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केंद्रीय मंत्री और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष के सामने उजागर हुई खेलो की बदहाली, खेल महोत्सव में बिना जूतों के दौड़ते दिखे खिलाड़ी

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बोले तीन साल से नहीं मिली खेल सामग्री

सवाल उठे कि ऐसे में कैसे निखरेंगी प्रतिभाएं

बैतूल। खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से बुधवार को पुलिस परेड ग्राउंड में सांसद खेल महोत्सव का क्लस्टर स्तरीय शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन प्रदेश भाजपा अध्यक्ष एवं विधायक हेमंत खंडेलवाल और केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री दुर्गादास उइके ने किया।
आयोजन में जहां एक ओर खिलाड़ियों का उत्साह दिखा, वहीं मैदान पर वास्तविकता ने खेल व्यवस्था की तस्वीर साफ कर दी।

महोत्सव के दौरान कई खिलाड़ी बिना जूतों के ट्रैक पर दौड़ लगाते नजर आए, जबकि खेल परिसर के बच्चों ने बताया कि उन्हें पिछले तीन वर्षों से खेल सामग्री नहीं मिली है। ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि सुविधाओं के बिना कैसे तैयार होंगे राज्य और राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी।

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खेल सुविधाओं की कमी बनी बड़ी चुनौती

जिले में खेल ढांचा लंबे समय से जर्जर स्थिति में है। न तो क्रिकेट और फुटबॉल के लिए समुचित मैदान हैं, न ही हॉकी स्टेडियम की टर्फ ठीक हालत में है। *मेजर ध्यानचंद हॉकी स्टेडियम* की मोटर बंद होने से खिलाड़ियों को पानी तक नहीं मिल पा रहा।
हॉकी, जो देश का राष्ट्रीय खेल है, जिले में केवल एक ही सक्रिय टीम पर टिकी है — वह भी खेल एवं युवा कल्याण विभाग के प्रशिक्षण केंद्र की।

कोच नहीं, सामग्री नहीं — खिलाड़ी बेबस

ट्राइबल विभाग के अधीन चल रहे दो खेल परिसरों में न प्रशिक्षित कोच हैं न पर्याप्त साधन। यहां एथलेटिक्स, *सॉफ्टबॉल और *जूडो* जैसे खेलों का नाम तो है, लेकिन प्रशिक्षक नहीं।
वरिष्ठ खिलाड़ी नरेंद्र ठाकुर ने कहा — “हमारे यहां खेल सुविधाएं नाममात्र की हैं। प्रशिक्षक योग्य नहीं हैं और तीन साल से खिलाड़ियों को कोई नई सामग्री नहीं मिली। ऐसे में प्रतिभा विकसित करना मुश्किल है।”

ग्रामीण क्षेत्र में खेल समन्वयक निष्क्रिय

ग्रामीण और शहरी खेल समन्वयकों की निष्क्रियता पर भी सवाल उठ रहे हैं। ये अधिकारी विकासखंडों में पदस्थ हैं, लेकिन ज्यादातर समय जिला मुख्यालय पर रहते हैं।
खेल प्रेमियों का कहना है कि “इनकी नियमित उपस्थिति न होने से ग्रामीण खिलाड़ियों तक योजनाओं का लाभ नहीं पहुंच पाता।”

कबड्डी और अन्य खेलों के प्रशिक्षण केंद्रों की जरूरत

कबड्डी जिले का सबसे लोकप्रिय खेल है, लेकिन अब तक इसके लिए प्रशिक्षण केंद्र नहीं खोले गए। फिलहाल केवल हॉकी और कराटे के प्रशिक्षण केंद्र संचालित हैं।
खेल प्रेमियों का कहना है कि यदि खेल विभाग, ट्राइबल विभाग और स्कूल शिक्षा विभाग मिलकर कबड्डी, फुटबॉल और जूडो के प्रशिक्षण केंद्र शुरू करें तो बैतूल के खिलाड़ी राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष का वादा

कार्यक्रम में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष **हेमंत खंडेलवाल** ने कहा कि “बैतूल को खेल का *हब* बनाने की योजना पर काम चल रहा है। प्रदेश सरकार हर खेल के लिए बेहतर ग्राउंड और सुविधाएं उपलब्ध कराएगी।”

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उन्होंने कहा कि “हम चाहते हैं कि यहां के खिलाड़ी देश का नाम रोशन करें, और इसके लिए अधोसंरचना का विकास प्राथमिकता पर होगा।”

🔹 *खिलाड़ियों की प्रमुख मांगें*

* हर खेल के लिए अलग अभ्यास मैदान बने।
* एनआईएस प्रशिक्षित कोचों की नियुक्ति की जाए।
* तीन साल से लंबित खेल सामग्री तत्काल वितरित की जाए।
* कबड्डी, फुटबॉल और जूडो के प्रशिक्षण केंद्र खोले जाएं।
* खेल समन्वयकों की उपस्थिति और कार्य की नियमित निगरानी हो।

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