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गले से छाती तक फैल गया था थायरॉयड, सिर्फ 30 परसेंट हार्ट कर रहा था पंप, डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर बचाई जान

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मध्य प्रदेश के रीवा के एक अस्पताल में डॉक्टरों ने गले और छाती तक फैली करीब एक किलो वजनी थायरॉयड ग्रंथि का सफल ऑपरेशन किया है. बिछिया निवासी 16 वर्षीय साहिल खान का लंबे समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहा था. जन्मजात थायरॉयड की समस्या धीरे-धीरे इतनी विकराल हो गई कि उसके थायरॉयड ग्रंथि का वजन लगभग 1 किलो तक पहुंच गया. इस बीमारी ने न केवल उसके शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित किया, बल्कि मानसिक रूप से भी वह बेहद परेशान रहने लगा.

साहिल का परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने उसके इलाज के लिए हरसंभव प्रयास किए. बड़े-बड़े अस्पतालों के चक्कर काटे गए, डॉक्टरों से राय ली गई, लेकिन कहीं भी ठोस समाधान नहीं मिल सका. परिवार के पास आयुष्मान कार्ड जरूर था, फिर भी इलाज की प्रक्रिया इतनी जटिल और लंबी थी कि परिवार बार-बार निराश होकर लौट आता. हालात इतने बिगड़ गए कि साहिल और उसके परिजन लगभग उम्मीद खोने लगे थे.

सर्जरी ही था उपाय

इसी कठिन समय में परिवार ने रीवा स्थित मिनर्वा द मेडिसिटी हॉस्पिटल का रुख किया. यहां डॉक्टरों की टीम ने साहिल की गंभीर स्थिति की जांच की. जांच के बाद यह स्पष्ट हुआ कि साहिल की जान बचाने के लिए सर्जरी ही एकमात्र उपाय है. हालांकि, यह निर्णय आसान नहीं था, क्योंकि सर्जरी बेहद जोखिम भरी थी.

ऑपरेशन का सबसे बड़ा चुनौतीपूर्ण पहलू यह था कि साहिल का दिल कमजोर हो चुका था. उसकी हार्ट पंपिंग मात्र 30% रह गई थी, जबकि सामान्य व्यक्ति में यह लगभग 60% से अधिक होती है. ऐसे में लंबी सर्जरी के दौरान किसी भी छोटी गलती से उसकी जान को खतरा हो सकता था. फिर भी, रीवा के प्लास्टिक सर्जन डॉ. सिद्धार्थ सिंह और मिनर्वा हॉस्पिटल के एनेस्थीसिया विभाग के प्रमुख डॉ. अभिषेक मिंज ने अपनी विशेषज्ञ टीम के साथ इस जोखिम भरे ऑपरेशन को करने का निर्णय लिया.

11 घंटे चली सर्जरी

करीब 11 घंटे चली इस कठिन और जटिल सर्जरी में डॉक्टरों ने अद्भुत साहस का परिचय दिया. हर पल चुनौती से भरे इस ऑपरेशन के अंत में सफलता मिली और साहिल का जीवन बचा लिया गया. यह सिर्फ एक सर्जरी नहीं, बल्कि साहिल और उसके परिवार के लिए जीवन में नई उम्मीद की किरण थी.

ऑपरेशन के बाद साहिल धीरे-धीरे स्वस्थ हो रहा है और सामान्य जीवन की ओर लौट रहा है. परिवार और डॉक्टरों के प्रयास रंग लाए हैं. खास बात यह है कि पूरा इलाज आयुष्मान कार्ड के माध्यम से संभव हो सका. साहिल का परिवार अब बेहद खुश है और मानता है कि डॉक्टरों की मेहनत और सरकारी योजना की मदद से ही उनका बेटा फिर से सामान्य युवाओं की तरह जीवन जी पाएगा.

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