
सात साल में भी नहीं बन सकी बैतूल–आमला मार्ग की 200 मीटर सड़क, बरसाली के पास जानलेवा गड्ढों से रोज गुजर रही बच्चों से भरी बस — लोगों ने कहा, यह आपराधिक लापरवाही
दिलीप पाल की रिपोर्ट
बैतूल। जिले की महत्वपूर्ण बैतूल–आमला टू लेन सड़क का बरसाली के पास लगभग **200 मीटर का हिस्सा सात वर्षों से अधूरा पड़ा है**, जिससे क्षेत्र के लोगों में भारी आक्रोश है। केंद्रीय सड़क निधि (CRF) से लगभग **130 करोड़ रुपये की लागत** से बनी इस सड़क का निर्माण वर्ष **2019 में पूरा होना था**, लेकिन बरसाली के पास अधूरे छोड़े गए हिस्से ने अब जानलेवा रूप ले लिया है।
बरसाली के पास पुलिया के समीप सड़क पर **गहरे गड्ढे और खतरनाक ढलान** बने हुए हैं। रोज़ाना बच्चों से भरी स्कूल बसें, यात्री ऑटो और निजी वाहन इस मार्ग से गुजरते हैं। मोटरसाइकिल चालक अक्सर गिरकर घायल हो रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह स्थिति **प्रशासन और पीडब्ल्यूडी विभाग की आपराधिक लापरवाही** का परिणाम है।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष **हेमंत खंडेलवाल के विधानसभा क्षेत्र** में आने के बावजूद इस मार्ग की उपेक्षा लोगों को परेशान कर रही है।
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### निर्माण कार्य वर्षों से विवादों में उलझा
इस मार्ग का 500 मीटर हिस्सा लंबे समय से विवादों में फंसा रहा। **भूमि अधिग्रहण को लेकर ग्रामीणों और पीडब्ल्यूडी के बीच विवाद** के कारण निर्माण बार-बार रुकता रहा।
तीन महीने पहले तत्कालीन एसडीएम (वर्तमान जॉइंट कलेक्टर) **मकसूद अहमद** और एसडीओपी **सुनील लाटा** ने मौके पर पहुंचकर विवाद सुलझाया था, जिसके बाद करीब **50 मीटर हिस्से का निर्माण** किया गया। लेकिन **शेष 150 मीटर सड़क अब भी अधूरी है।**
बरसाली निवासी वकील **राजेंद्र उपाध्याय** ने इसे “**आपराधिक लापरवाही**” बताते हुए कहा कि रोज़ाना हजारों लोगों की जान इस मार्ग पर खतरे में है। उन्होंने मांग की है कि संबंधित ठेकेदार और पीडब्ल्यूडी अधिकारी तत्काल कार्रवाई करें।
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### स्थानीयों का आरोप — निजी जमीन पर जबरन सड़क बनाने की कोशिश
बरसाली निवासी **हवलदार चंद्रप्रकाश यादव**, जो वर्तमान में जम्मू-कश्मीर में पदस्थ हैं, ने आरोप लगाया था कि विभाग अधिग्रहित भूमि छोड़कर उनकी निजी जमीन (खसरा क्रमांक 80/3, 80/13, 81/1) पर निर्माण करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा था कि यह **बिना अधिग्रहण और मुआवजे** के किया जा रहा है।
उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि निर्माण जबरन किया गया तो वे **जबलपुर हाईकोर्ट से स्टे ऑर्डर** लेकर आएंगे और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ **अवमानना याचिका** दायर करेंगे।
हवलदार यादव ने यह भी आरोप लगाया था कि राजनीतिक दबाव में सड़क का एलाइनमेंट बदला गया है। उनका कहना है कि “कुछ प्रभावशाली लोग अपनी जमीन बचाने के लिए रास्ता बदलवाना चाहते हैं और विभाग उनकी मदद कर रहा है।”
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ग्रामीणों ने किया विरोध, प्रशासन ने दखल दिया
लगातार देरी और खराब सड़क के विरोध में ग्रामीणों ने **25 जुलाई से सड़क बंद करने** की चेतावनी दी थी। इस ऐलान के बाद कलेक्टर **नरेंद्र सूर्यवंशी** ने एसडीएम, पीडब्ल्यूडी और अन्य अधिकारियों को मौके पर भेजा, जिसके बाद निर्माण कार्य शुरू कराया गया था। हालांकि कुछ दिनों बाद फिर काम ठप हो गया।
पीडब्ल्यूडी का पक्ष
पीडब्ल्यूडी की EE**प्रीति पटेल** ने बताया कि “**लगातार बारिश और पुलिया निर्माण के कारण फिलहाल काम रोका गया है**, जल्द ही सड़क निर्माण फिर शुरू किया जाएगा।”
स्थानीय लोगों की नाराजगी
बरसाली और आसपास के ग्रामीणों — मनीष यादव, पुरुषोत्तम यादव, मनोज प्रजापति, वकील किरण जयसवाल, शबाना खान, मोहम्मद शफी खान, विजया जैन, सचिन जैन, यशपाल ठाकुर, पर्यावरण प्रेमी सदाराम झरबड़े सहित कई लोगों ने सड़क का काम शीघ्र पूरा करने की मांग की है। उनका कहना है कि विभाग की ढिलाई से वाहन धंस रहे हैं, बसें पलटने का खतरा बना हुआ है और जनता का सब्र अब टूट रहा है।
निष्कर्ष
केंद्रीय सड़क निधि से बनी इस सड़क का अधूरा रह जाना और वर्षों से विवादों में फंसा रहना प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जनता का कहना है कि जब 130 करोड़ रुपये की लागत से बनी सड़क का 200 मीटर हिस्सा सात साल में पूरा नहीं हो सका, तो यह केवल देरी नहीं — जन सुरक्षा से खिलवाड़ है।
