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प्रस्तावित नगर निगम में शामिल किए जाने का फिर विरोध, डोक्या पाढर के ग्रामीणों ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

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बैतूल। बैतूल को नगर निगम बनाने के प्रस्ताव का विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। बुधवार को ग्राम पंचायत डहरगांव के अंतर्गत आने वाले डोक्या पाढर और टोक्या पाढर के ग्रामीण बड़ी संख्या में कलेक्ट्रेट पहुंचे और कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपकर प्रस्तावित नगर निगम सीमा में शामिल किए जाने का विरोध दर्ज कराया।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि नगर निगम गठन के लिए सहमति लेने ग्राम पंचायत मुख्यालय डहरगांव में विशेष ग्रामसभा आयोजित की गई थी, लेकिन पंचायत में शामिल उनके गांवों को न तो इसकी सूचना दी गई और न ही मुनादी कर ग्रामसभा की जानकारी दी गई। उनका कहना है कि ग्रामीणों की सहमति के बिना नगर निगम में शामिल करने का प्रस्ताव पारित कर दिया गया।

गांव के प्रहलाद दवंडे ने कहा कि वर्तमान में उनका गांव पूरी तरह स्वतंत्र ग्राम पंचायत व्यवस्था का हिस्सा है और अधिकांश समस्याओं का समाधान पंचायत स्तर पर ही हो जाता है। नगर निगम में शामिल होने के बाद किसी भी छोटे काम के लिए करीब 20 किलोमीटर दूर बैतूल आना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि निगम बनने से ग्रामीणों पर टैक्स का बोझ भी बढ़ेगा। उनका कहना था कि आज बैतूल नगरपालिका क्षेत्र में ही सड़क और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं की स्थिति संतोषजनक नहीं है, ऐसे में नगर निगम बनने से गांवों को क्या लाभ मिलेगा, यह बड़ा सवाल है।

ज्ञापन में ग्रामीणों ने बताया कि डोक्या पाढर और टोक्या पाढर ग्राम पंचायत डहरगांव के अंतर्गत आते हैं। दोनों गांव बैतूल शहर से लगभग 20 किलोमीटर दूर हैं, जबकि पंचायत मुख्यालय डहरगांव पहले नजदीक था। माचना नदी पर गढ़ा डैम बनने और जलभराव के कारण पिछले दो वर्षों से पंचायत मुख्यालय से सीधा संपर्क टूट गया है। ग्रामीणों का कहना है कि अब दोनों गांवों की आबादी लगभग तीन हजार है, इसलिए इन्हें अलग ग्राम पंचायत का दर्जा दिया जा सकता है या किसी अन्य उपयुक्त ग्राम पंचायत में शामिल किया जाए।

ग्रामीणों ने ज्ञापन में मांग की है कि डोक्या पाढर और टोक्या पाढर को प्रस्तावित नगर निगम की सीमा से बाहर रखा जाए, ग्राम पंचायत का दर्जा बरकरार रखा जाए अथवा किसी अन्य ग्राम पंचायत में शामिल किया जाए। उनका कहना है कि नगर निगम में शामिल करने का प्रस्ताव उनकी जानकारी और सहमति के बिना पारित किया गया है।

बैतूल को नगर निगम बनाने के लिए आसपास की 26 ग्राम पंचायतों को शामिल करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। राज्य सरकार की अंतिम मंजूरी के बाद ही इस पर आगे की कार्रवाई होगी।

विरोध लगातार बढ़ रहा है

नगर निगम गठन के प्रस्ताव का विरोध अब कई गांवों तक पहुंच चुका है। इससे पहले बाजपुर, खेड़ला, मरामझिरी, जामठी, टेमनी और अन्य प्रभावित ग्राम पंचायतों के ग्रामीण भी कलेक्ट्रेट पहुंचकर ज्ञापन सौंप चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बिना व्यापक सहमति के गांवों को नगर निगम में शामिल करना उचित नहीं होगा और वे अपने ग्राम पंचायत अधिकारों को बनाए रखने की मांग पर अड़े हुए हैं।

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