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MP High Court Relief: सागर जहरीली शराब कांड के आरोपी को हाईकोर्ट से बड़ी राहत; बुलडोजर कार्रवाई पर रोक

जबलपुर। मध्य प्रदेश के सागर जिले में हुए बहुचर्चित जहरीली शराब कांड के बाद पुलिस प्रशासन द्वारा आरोपियों के मकानों पर बुलडोजर चलाने और परिजनों को अनावश्यक रूप से परेशान करने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता को बड़ी अंतरिम राहत प्रदान की है। कोर्ट ने प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं कि नियम विरुद्ध तरीके से संपत्ति को नुकसान न पहुंचाया जाए।

🏚️ “36 में से सिर्फ 1 FIR में नाम, फिर भी मकान पर चला बुलडोजर”: हाईकोर्ट में शराब ठेकेदार की दलील

मामले के मुख्य आरोपी बनाए गए शराब ठेकेदार सिद्धार्थ कुशवाहा और उनकी मां की ओर से दायर इस याचिका में पुलिस व प्रशासन की एकतरफा कार्रवाई को चुनौती दी गई थी।

याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट में बताया गया कि सागर पुलिस द्वारा दर्ज कुल 36 प्राथमिकी (FIR) में से केवल 1 एफआईआर में सिद्धार्थ कुशवाहा को आरोपी बनाया गया है। उन पर आरोप है कि उनकी लाइसेंस वाली दुकान से खरीदी गई शराब पीने से एक व्यक्ति की मृत्यु हुई थी। याचिका में कहा गया कि घटना के बाद प्रशासन ने उनकी शराब दुकान का लाइसेंस और पत्थर क्रशर की लीज को तुरंत निरस्त कर दिया। इसके बावजूद बुलडोजर एक्शन के तहत उनके घर की बाउंड्री वॉल और संपत्ति के अन्य हिस्सों को भी अवैध तरीके से ध्वस्त कर दिया गया।

📜 सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के उल्लंघन का आरोप: वरिष्ठ अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने रखा पक्ष

याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने एकलपीठ को अवगत कराया कि प्रशासनिक अमले द्वारा की जा रही बुलडोजर कार्रवाई में सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले ‘डायरेक्शन ऑफ मैटर इन डिमोलिशन ऑफ स्ट्रक्चर्स’ (Demolition Directions) में जारी गाइडलाइंस का सरासर उल्लंघन किया गया है।

इसके अतिरिक्त, पुलिस द्वारा बिना किसी विधिक प्रक्रिया के पूछताछ के नाम पर परिवार के बेकसूर सदस्यों को कभी भी थाने बुलाने या ले जाने का कार्य किया जा रहा है, जो कि पूरी तरह से असंवैधानिक और अवैध है।

🚫 “नियम विरुद्ध न तोड़ी जाए प्रॉपर्टी, परिजनों को न किया जाए परेशान”: जस्टिस विशाल मिश्रा का सख्त आदेश

याचिका पर गुरुवार और शुक्रवार को लगातार हुई दो दिवसीय सुनवाई के बाद जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने याचिकाकर्ताओं के पक्ष में महत्वपूर्ण आदेश जारी किया।

अदालत ने अंतरिम राहत देते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि नियम विरुद्ध तरीके से याचिकाकर्ता की किसी भी संपत्ति या प्रॉपर्टी को क्षतिग्रस्त न किया जाए। साथ ही कोर्ट ने पुलिस को भी निर्देश दिए हैं कि जांच के नाम पर परिवार के निर्दोष सदस्यों को बेवजह और अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाए।

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