Logo
ब्रेकिंग
फोन नहीं उठाते सीईओ,मीडियाकर्मियों में नाराजगी,ज्ञापन सौंपा Ola Uber Ban Chandigarh: ओला-उबर के लाइसेंस रद्द होने के बाद शुरू हुई 'भारत टैक्सी', जानिए यात्रियों... Haryana News: लगातार चौथी बार देश में अव्वल रही करनाल शुगर मिल, केंद्रीय मंत्रियों ने दी प्रतिष्ठित ... NCC DG Team Selection: हरियाणा के होनहार शूटर विजयन्त ढाण्डा ने बढ़ाया राज्य का मान, देश के टॉप-12 शू... Haryana Road Mishap: नूंह सड़क हादसे में चार लोगों की मौत, पत्नी गंभीर रूप से घायल; पुलिस जांच में ज... Haryana Crime News: पानीपत में اغवा हुआ बच्चा बरामद, एक लाख में बेचने की थी डील; पुलिस ने दो को दबोच... Gurnam Singh Chaduni Mahapanchayat: धान खरीद की मांग पर अड़े किसान, हाईवे पर बीती रात; आज होगी बड़ी ... Patna Mithila Colony Incident: दानापुर में खूनी संघर्ष, शादी से पहले सिपाही भाई ने की आत्महत्या, पुल... Delhi Demolition News: शालीमार बाग मैक्स अस्पताल रोड पर देर रात चला पीला पंजा; भारी पुलिस बल तैनात, ... Monsoon Update 2026: मॉनसून की विदाई के बीच बिगड़ेगा मौसम; मध्य प्रदेश, ओडिशा और पूर्वोत्तर में भारी...
Header Ad

इधर हमास-हिजबुल्लाह पड़ा कमजोर, उधर ईरान ने नए सिरे से खड़े कर दिए 4 प्रॉक्सी

0

जैसे ही हमास और हिजबुल्लाह मध्यपूर्व में कुछ कमजोर हुए हैं, ईरान ने नए प्रॉक्सी तैयार कर अपने प्रभाव को बढ़ाने की कोशिश की है. मगर अब अमेरिका ने हाल ही में ईरान से जुड़े चार इराकी हथियारबंद गुटों को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किया है.

इन समूहों के नाम हैं-हरकात अल-नुजाबा, कताइब सैय्यद अल-शुहदा, हरकात अंसार अल्लाह अल-अवफिया और कताइब इमाम अली. अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक ईरान इन समूहों को वित्तीय, हथियार और प्रशिक्षण सहायता देता रहा है, जिससे ये अमेरिका और उसके सहयोगियों के खिलाफ हमले करने में सक्षम हो रहे हैं.

ईरान के समर्थन में ये समूह

हरकात अल-नुजाबा 2013 में अस्तित्व में आया और इसका नेतृत्व अकरम अल-काबी करते हैं. यह समूह ईरानी क़ुद्स फोर्स के साथ घनिष्ठ रूप से जुड़ा है और इस्लामिक रेजिस्टेंस की विचारधारा अपनाता है. इसने सीरिया की लड़ाई में अलेप्पो में कताइब हिजबुल्लाह के साथ अहम भूमिका निभाई थी. अमेरिका का दावा है कि ईरान इसे पैसा, हथियार और खुफिया जानकारी मुहैया कराता है.

कताइब सैय्यद अल-शुहदा भी 2013 में बना और इसका मकसद शिया पवित्र स्थलों की रक्षा करना बताया गया. यह समूह सीरियाई शासन के साथ लड़ाइयों में सक्रिय है और इराक में अमेरिकी दूतावास और सैन्य ठिकानों पर हमलों में शामिल होने का आरोप है. बाकी दो समूह- हरकात अंसार अल्लाह अल-अवफिया और कताइब इमाम अली भी ईरान की वित्तीय और सैन्य मदद से काम करते हैं और स्थानीय स्तर पर अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय बलों के खिलाफ सक्रिय हैं.

अमेरिका ने अपनाई मैक्सिमम प्रेशर नीति

अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि यह कदम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मैक्सिमम प्रेशर नीति के तहत लिया गया है. इस नीति का मकसद ईरान को अपने क्षेत्रीय सहयोगियों को पैसा और हथियार देने से रोकना है. पहले भी अमेरिका ने कताइब हिज़्बुल्लाह और असाइब अहल अल-हक के नेताओं पर वित्तीय प्रतिबंध लगाए थे. अमेरिका का कहना है कि ये सभी समूह ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की देखरेख में काम करते हैं और तेहरान के एजेंट के रूप में क्षेत्रीय रणनीति को आगे बढ़ाते हैं.

Leave A Reply

Your email address will not be published.