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उल्टे हनुमान जी की अनोखी प्रतिमा… त्रेतायुग से जुड़ा है इतिहास, दर्शन मात्र से होती है हर मनोकामना पूरी

इंदौर: वैसे तो देश-प्रदेश में हनुमान जी के बहुत से मंदिर हैं, लेकिन मध्यप्रदेश सांवेर में श्री उल्टे हनुमान मंदिर अपनी अनोखी हनुमान प्रतिमा के कारण देशभर के श्रद्धालुओं का आस्था केंद्र बन चुका है। यहां बजरंगबली की प्रतिमा सिर के बल उल्टी अवस्था में विराजित है।

मान्यता है कि जब त्रेतायुग में जब रावण राम और लक्ष्मण का अपहरण कर पाताल लोक ले गया था, तब हनुमानजी ने यहीं से पाताल यात्रा की थी। ऐसा कहा जाता है, कि उसी समय की यह प्रतिमा है, जो हनुमानजी की वीरता और भक्ति की अनोखी छवि प्रस्तुत करती है। यह स्थान न केवल ऐतिहासिक महत्व रखता है, बल्कि अध्यात्मिक ऊर्जा से भी ओतप्रोत माना जाता है।

मंदिर के मुख्य पुजारी नवीन व्यास बताते हैं, कि यदि कोई भक्त लगातार पांच मंगलवार यहां नारियल चढ़ाकर पूजा करता है, तो उसकी हर मनोकामना पूरी होती है। शत्रु नाश, न्याय प्राप्ति और संकटों से मुक्ति के लिए विशेष पूजा अर्चना की जाती है। सरसों के तेल का दीपक शत्रु बाधाओं को दूर करता है, जबकि घी का दीपक सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। यहां भक्त उल्टा स्वास्तिक बनाकर भी मन्नतें मांगते हैं। शनिवार को हनुमान जयंती के अवसर पर मंदिर में भव्य धार्मिक आयोजन होंगे। प्रातः आरती से लेकर संध्या तक पूजा-पाठ, भजन और विशेष प्रसाद वितरण होगा। इसे विजय दिवस के रूप में मनाया जाएगा, जिसमें देशभर से हज़ारों श्रद्धालु हिस्सा लेंगे। यह मंदिर न केवल श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है, बल्कि हनुमानजी की अनूठी लीलाओं की स्मृति भी जगाता है।

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