
बठिंडा : जिले में एक महिला मजदूर की दर्दनाक मौत हो गई है। गांव बहमण दीवाना में पंचायत द्वारा करवाए जा रहे छप्पड़ की मुरम्मत के काम में भारी लापरवाही सामने आई है। मनरेगा के तहत काम कर रही महिला मजदूर मंदीप कौर की लकड़ी की कमजोर सीढ़ी से गिरकर मौत हुई है। हादसा उस वक्त हुआ जब मंदीप करीब 35 फुट गहरे खड्डे में काम कर रही थी और असंतुलित सीढ़ी से फिसलकर सिर के बल नीचे गिर पड़ी। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने महिला को मृत घोषित कर दिया।
मंदीप कौर पिछले 7 सालों से मनरेगा के तहत काम कर रही थीं और इसी गांव की निवासी थीं। महिला की उम्र करीब 45 साल थी और वह 2 छोटे बच्चों की मां थीं। हादसे के बाद पूरे गांव में शोक की लहर है, वहीं लोगों में रोष भी देखने को मिला। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि इस खतरनाक काम के लिए किसी भी तरह के सुरक्षा उपाय नहीं किए गए थे। मौके पर काम कर रहे लोगों के अनुसार, छप्पड़ में उतरने के लिए केवल एक खस्ता हाल लकड़ी की सीढ़ी का सहारा लिया गया था। गांव के निवासी गुरसेवक सिंह ने बताया कि यह काम बेहद जोखिम भरा था और इसमें महिलाओं को लगाना न केवल अमानवीय है बल्कि गैरकानूनी भी होना चाहिए।
मृतक महिला के पति सुखपाल सिंह ने बताया कि मंदीप परिवार की रीढ़ थीं और बच्चों की देखरेख की जिम्मेदारी भी उसी की थी। परिवार ने प्रशासन से मांग की है कि उन्हें न्याय दिलाया जाए, ठेकेदार पर कड़ी कार्रवाई की जाए और परिवार को आर्थिक सहायता दी जाए। परिवार वालों ने सोमवार को एडीसी से मुलाकात कर घटना की जांच करवाने और दोषियों को सजा दिलाने की मांग की। गांव वालों ने चेतावनी दी है कि यदि न्याय नहीं मिला तो वे बड़े स्तर पर धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। अब सवाल यह उठता है कि क्या मनरेगा के तहत हो रहे कामों में मजदूरों की सुरक्षा को लेकर कोई जवाबदेही तय की जाएगी, या फिर इसी तरह गरीब मजदूरों की जान जाती रहेगी?

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