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Yuvraj Manchanda Case: शादी की शॉपिंग के बाद लापता हुए युवराज का नाले में मिला शव; करोड़ों के पैसों के विवाद में पीछे से मारी गोली

गुरुग्राम। शादी में महज कुछ ही हफ्ते बाकी बचे थे, घर में खुशियों का माहौल था और शेरवानी भी फाइनल हो चुकी थी। 31 वर्षीय युवराज सिंह मनचंदा एक मीटिंग के बाद जल्द घर लौटने का वादा करके निकले थे, लेकिन वही उनकी जिंदगी का आखिरी सफर साबित हुआ। उनका शव बाद में गुरुग्राम के एक नाले से बरामद किया गया।

पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक, करोड़ों रुपये के पैसों के लेन-देन और विवाद के कारण युवराज की कथित तौर पर हत्या कर दी गई। हालांकि, परिजनों ने गुरुग्राम पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस को शव 10 सितंबर को ही मिल गया था, लेकिन उन्हें सूचित किए बिना ही लावारिस मानकर 14 सितंबर को अंतिम संस्कार कर दिया गया। परिजनों को इस बात की भनक तब लगी जब दिल्ली पुलिस की जांच आगे बढ़ी।

📱 मंगेतर और बॉस को दी थी मीटिंग की जानकारी: व्हाट्सएप मैसेज भेजकर लगातार बदलते रहे लोकेशन

युवराज की बहन करिश्मा के मुताबिक, परिवार ने आखिरी बार 6 सितंबर को शाम करीब 7:30 बजे उनसे बात की थी। वह शादी की शॉपिंग के लिए परिवार के साथ लाजपत नगर गए थे।

शेरवानी पसंद करने के बाद वह यह कहकर निकले कि उन्हें अपनी एक पुरानी महिला सहकर्मी से मिलना है। उन्होंने अपनी मंगेतर और बॉस को भी इस मीटिंग के बारे में सूचित किया था। इसके बाद युवराज के फोन से केवल मैसेज ही आते रहे, जिसमें लिखा था कि वह ठीक हैं और फोन बंद हो सकता है। बाद में मैसेज के जरिए लौटने की तारीख शनिवार से बदलकर गुरुवार की गई, जिससे परिवार को अनहोनी की आशंका हुई और वे घबराने लगे।

🏠 बीमार माता-पिता और घर की जिम्मेदारियां: बचपन के दोस्त ने बयां किया दर्द

युवराज के बचपन के दोस्त रजत जैन ने बताया कि कम उम्र से ही युवराज ने अपने घर की पूरी जिम्मेदारी संभाल ली थी। उनके पिता आंशिक रूप से पैरालिसिस (लकवा) से पीड़ित हैं और मां भी अक्सर बीमार रहती हैं।

युवराज के गायब होने के बाद परिवार ने कई दिनों तक उनके लौटने का इंतजार किया और आखिरकार 11 सितंबर को पुलिस में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद दिल्ली पुलिस की जांच युवराज की पूर्व महिला सहयोगी अन्या वत्स और उसके पति संयम सचदेवा पर टिक गई।

🚔 उत्तराखंड के पीजी से पकड़े गए आरोपी: कार में पीछे से गर्दन में मारी गई थी गोली

दिल्ली पुलिस ने जांच के आधार पर आरोपी दंपत्ति अन्या वत्स और संयम सचदेवा को उत्तराखंड के एक पीजी (PG) से गिरफ्तार कर लिया।

पूछताछ के दौरान आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने पैसों के विवाद के चलते युवराज की हत्या कर दी और शव को अपनी सोसाइटी के पास नाले में फेंक दिया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आरोपी युवराज को कार में बैठाकर घूमते रहे। संयम गाड़ी चला रहा था और अन्या पीछे बैठी थी, जिसने पीछे से युवराज की गर्दन में गोली मार दी। इसके बाद उन्होंने शव को नाले में फेंक दिया और कार अपनी सोसाइटी में पार्क कर दी।

💰 रियल एस्टेट में करोड़ों का लेन-देन: आर्थिक तंगी के बावजूद जी रहे थे आलीशान जिंदगी

पुलिस ने बताया कि पीड़ित युवराज, आरोपी अन्या और संयम पहले एक ही रियल एस्टेट कंपनी में काम करते थे। अन्या को वित्तीय गड़बड़ियों के आरोप में कंपनी से निकाल दिया गया था।

इसके बाद वह फ्रीलांसिंग कर रही थी और कुछ रियल एस्टेट डील्स में युवराज की मदद ले रही थी। जांच से खुलासा हुआ कि पर्याप्त वित्तीय स्रोत न होने के बावजूद आरोपी दंपत्ति आलीशान जिंदगी जी रहे थे और उन पर आईटी एक्ट व धोखाधड़ी के कई पुराने मामले भी दर्ज हैं।

❓ पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल: “बिना सूचना दिए क्यों कर दिया अंतिम संस्कार?”

10 सितंबर को गुरुग्राम के बादशाहपुर थाना क्षेत्र के नाले से एक अज्ञात शव बरामद हुआ था। परिजनों का आरोप है कि शव 10 सितंबर को मिलने के बावजूद दिल्ली में दर्ज गुमशुदगी की रिपोर्ट से इसका मिलान नहीं किया गया।

करिश्मा ने बताया कि उन्हें भाई की अंगूठी और घड़ी तक वापस नहीं दी गई। परिवार ने शुरुआत में पुलिस के इस दावे पर भी सवाल उठाए कि मौत डूबने से हुई थी। परिजनों का कहना है कि 1-2 फीट पानी में कोई कैसे डूब सकता है? साथ ही पुलिस नेटवर्क पर लावारिस शव की जानकारी 16 सितंबर को अपलोड करने को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। फिलहाल कोर्ट ने दोनों आरोपियों को 5 दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया है।

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