय टीम शामिल थी। कार्रवाई के दौरान तहसील कार्यालय में हड़कंप मच गया था।

अदालत में साबित हुआ अपराध

लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने आरोपी यादवराव सूर्यवंशी को दोषी करार दिया और अभिरक्षा में लेकर चार वर्ष की सजा सुनाई।

बचाव पक्ष के अधिवक्ता आकाश श्रीवास्तव ने बताया कि वे अपने मुवक्किल की ओर से इस फैसले के विरुद्ध उच्च न्यायालय में अपील दायर करेंगे।

अभियोजन पक्ष ने पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत कर यह सिद्ध किया कि आरोपी ने रिश्वत की मांग और स्वीकारोक्ति दोनों की थी।

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