
बस ऑपरेटरों की मांग पर सरकार झुकी, किराया 75 पैसे प्रति किमी बढ़ा; बैतूल से भोपाल-नागपुर-अमरावती का सफर हुआ महंगा
बैतूल। बस ऑपरेटरों की प्रस्तावित अनिश्चितकालीन हड़ताल टलने के बाद सरकार ने उनकी प्रमुख मांगों में से किराया बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। नए आदेश के बाद यात्री बसों के किराये में प्रति किलोमीटर 75 पैसे तक की बढ़ोतरी हुई है। पहले करीब 1.25 रुपए प्रति किमी की दर से किराया लिया जा रहा था, जो अब 2 रुपए प्रति यात्री प्रति किमी तक पहुंच गया है। यानी लंबी दूरी की बसों में सफर करने वाले यात्रियों की जेब पर सीधे अतिरिक्त भार पड़ेगा।
बस ऑपरेटरों ने किराया बढ़ाने की मांग लंबे समय से उठा रखी थी। 30 जुलाई को मध्यप्रदेश बस ऑनर्स एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री, परिवहन मंत्री, परिवहन सचिव और परिवहन आयुक्त को दिए विस्तृत ज्ञापन में बताया था कि यात्री बसों का किराया वर्ष 2021 में निर्धारित हुआ था और इसके बाद लगातार महंगाई बढ़ी है। 15 जून 2026 को किराया निर्धारण बोर्ड की बैठक में 2.50 रुपए प्रति किलोमीटर किराया करने का प्रस्ताव रखे जाने का भी उल्लेख ज्ञापन में किया गया था।
बैतूल से इन शहरों का सफर अब इतना महंगा
नए किराये का असर बैतूल से चलने वाली लंबी दूरी और लोकल बसों पर भी दिखाई देगा। ऑपरेटरों से मिली जानकारी के अनुसार—
रूट पुराना किराया नया किराया
बैतूल-भोपाल ₹250 करीब ₹350 वैसे यह 372 रु होता है
बैतूल-इटारसी ₹130 ₹180
बैतूल-नर्मदापुरम ₹150 ₹220
बैतूल-शाहपुर ₹50 ₹70
बैतूल-भैरा ₹70 ₹90
बैतूल-भैंसदेही ₹80 ₹120
बैतूल-आमला ₹40 ₹70
बैतूल-नागपुर ₹300-350 के आसपास करीब ₹440 होता है।
बैतूल-अमरावती ₹250 ₹350
मुलताई ₹70 ₹100
इंदौर रूट पर भी किराये में बढ़ोतरी होगी। यहां ऑनलाइन टिकट और बस सेवा के हिसाब से किराये में अंतर रहता है। अभी करीब 350 से 400 रुपए तक चलने वाला किराया भी बढ़ाया जाएगा।
किराया बढ़ोतरी के पीछे ऑपरेटरों की दलील
बस संचालकों का कहना था कि डीजल, मोटरयान कर, बीमा, बसों के रखरखाव, स्टाफ और अन्य खर्च लगातार बढ़े हैं, जबकि किराया वर्षों से पुरानी दर पर चल रहा था। ज्ञापन में ऑपरेटरों ने कहा कि 2021 के बाद महंगाई के अनुरूप किराया नहीं बढ़ाया गया और इससे बस संचालन आर्थिक रूप से मुश्किल हो रहा था।
हालांकि ऑपरेटरों ने 2.50 रुपए प्रति किलोमीटर किराये की मांग की थी, लेकिन सरकार ने फिलहाल 2 रुपए प्रति किलोमीटर तक की दर तय की है। इससे ऑपरेटरों की मांग पूरी तरह नहीं, लेकिन आंशिक रूप से पूरी हुई है।
किराये के साथ दूसरी मांगों पर भी सरकार का आश्वासन
बस ऑपरेटरों की सिर्फ किराया बढ़ोतरी ही मांग नहीं थी। एसोसिएशन ने सात सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सरकार को दिया था। इसमें मध्यप्रदेश में बस मार्गों के राष्ट्रीयकरण को रोकना, निजी बसों से रॉयल्टी या प्रीमियम लेने की व्यवस्था रोकना, नई बसों के पंजीयन की समस्या दूर करना, 15 वर्ष की आयु सीमा खत्म करना, अंतरराज्यीय परमिट का नवीनीकरण और परिवहन कार्यालयों की कार्यप्रणाली सुधारना शामिल था।
ऑपरेटरों ने करीब 1200 नई बसों के पंजीयन का मुद्दा भी उठाया था। साथ ही पुरानी बसों के लिए 15 साल की सीमा खत्म कर फिटनेस वैध रहने तक संचालन की अनुमति देने की मांग की गई थी।
7 अगस्त से होनी थी हड़ताल
इन मांगों को लेकर प्रदेश के 55 जिलों के मोटर मालिकों की बैठक 26 जुलाई को सागर में हुई थी। ऑपरेटरों ने सरकार को 7 अगस्त तक मांगों के निराकरण का समय दिया था। मांगें पूरी नहीं होने पर 7 अगस्त की रात 12 बजे से अनिश्चितकालीन बस हड़ताल की चेतावनी दी गई थी।
सरकार और बस ऑपरेटरों के बीच बातचीत के बाद हड़ताल फिलहाल टल गई। इसके बाद अब किराया बढ़ाने का आदेश सामने आया है। बाकी मुद्दों पर सरकार ने अधिकारियों और बस ऑपरेटर एसोसिएशन के प्रतिनिधियों की समिति गठित कर आगे निर्णय लेने की प्रक्रिया शुरू की है।
हड़ताल टली, लेकिन यात्रियों की जेब पर बोझ बढ़ा
बैतूल जिले के यात्रियों पर इसका सबसे ज्यादा असर लंबी दूरी की बसों में दिखाई देगा। जिले से रोजाना भोपाल, नागपुर, अमरावती, इंदौर के अलावा इटारसी, नर्मदापुरम, मुलताई, आमला, शाहपुर, भैंसदेही और अन्य क्षेत्रों के लिए बसें चलती हैं।
यानी बसों की हड़ताल से होने वाली परेशानी तो टल गई, लेकिन अब यात्रियों को बढ़े हुए किराये का बोझ उठाना पड़ेगा। खासतौर पर रोज बस से नौकरी, पढ़ाई और कारोबार के लिए आने-जाने वाले यात्रियों के मासिक खर्च में इसका सीधा असर पड़ेगा।
साफ शब्दों में कहें तो—बस ऑपरेटरों की हड़ताल टली, उनकी किराया बढ़ाने की मांग मानी गई और अब इसका भुगतान आम यात्री अपनी जेब से करेगा।
