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ट्रेन के टॉयलेट में आधे घंटे फंसी रही पत्नी, पति ने कर दिया केस; 3 साल बाद रेलवे करेगा भरपाई

तीन साल पहले ट्रेन यात्रा के दौरान हुई असुविधा अब भारतीय रेलवे पर भारी पड़ गई है. मध्य प्रदेश के भोपाल जिला उपभोक्ता आयोग ने सेवा में कमी के चलते रेलवे को 40,000 रुपये का हर्जाना अदा करने का आदेश दिया है. मामला अप्रैल 2022 का है, जब एक महिला ट्रेन के शौचालय में आधे घंटे तक फंसी रही थी ओर रेलवे ने कोई मदद नहीं की थी.

भोपाल के रविदास नगर निवासी उमेश पांडे ने यह परिवाद दायर किया था. उन्होंने बताया कि वे 20 अप्रैल 2022 को त्रिकूट एक्सप्रेस की थर्ड एसी बोगी में अपने परिवार सहित कन्याकुमारी से भोपाल लौट रहे थे. यात्रा के दौरान उन्हें कई असुविधाओं का सामना करना पड़ा. बर्थ फटी हुई थी, शौचालय की सीट टूटी हुई थी, और सबसे गंभीर बात यह रही कि उनकी पत्नी शौचालय में गईं तो दरवाजा अंदर से लॉक हो गया और वह करीब आधे घंटे तक अंदर बंद रहीं. अन्य यात्रियों की मदद से किसी तरह उन्हें बाहर निकाला गया.

यात्री ने उपभोक्ता आयोग में किया केस

इस घटना के बाद पांडे ने रेलवे में ऑनलाइन शिकायत की, लेकिन उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला. इसके बाद उन्होंने उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज करवाई, जिसमें उन्होंने कोच की तस्वीरें, टिकट की प्रति और रेलवे को की गई शिकायत और उसके जवाब के दस्तावेज पेश किए

40,000 रुपये का मुआवजा देने का आदेश

सुनवाई के दौरान रेलवे ने यह दलील दी कि टिकट केवल यात्रा का अधिकार देता है, सुविधाएं इसकी गारंटी नहीं होतीं. साथ ही रेलवे ने दावा किया कि मदुरई स्टेशन पर शौचालय की मरम्मत की कोशिश की गई थी, लेकिन ट्रेन को अधिक समय तक रोका नहीं जा सका. हालांकि, आयोग ने रेलवे के इन तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि यात्रियों को सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा का अधिकार है. आयोग ने रेलवे को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए 40,000 रुपये का मुआवजा देने का आदेश सुनाया.

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