
आने वाली पीढी को सच्चे इतिहास से परिचित कराना आवश्यक – खंडेलवाल, विभाजन विभिषिका स्मृति दिवस पर परिजनो ने साझा किए अनुभव
बैतूल। 14 अगस्त 2021 से भारत सरकार द्वारा विभाजन की विभिषिका और बलिदानो की गौरव गाथा को समझने के लिए विभाजन विभिषिका दिवस मनाने का निर्णय लिया गया। इसी कडी में भारतीय जनता पार्टी कार्यालय विजय भवन में विभाजन की विभिषिका पर बटवारे का दंश झेलने वाले परिवारों ने भी अपने स्मरण साझा किए। इस दौरान भाजपा प्रदेशअध्यक्ष एवं विधायक हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि आने वाली पीढियों को इतिहास की सच्चाई से परिचित कराना आवश्यक है। जिन परिवारों ने 1947 में अपना सर्वस्व खोने के बावजूद कठिन परिस्थितियों में नए सिरे से जीवन खडा किया उनका संघर्ष और धैर्य प्रेरणादायी है। श्री खंडेलवाल ने कहा कि जवाहरलाल नेहरू और मोहम्मद अली जिन्ना के सत्ता लोलूप्ता के चलते लाखो लोगो को अपने घर और मातृभूमि से विस्थापित होना पडा। यह विस्थापना पिछली शताब्दी की मानव निर्मित सबसे बडी त्रासदी में से एक है। श्री खंडेलवाल ने कहा कि आज के दिन अतीत के दर्द को याद करते हुए उनसे सीख लेकर राष्ट्रीय एकता और अखण्डता को मजबूत करने का संकल्प लेने का भी दिन है। कार्यक्रम के दौरान अपने परिजनो के अनुभव साझा करते हुए विस्थापित परिवार के सदस्य घनश्याम मदान ने बताया कि मेरे दादा दादी और पिता विभाजन की यादें जब बताते थे तो दर्द से आखें भींग जाया करती थी। 14 अगस्त 1947 के दिन कटटर पंथियों ने हिन्दूओ को निशाना बनाया जिससे लाखों लोग अपना व्यवसाय और जमीन जायजाद छोंडकर पलायन करने को मजबूर हो गए। श्री मदान ने बताया कि दो देशो के बटवारें में बहन बेटियों को उस समय कहा जाता था कि प्राण त्याग देना लेकिन अपना तन किसी को मत सौपना। आप समझ सकते है कि उस दौर में हिन्दूओं को चुन चुन कर मारा गया। जो लौटे वे या तो घायल थे या लाशों के रूप में वापस आए। ऐसे शहीदियों को हम आज नमन करते है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विस्थापित परिवार के सदस्य मंजीत सिंह साहनी ने अपना स्मरण सुनाते हुए कहा कि हम रावलपिंडी के नजदींक हिन्दू,मुस्लिम,सिख्ख सब मेल मिलाप से रहते थे लेकिन 10 मार्च 1947 को 266 गांवो में कटटरपंथियों ने हिन्दूओं के कत्लेआम शुरू कर दिए जिससे तकरीबन 24 लाख लोग प्रभावित हुए इस विभिषिका से सीख लेते हुए हमें प्रेम और भाईचारे की मिशाल पेश करनी है। बैठक को संबोधित करते हुए भाजपा जिलाध्यक्ष सुधाकर पंवार ने कहा कि आज का दिन शोक व सम्मान का दिन है। विभाजन को याद कर शोक होता है लेकिन इनके परिजनों का संघर्ष हमें उनके प्रति सम्मान का अवसर देता है। देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने इस इतिहास की विभिषिका को देश के नवजवान समझे और इससे सीख ले इसीलिए विभाजन विभिषिका स्मरण दिवस मनाने का निर्णय लिया। कार्यक्रम के दौरान विस्थापित परिवार के परिजनो का शाल श्रीफल से भेंट कर सम्मान कर विभाजन पर बनी लघुफिल्म का प्रदर्शन के साथ साथ फोटो प्रदर्शनी लगाकर अंत में मौन जूलुस निकालकर दिवंगत आत्माओं को श्रृद्वाजलि अर्पित की गई। इस दौरान मंच पर नानकराम आहूजा, नरेन्द्र हिराणी, गोवर्धन भावनानी, ब्रज कपूर, सरबजीत सिंह अहलूवालिया मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन जिला महामंत्री कृष्णा गायकी ने किया अंत में आभार जिला कोषाध्यक्ष दीपक सलूजा ने व्यक्त किया।
