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महाराष्ट्र में MPSC के खिलाफ छात्रों का फूटा आक्रोश: चेयरमैन के इस्तीफे की मांग, राहुल गांधी का मिला समर्थन

मुंबई (महाराष्ट्र): महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की परीक्षाओं के बदले पैटर्न और विसंगतियों को लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

सीटों में अप्रत्याशित कटौती और जटिल कागजी प्रक्रिया से नाराज परीक्षार्थियों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया और MPSC चेयरमैन के तत्काल इस्तीफे की मांग की। छात्रों के इस बड़े आंदोलन को संसद में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का भी खुला समर्थन मिला है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए छात्रों की मांगों को पूरी तरह जायज ठहराया और सरकार से त्वरित समाधान निकालने की मांग की।

📱 ‘पूरे सिस्टम से टूट चुका है भरोसा’: राहुल गांधी ने केंद्र व राज्य सरकार को घेरा

नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का बयान और सरकार पर आरोप:

  • छात्रों की पीड़ा का जिक्र: राहुल गांधी ने लिखा कि महाराष्ट्र में हजारों युवा अपने भविष्य की खातिर बारिश और मुश्किल हालात में शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे हैं। इसकी वजह महज एक परीक्षा नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था से पूरी तरह टूट चुका भरोसा है।

  • भ्रष्टाचार और अव्यवस्था का आरोप: उन्होंने कहा कि चाहे केंद्र हो या राज्य, युवा भाजपा सरकार की नीतियों से त्रस्त हैं। पेपर लीक, अटकी पड़ी भर्तियां, शिक्षा का निजीकरण, हॉस्टलों के अमानवीय हालात, घटिया खाना और डीबीटी (DBT) में अनियमितताएं आम हो चुकी हैं।

  • संवैधानिक संस्थाओं की साख पर सवाल: उन्होंने आरोप लगाया कि MPSC जैसी प्रतिष्ठित संवैधानिक संस्था की विश्वसनीयता को ध्वस्त कर दिया गया है। जब तक युवाओं को न्याय नहीं मिल जाता, तब तक यह जनाक्रोश और बढ़ता ही जाएगा।

🌧️ बारिश में भीगते हुए छात्रों ने निकाला ‘आक्रोश मोर्चा’: कलेक्ट्रेट परिसर में गूंजे नारे

सड़कों पर प्रदर्शन और युवाओं का भारी हुजूम:

  • आक्रोश मार्च का आयोजन: 4 सितंबर को अपने अधिकारों की रक्षा के लिए हजारों परीक्षार्थी सड़कों पर उतरे और जिला कलेक्टर कार्यालय तक विशाल ‘आक्रोश मोर्चा’ निकाला।

  • युवतियों की उल्लेखनीय भागीदारी: मूसलाधार बारिश के बावजूद युवाओं का हौसला कम नहीं हुआ। इस मार्च में बड़ी संख्या में छात्राओं और युवतियों ने भी हिस्सा लिया।

  • महापुरुषों की तस्वीरों के साथ प्रदर्शन: छात्र हाथों में संविधान, महापुरुषों के छायाचित्र और अपनी प्रमुख मांगों से जुड़े तख्तियां व बैनर लेकर शांतिपूर्ण ढंग से आगे बढ़े।

📑 जिला कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन: मांगों पर तुरंत कार्रवाई की चेतावनी

प्रशासनिक वार्ता और सभा में तब्दील हुआ मार्च:

  • परिसर में जोरदार नारेबाजी: कलेक्ट्रेट पहुंचते ही पूरा प्रशासनिक परिसर प्रतियोगी छात्रों के गूंजते नारों से भर गया, जिसके बाद यह मार्च एक विशाल जनसभा में बदल गया।

  • प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात: छात्र प्रतिनिधियों के एक मुख्य शिष्टमंडल ने जिला कलेक्टर से मुलाकात कर मुख्यमंत्री और राज्यपाल के नाम विस्तृत ज्ञापन सौंपा।

  • सकारात्मक निर्णय की मांग: छात्रों ने प्रशासन के माध्यम से स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि परीक्षा पैटर्न में सुधार, सीटों की बहाली और व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के ठोस कदम तुरंत नहीं उठाए गए, तो आंदोलन को राज्यव्यापी स्तर पर और उग्र किया जाएगा।

 

 

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