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टीईटी निरस्त कराने की मांग: बैतूल में महिला शिक्षिकाओं ने हेमंत खंडेलवाल को राखी बांधकर सौंपा ज्ञापन

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बैतूल। सेवारत शिक्षकों के लिए अनिवार्य की गई शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी को निरस्त कराने की मांग को लेकर शुक्रवार को महिला शिक्षिकाएं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल के पास पहुंचीं। शिक्षिकाओं ने उन्हें राखी बांधी और परीक्षा से राहत दिलाने की मांग की। इसके बाद शिक्षक संयुक्त मोर्चा बैतूल की ओर से ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में मध्यप्रदेश में भी तमिलनाडु की तर्ज पर विधानसभा में टीईटी निरस्त करने का विधेयक पारित कराने की मांग की गई है।

शिक्षिकाओं का कहना है कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के बीच इस परीक्षा को लेकर डर और तनाव बना हुआ है। उनका तर्क है कि लंबे अनुभव और पूर्व निर्धारित योग्यता के आधार पर नियुक्त शिक्षकों को अब दोबारा पात्रता परीक्षा के दायरे में लाना उचित नहीं है। मोर्चे ने सरकार से शिक्षकों के अनुभव और सेवा अवधि को देखते हुए राहत देने की मांग की है।

क्यों अनिवार्य हुई टीईटी?

दरअसल, मामला सीधे सुप्रीम कोर्ट के आदेश से जुड़ा है। 1 सितंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि आरटीई कानून के दायरे वाले गैर-अल्पसंख्यक स्कूलों में सेवारत शिक्षकों के लिए भी टीईटी न्यूनतम पात्रता है। आरटीई कानून लागू होने से पहले नियुक्त ऐसे शिक्षक, जिनकी सेवानिवृत्ति में पांच साल से ज्यादा समय बचा है, उन्हें टीईटी पास करना होगा।

बाद में 29 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने समीक्षा याचिकाओं पर फैसला देते हुए टीईटी पास करने की समय-सीमा 31 अगस्त 2027 से बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 कर दी। केंद्र सरकार ने भी संसद में बताया है कि पांच साल से कम सेवा शेष वाले पात्र शिक्षकों को सेवानिवृत्ति तक टीईटी के बिना सेवा में बने रहने की छूट है, लेकिन उन्हें पदोन्नति के लिए टीईटी पास करना होगा।

MP में परीक्षा की तैयारी शुरू, 12 अक्टूबर से परीक्षा

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल ने सेवारत शिक्षकों के लिए एमपी टीईटी 2026 की प्रक्रिया शुरू कर दी है। आवेदन 21 अगस्त से शुरू हुए हैं और 4 सितंबर तक आवेदन किए जा सकते हैं। परीक्षा 12 अक्टूबर 2026 से शुरू होगी। यह परीक्षा प्राथमिक और माध्यमिक कक्षाओं में पढ़ाने वाले उन सेवारत शिक्षकों के लिए है, जिन्होंने पहले निर्धारित पात्रता परीक्षा पास नहीं की है।

सरकार का क्या रुख है?

मध्यप्रदेश सरकार ने फिलहाल परीक्षा पूरी तरह निरस्त करने का फैसला नहीं किया है। स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह पहले कह चुके हैं कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लेकर कुछ गलतफहमियां हैं और सरकार स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने यह भी कहा था कि लंबे समय से सेवा दे रहे और पुराने नियमों के तहत नियुक्त शिक्षकों के अनुभव को देखते हुए सरकार सुप्रीम कोर्ट के समक्ष राहत का अनुरोध करने पर विचार कर रही है। शिक्षा विभाग की ओर से पात्रता और छूट की स्थिति स्पष्ट करने के लिए नए आदेश की बात भी कही गई थी।

तमिलनाडु का उदाहरण क्यों दे रहे शिक्षक?

शिक्षकों के ज्ञापन में तमिलनाडु का उदाहरण दिया गया है। वहां 25 अगस्त को विधानसभा ने 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से स्थायी छूट देने की मांग वाला प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया है। प्रस्ताव में केंद्र सरकार से आरटीई कानून में बदलाव की मांग की गई है।

यही वजह है कि बैतूल के शिक्षक संयुक्त मोर्चा की मांग है कि मध्यप्रदेश सरकार भी विधानसभा में ऐसा ही विधेयक/प्रस्ताव लाकर पुराने और सेवारत शिक्षकों को टीईटी से राहत दिलाए।

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