Logo
ब्रेकिंग
फोन नहीं उठाते सीईओ,मीडियाकर्मियों में नाराजगी,ज्ञापन सौंपा Ola Uber Ban Chandigarh: ओला-उबर के लाइसेंस रद्द होने के बाद शुरू हुई 'भारत टैक्सी', जानिए यात्रियों... Haryana News: लगातार चौथी बार देश में अव्वल रही करनाल शुगर मिल, केंद्रीय मंत्रियों ने दी प्रतिष्ठित ... NCC DG Team Selection: हरियाणा के होनहार शूटर विजयन्त ढाण्डा ने बढ़ाया राज्य का मान, देश के टॉप-12 शू... Haryana Road Mishap: नूंह सड़क हादसे में चार लोगों की मौत, पत्नी गंभीर रूप से घायल; पुलिस जांच में ज... Haryana Crime News: पानीपत में اغवा हुआ बच्चा बरामद, एक लाख में बेचने की थी डील; पुलिस ने दो को दबोच... Gurnam Singh Chaduni Mahapanchayat: धान खरीद की मांग पर अड़े किसान, हाईवे पर बीती रात; आज होगी बड़ी ... Patna Mithila Colony Incident: दानापुर में खूनी संघर्ष, शादी से पहले सिपाही भाई ने की आत्महत्या, पुल... Delhi Demolition News: शालीमार बाग मैक्स अस्पताल रोड पर देर रात चला पीला पंजा; भारी पुलिस बल तैनात, ... Monsoon Update 2026: मॉनसून की विदाई के बीच बिगड़ेगा मौसम; मध्य प्रदेश, ओडिशा और पूर्वोत्तर में भारी...
Header Ad

आमला कोर्ट का फैसला:30 लाख की धोखाधड़ी में कम्पनी डायरेक्टर बरी

0

दिलीप पाल की रिपोर्ट

बैतूल के आमला में आर.बी.एन. इंफ्रास्ट्रक्चर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के डायरेक्टर रामनिवास को 30 लाख रुपए गबन के आरोप से।एडीजे कोर्ट आमला ने दोषमुक्त कर दिया है। अभियोजन पक्ष यह प्रमाणित करने में असफल रहा कि आरोपी ने अपराध किया है।
यह मामला करीब 10 वर्ष पुराना है। 25 सितंबर 2010 से 30 अक्टूबर 2015 के बीच कंपनी ने छोटे-छोटे व्यापारियों और निवेशकों से धनराशि जमा कराई थी। बाद में कंपनी ने अचानक ऑफिस बंद कर दिया और फरार हो गई।
इस मामले में श्याम कुमार पाटोदिया ने 25 जुलाई 2017 को थाना आमला में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि कंपनी के डायरेक्टर रामनिवास सहित अन्य निदेशकों ने लगभग 30 लाख रुपए की धनराशि का गबन किया और निवेशकों के साथ धोखाधड़ी की।
कंपनी खुद को लाइफ इंश्योरेंस कंपनी की कॉर्पोरेट एजेंट बताती थी और पॉलिसी बांड बेचने तथा रियल एस्टेट में निवेश कराने का काम करती थी। पाटोदिया स्वयं भी कंपनी में निवेशक थे।
मामला मध्यप्रदेश निक्षेपकों के हितों का संरक्षण अधिनियम 2000 के तहत भी दर्ज किया गया था। विवेचना अधिकारी विजय राव माहोरे ने जांच के दौरान सेबी और कॉर्पोरेट मंत्रालय से कंपनी की जानकारी मांगी थी।
विवेचना में कुल 66 गवाह और 85 दस्तावेज पेश किए गए।
सेबी की महाप्रबंधक निर्मल कुमार मेहरोत्रा और डिप्टी रजिस्टार अंजनी सुजानिया ने अदालत में गवाही दी कि रामनिवास कंपनी का डायरेक्टर था।
हालांकि, गवाहों ने यह भी कहा कि घटना के समय वह कंपनी के सीएमडी थे या नहीं, यह अब बताना संभव नहीं है।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता राजेंद्र उपाध्याय ने दलील दी कि विवेचना के दौरान यह प्रमाणित नहीं हुआ कि आरोपी अपराध के समय डायरेक्टर थे।
उन्होंने यह भी कहा कि विवेचक ने एसपी बैतूल से आवश्यक अनुमति लिए बिना ‘मध्यप्रदेश निक्षेपकों के संरक्षण अधिनियम’ के तहत अग्रिम विवेचना की, जिससे प्रक्रिया दोषपूर्ण हो गई।
लंबी सुनवाई के बाद न्यायालय ने माना कि अभियोजन पक्ष अपराध को संदेह से परे प्रमाणित करने में असफल रहा, इसलिए आरोपी को बरी किया जाता है।
हालांकि, रामनिवास की जेल से रिहाई नहीं हो सकी, क्योंकि उनके विरुद्ध अन्य जिलों में भी प्रकरण लंबित है।

Leave A Reply

Your email address will not be published.