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चार साल की जैनब ने रखा रोजा। आत्मसंयम,सब्र,अनुशासन का दिया संदेश

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बैतूल। रमजान के पाक महीने में जहां बड़े-बुजुर्ग रोजा रखकर इबादत में मशगूल हैं, वहीं एक नन्ही बच्ची ने भी रोजे की अहमियत को समझते हुए सभी को हैरान कर दिया।

शहर में चार साल की जैनब, पिता मोहम्मद जुबेर पटेल की बेटी, ने रोजा रखकर परिवार के साथ पूरा दिन इबादत में बिताया। जैनब तीन बहनों में सबसे छोटी है और मदरसा मकतब में अरबी की तालीम ले रही है। परिवार के मुताबिक उसे दिन भर भूख-प्यास का अहसास भी नहीं हुआ और उसने पूरे उत्साह के साथ रोजा निभाया।

जैनब के घर में रमजान के महीने में सभी सदस्य रोजा रखते हैं। उसकी बड़ी बहन तंजिला (12 वर्ष) और अलिसा (8 वर्ष) भी पूरे रोजे रख रही हैं।

जैनब के दादा हाजी युसुफ पटेल, जो वरिष्ठ भाजपा नेता और जिले के प्रमुख किराना व्यवसायी हैं, ने बताया कि जब वे शाम को घर पहुंचे और उन्हें बताया गया कि जैनब ने रोजा रखा है और पूरे दिन उसे निभाया भी, तो वे हैरान रह गए। उन्होंने कहा कि इतनी छोटी उम्र में रोजे की पाबंदी देख उन्हें बेहद खुशी और गर्व महसूस हुआ।

रमजान में रोजा इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक माना जाता है। रोजा केवल भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं है, बल्कि यह सब्र, अनुशासन, आत्मसंयम और अल्लाह की इबादत का संदेश देता है। छोटी उम्र में बच्चों का रोजे और इबादत के प्रति रुझान परिवार और समाज में धार्मिक संस्कारों की झलक भी दिखाता है।

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