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किताबों से भरा था कमरा, कबाड़ी को बेचने जा रहे थे टीचर, तभी हुआ कुछ ऐसा…स्कूल से हुए फरार

मध्य प्रदेश के शिवपुरी के कोलारस में स्थित एकीकृत शासकीय माध्यमिक विद्यालय लुकवासा का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें किताबें बिखरी हुईं नजर आ रही हैं. ये किताबें बच्चों को बांटने के लिए आई थीं, जो रखे-रखे रद्दी कर दी गईं. इन्हें अब स्कूल के टीचर चोरी-छिपे बेचने जा रहे थे, लेकिन तभी वहां कोई आ गया और टीचर सभी किताबों को बिखरा हुआ छोड़कर भाग गए.

ये किताबें स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को बांटने के लिए आई थीं, लेकिन ये किताबें बच्चों को बांटने की बजाय स्कूल के स्टोर रूम में ही रखी रहीं. अब यह किताबें रद्दी हो गई हैं. बताया जा रहा है कि स्कूल के कर्ताधर्ता इन किताबों को रद्दी के भाव कबाड़ी को बेचने की कोशिश कर रहे थे, तभी किसी के आ जाने की वजह से वह किताबों को बिखरी हुईं छोड़कर स्कूल में ताला लगाकर भाग गए.

पहले बताई लाइब्रेरी की किताबें

हालांकि इस बारे में जब स्कूल के प्रभारी देवीलाल दिवाकर से बात की गई तो उन्होंने इस बारे में कोई जानकारी न होने की बात कह दी और साफतौर पर कह दिया कि वह किसी से कोई बात नहीं करना चाहते हैं. वहीं सीएसी सुरेश चंद्र त्यागी से इस बारे में बात की गई तो उन्होंने पहले इन किताबों को लाइब्रेरी की किताबें बताया. फिर यह कहते नजर आए कि पिछले साल किताबें ज्यादा आ गई थीं, इसलिए बच गईं.

DPC ने मामले को लेकर क्या कहा?

इस मामले में जब DPC (Departmental Promotion Committee) दफेदार सिंह सिकरवार से बात की गई तो उनका कहना था कि उन्होंने सीएसी और स्कूल के प्रभारी से बात की तो उन्होंने बताया कि यह किताबें तीन साल पुरानी हैं. जब किताबें जन शिक्षा केंद्र पर स्टॉक की जाती थीं, लेकिन स्कूल के शिक्षक किताबों को नहीं ले गए. इस वजह से बच गई हैं. इन किताबों को किसी ने साजिशन बिखेर दिया है.

पहले भी सामने आया था मामला

वहीं दूसरी ओर पूरे जिले की बात करें तो सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे महीनों तक किताबों के लिए तरसते रहे, लेकिन उन्हें पढ़ने के लिए किताबें मुहैया नहीं कराई गईं. बताया जा रहा है कि कई स्कूलों में जानबूझ कर किताबों को रद्दी कर दिया जाता है. ताकि उन्हें बेचकर पैसा बनाया जा सके. हाल ही में भौंती स्कूल में भी रद्दी की गई किताबों को कबाड़ी को बेचे जाने का मामला सामने आया था.

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