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Cyber fraud:बैतूल में हुआ साइबर ठगी का सबसे बड़ा खुलासा मृत व्यक्ति का खाता बना गिरोह का औजार, बैंक के अंदर से लीक हुई थी गोपनीय जानकारी

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बैतूल। मध्यप्रदेश के शांत और सुरक्षित समझे जाने वाले बैतूल जिले से एक ऐसी सनसनीखेज वारदात सामने आई है जिसने पूरे प्रदेश में साइबर सुरक्षा की पोल खोल दी है। यहां 9 करोड़ 84 लाख रुपये की सबसे बड़ी संगठित साइबर ठगी का पर्दाफाश हुआ है। बैतूल पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त कार्रवाई में खुलासा हुआ कि यह गिरोह मृत व्यक्ति के बैंक खाते का उपयोग कर करोड़ों की लेन-देन कर रहा था।
पूरा मामला तब सामने आया जब खेड़ी सावलीगढ़ निवासी मजदूर बिसराम इवने (40) ने शिकायत दी कि उसके जन-धन खाते में दो करोड़ रुपये के संदिग्ध ट्रांजैक्शन दिख रहे हैं। गरीब मजदूर के खाते में इतनी बड़ी रकम देखकर पुलिस और बैंक अधिकारी हैरान रह गए। SP वीरेंद्र जैन और ASP कमला जोशी के निर्देशन में साइबर सेल ने जांच शुरू की।
जांच में पता चला कि एक ही बैंक के सात अलग-अलग खातों से कुल 9 करोड़ 84 लाख रुपये का हेरफेर किया गया है। इन खाताधारकों में बिसराम इवने, नर्मदा इवने, मुकेश उइके, नितेश उइके, अमोल, चंदन और राजेश बार्डे के नाम शामिल हैं। जब टीम को मालूम हुआ कि राजेश बार्डे की तो कई महीने पहले मृत्यु हो चुकी है, फिर भी उसके खाते से करोड़ों का ट्रांजैक्शन हुआ है, तो पूरा मामला उलझ गया।
गिरोह ने मृतक के खाते से मोबाइल नंबर बदलवाया, नया एटीएम कार्ड जारी कराया और इंटरनेट बैंकिंग का एक्सेस हासिल कर लिया। ओटीपी पर कब्जा जमाकर उन्होंने खाते से रकम इधर-उधर की। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि बैंक में कार्यरत एक अस्थायी कर्मचारी ही इस गैंग का मुख्य सहयोगी था, जिसने ग्राहकों की निजी और बैंकिंग जानकारी बाहर पहुंचाई।
आरोपियों ने बैंक की अंदरूनी जानकारी के आधार पर खातों की पूरी किट तैयार की जिसमें सिम कार्ड, एटीएम, पासबुक और चेकबुक शामिल थी। यह किट बसों के जरिये इंदौर भेजी जाती थी, जहां से गिरोह के सदस्य ऑनलाइन ठगी के जरिए हासिल रकम को इन्हीं खातों में ट्रांसफर करते थे। यानी यह खाते फ्रॉड का ‘क्लियरिंग सेंटर’ बन गए थे।
लोगों को ऑनलाइन निवेश, इनाम या नौकरी के झांसे में फंसाकर आरोपी उनके बैंक अकाउंट से रकम उड़ाते थे और फिर यह पैसा बैतूल के इन खातों में जमा करते थे। इन खातों से रकम तुरंत निकाली जाती थी ताकि ट्रेस करना मुश्किल हो जाए। यह चेन लगातार सक्रिय थी और लाखों रुपये रोज इधर से उधर किए जा रहे थे।
तकनीकी ट्रेल का पीछा करते हुए पुलिस ने इंदौर में दो ठिकानों पर छापा मारा। वहां से 15 मोबाइल फोन, 25 सिम, 21 एटीएम कार्ड, 11 पासबुक, दो लैपटॉप, दो पीओएस मशीनें, 28 हजार रुपये नकद, कई रजिस्टर और डायरी बरामद की गईं। पुलिस ने तीन आरोपियों — राजा उर्फ आयुष चौहान (28, खेड़ी सावलीगढ़), अंकित राजपूत (32, इंदौर) और नरेंद्र सिंह राजपूत (24, इंदौर) को गिरफ्तार किया है।
इस पूरी कार्रवाई में कोतवाली थाना प्रभारी नीरज पाल और साइबर सेल के एसआई अश्विनी चौधरी, नवीन सोनकर, राजेंद्र धाड़से, बलराम राजपूत सहित कई अधिकारियों ने मिलकर काम किया। डिजिटल साक्ष्य जुटाने और बैंकिंग ट्रेल ट्रैक करने में टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
SP वीरेंद्र जैन ने बताया कि टीम ने इस जटिल साइबर ठगी का खुलासा तकनीकी दक्षता और बेहतर तालमेल से किया है। जब्त उपकरणों का फॉरेंसिक विश्लेषण जारी है और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है।
यह मामला दिखाता है कि अपराध की दुनिया अब केवल सड़कों तक सीमित नहीं रही। अब बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डेटा फाइलों के जरिये अपराधी करोड़ों की ठगी कर सकते हैं। मगर बैतूल पुलिस की यह कार्रवाई साबित करती है कि तकनीक का दुरुपयोग चाहे कितना भी संगठित क्यों न हो, सूक्ष्म जांच और पेशेवर टीमवर्क के आगे टिक नहीं सकता।
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