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27 लाख इमारतों की जांच में मिलीं केवल 19 खतरनाक: सत्य निकेतन हादसे ने मानसून पूर्व सर्वे पर खड़े किए सवाल

नई दिल्ली: दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला पेइंग गेस्ट (PG) भवन ढहने की भीषण दुर्घटना ने पूरी राजधानी को झकझोर कर रख दिया है।

इस दर्दनाक हादसे में 7 लोगों की असामयिक मृत्यु के बाद दिल्ली नगर निगम (MCD) की कार्यप्रणाली और मानसून से पहले किए जाने वाले कमजोर इमारतों के सर्वेक्षण की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गए हैं। एमसीडी के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष की शुरुआत में नगर निगम द्वारा 27,84,286 संपत्तियों का व्यापक सर्वे किया गया था, जिसमें से आश्चर्यजनक रूप से केवल 19 इमारतों को ही खतरनाक या असुरक्षित घोषित किया गया था।

अधिकारियों का कहना है कि यह सर्वे केवल बाहरी दृश्यों—जैसे दीवारों में दिखती दरारें, झुकाव या स्पष्ट कमजोरी के संकेतों तक ही सीमित रहता है और इसमें कोई गहन संरचनात्मक ऑडिट (Structural Safety Audit) नहीं किया जाता।

🏗️ जून से सितंबर तक 980 अवैध निर्माणों पर चला बुलडोजर: 460 संपत्तियां सील

निगम द्वारा की गई दंडात्मक कार्रवाई का ब्योरा:

  • तोड़फोड़ और सीलिंग: अधिकारियों के अनुसार, जून से सितंबर की अवधि के भीतर एमसीडी ने करीब 980 संपत्तियों के विरुद्ध डिमोलिशन की कार्रवाई की और 460 अवैध संपत्तियों को सील किया।

  • नोटिस और आदेश: नियमों की अनदेखी पर 1,500 से अधिक कारण बताओ नोटिस, 708 सीलिंग नोटिस और 720 से अधिक तोड़फोड़ के औपचारिक आदेश जारी किए गए।

  • टैक्स भुगतान वैधता का प्रमाण नहीं: एमसीडी दस्तावेजों के अनुसार, सत्य निकेतन की ढही इमारत के मालिक ने पिछले साल प्रॉपर्टी टैक्स और 2007 में कन्वर्जन चार्ज का भुगतान किया था, हालांकि निगम ने स्पष्ट किया कि टैक्स जमा करने से किसी अवैध ढांचे को तकनीकी या कानूनी वैधता प्राप्त नहीं हो जाती।

🏚️ 55 वर्ग गज के प्लॉट पर 5 मंजिलें: बिना नक्शे के संचालित हो रहा था बॉयज पीजी

इमारत की संरचना और नियमों का खुला उल्लंघन:

  • पुनर्वास कॉलोनी का नियम टूटा: यह इमारत 55 वर्ग गज के छोटे भूखंड पर बनी थी। इन पुनर्वास कॉलोनियों में नियमों के तहत केवल ग्राउंड और फर्स्ट फ्लोर के निर्माण की स्वीकृति थी, लेकिन इसके ऊपर अवैध रूप से पांच मंजिलें खड़ी कर दी गईं।

  • उम्र को लेकर विरोधाभास: निगम के अनुसार भवन 1990 के दशक में बना था, जबकि स्थानीय निवासियों का दावा है कि यह ढांचा 1970 के दशक का लगभग 50 वर्ष पुराना था।

  • स्वीकृत नक्शा नदारद: इमारत का कोई स्वीकृत नक्शा रिकॉर्ड में दर्ज नहीं था और यह दशकों से बिना किसी एनओसी या सुरक्षा मानकों के छात्रों के पीजी के तौर पर संचालित हो रही थी।

⚠️ बेसमेंट में खुदाई और जमा पानी पर जांच: पास का गर्ल्स पीजी सील, 4 भवनों को नोटिस

तात्कालिक कारण और आसपास की इमारतों पर एक्शन:

  • जलभराव और मरम्मत कार्य: स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि बेसमेंट में अनियोजित तरीके से मरम्मत कार्य चल रहा था और जलभराव के कारण नींव कमजोर हो गई थी।

  • मजिस्ट्रेट जांच जारी: एमसीडी आयुक्त संजीव खिरवार ने कहा कि बेसमेंट में चल रहे काम और वास्तविक कारणों की पुष्टि मजिस्ट्रेट जांच की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।

  • धारा 349 के तहत कार्रवाई: एहतियात के तौर पर निगम ने पास में संचालित एक गर्ल्स पीजी को खाली कराकर सील कर दिया है। इसके अलावा आसपास की कम से कम 4 जर्जर इमारतों को दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 की धारा 349 और 491 के तहत परिसर खाली करने के कानूनी नोटिस जारी किए गए हैं।

⏳ दक्षिण दिल्ली में पूर्व में हुए बड़े हादसे: सुरक्षा व्यवस्था पर बार-बार उठते सवाल

राजधानी में इस वर्ष दर्ज प्रमुख घटनाएं:

  • सैदुल अजायब हादसा (30 मई): दक्षिण दिल्ली के सैदुल अजायब में एक इमारत ढहने से 6 लोगों की मौत हो गई थी।

  • हौज रानी अग्निकांड (3 जून): हौज रानी स्थित एक बेड एंड ब्रेकफास्ट प्रतिष्ठान में भीषण आग लगने से 11 विदेशी नागरिकों सहित कुल 23 लोगों की जान चली गई थी।

  • मलका गंज और करावल नगर: जून माह में ही मलका गंज सब्जी मंडी में एक पुराना मकान और करावल नगर में 4 मंजिला इमारत जमींदोज हो गई थी।

🛑 दक्षिण क्षेत्र के उपायुक्त और चार इंजीनियर निलंबित: भाजपा नेता विजय गोयल ने उठाए सवाल

प्रशासनिक जवाबदेही और राजनीतिक प्रतिक्रिया:

  • अफसरों पर गाज: हादसे की प्राथमिक जवाबदेही तय करते हुए एमसीडी ने दक्षिण क्षेत्र के उपायुक्त (DC) राकेश कुमार और चार संबंधित फील्ड इंजीनियरों को अनुशासनात्मक कार्रवाई लंबित रहने तक तत्काल निलंबित कर दिया है।

  • विजय गोयल का आरोप: पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता विजय गोयल ने सोशल मीडिया मंच एक्स (X) पर कहा कि उन्होंने दिल्ली में बेलगाम अवैध निर्माण का मुद्दा बार-बार उठाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुरानी दिल्ली और चांदनी चौक जैसे संवेदनशील इलाकों में खुलेआम छह-छह मंजिलों तक का अवैध निर्माण जारी है, जिसकी अनदेखी भविष्य में और बड़े हादसों को निमंत्रण दे सकती है।

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