Logo
ब्रेकिंग
फोन नहीं उठाते सीईओ,मीडियाकर्मियों में नाराजगी,ज्ञापन सौंपा Ola Uber Ban Chandigarh: ओला-उबर के लाइसेंस रद्द होने के बाद शुरू हुई 'भारत टैक्सी', जानिए यात्रियों... Haryana News: लगातार चौथी बार देश में अव्वल रही करनाल शुगर मिल, केंद्रीय मंत्रियों ने दी प्रतिष्ठित ... NCC DG Team Selection: हरियाणा के होनहार शूटर विजयन्त ढाण्डा ने बढ़ाया राज्य का मान, देश के टॉप-12 शू... Haryana Road Mishap: नूंह सड़क हादसे में चार लोगों की मौत, पत्नी गंभीर रूप से घायल; पुलिस जांच में ज... Haryana Crime News: पानीपत में اغवा हुआ बच्चा बरामद, एक लाख में बेचने की थी डील; पुलिस ने दो को दबोच... Gurnam Singh Chaduni Mahapanchayat: धान खरीद की मांग पर अड़े किसान, हाईवे पर बीती रात; आज होगी बड़ी ... Patna Mithila Colony Incident: दानापुर में खूनी संघर्ष, शादी से पहले सिपाही भाई ने की आत्महत्या, पुल... Delhi Demolition News: शालीमार बाग मैक्स अस्पताल रोड पर देर रात चला पीला पंजा; भारी पुलिस बल तैनात, ... Monsoon Update 2026: मॉनसून की विदाई के बीच बिगड़ेगा मौसम; मध्य प्रदेश, ओडिशा और पूर्वोत्तर में भारी...
Header Ad

कफ सिरप त्रासदी के बाद केंद्र का सख्त फैसला: फिनिश्ड दवाओं में DEG-EG टेस्ट अनिवार्य, सेहत से कोई समझौता नहीं

0

जहरीले कफ सिरप के मामले ने देशभर में स्वास्थ्य सुरक्षा पर चेतावनी की घंटी बजा दी. अब इस गंभीर संकट को देखते हुए बड़ा और निर्णायक कदम उठाया गया है. फिनिश्ड प्रोडक्ट्स में DEG (Diethylene Glycol) और EG (Ethylene Glycol) की जांच अनिवार्य कर दी गई है. इस संबंध में मध्य प्रदेश के ड्रग कंट्रोलर ने केंद्र सरकार को सिफारिश दी थी. इस फैसले से सुरक्षित और भरोसेमंद दवाएं मिलने का भरोसा भी मजबूत होगा.

DEG (Diethylene Glycol) और EG (Ethylene Glycol) की जांच का मतलब है दवाओं और सिरप में यह देखना कि ये जहरीले रसायन मौजूद तो नहीं हैं. इसलिए अब सरकार ने फैसला लिया कि हर फिनिश्ड प्रोडक्ट (तैयार दवा) और कच्चा माल में इसकी जांच जरूरी हो. यह जांच सेफ्टी चेक है.

बता दें कि 9 अक्टूबर को आजतक ने प्रमुखता से खबर दिखाई थी कि फिनिश्ड प्रोडक्ट्स में DEG (Diethylene Glycol) की जांच करने की वर्तमान में कोई अनिवार्यता नहीं है. एमपी के ड्रग कंट्रोलर दिनेश श्रीवास्तव ने कहा कि उन्होंने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर इंडियन फार्माकोपिया के जनरल मोनोग्राफ में DEG और EG (Ethylene Glycol) की जांच को शामिल करने का सुझाव दिया था. उन्होंने यह भी कहा कि यह कदम न केवल सुरक्षित दवा निर्माण सुनिश्चित करेगा, बल्कि भविष्य में ऐसे जहरीले मामलों को रोकने में मदद करेगा.

दिनेश श्रीवास्तव के सुझाव पर संज्ञान लेते हुए भारत सरकार ने निर्णय लिया कि DEG और EG को रॉ मटेरियल और फिनिश्ड प्रोडक्ट्स दोनों में जांचने की अनिवार्यता बनाई जाए. यह कदम दवा निर्माण और स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है.

इस कदम से न केवल कफ सिरप जैसी दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित होगी, बल्कि आम जनता को सुरक्षित और भरोसेमंद दवाएं मिलेंगी. विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की निगरानी और जांच से भविष्य में जहरीली दवाओं से होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

Leave A Reply

Your email address will not be published.