
बैतूल। लगातार डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे जिला अस्पताल को एक और बड़ा झटका लगा है। जिले के वरिष्ठ और समर्पित चिकित्सक डॉ. आनंद मालवीय ने सरकारी सेवा से त्यागपत्र दे दिया है। वे जिला क्षय रोग अधिकारी के रूप में पदस्थ थे। डॉ. मालवीय ने बताया कि उन्होंने व्यक्तिगत कारणों और समय प्रबंधन की कठिनाइयों के चलते यह निर्णय लिया है।
डॉ. आनंद मालवीय ने जून 2011 में जिला अस्पताल बैतूल में ज्वाइन किया था। इससे पहले वे भोपाल के प्यूपिल्स हॉस्पिटल में दो वर्ष तक मेडिसिन विभाग में कार्यरत रहे। उनका एमबीबीएस इंदौर मेडिकल कॉलेज से (1998 बैच) में हुआ था, जिसे उन्होंने 2004 में पूरा किया। इसके बाद उन्होंने उज्जैन मेडिकल कॉलेज में एक वर्ष सेवा की और फिर हैदराबाद के फैजान इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में तीन वर्ष तक DNB मेडिसिन की ट्रेनिंग प्राप्त की।
डॉ. मालवीय अपने सौम्य स्वभाव, व्यावहारिक दृष्टिकोण और कार्य के प्रति समर्पण के लिए जाने जाते रहे हैं। उनके नेतृत्व में टीबी नियंत्रण कार्यक्रम में ज़िले ने उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल कीं। वर्ष 2019 के लिए उन्हें 2020 में ‘ब्रॉन्ज अवॉर्ड’ और 2023 में ‘सिल्वर नेशनल अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया था। उन्होंने एचआईवी प्रोग्राम में भी नोडल अधिकारी के रूप में भूमिका निभाई।
मालवीय ने बताया कि अब वे निजी क्षेत्र में काम करने की योजना बना रहे हैं और अपने हॉस्पिटल की शुरुआत की तैयारी चल रही है।
अस्पताल में स्टाफ की गंभीर कमी
जिला अस्पताल में वर्तमान में मेडिकल ऑफिसर के 18 स्वीकृत पदों में से अब केवल 15 डॉक्टर ही कार्यरत रह जाएंगे।बॉन्ड पर पदस्थ अधिकांश डॉक्टर लीव विदआउट पे लेकर जा चुके हैं।
स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की स्थिति और भी चिंताजनक है — 31 स्वीकृत पदों में से केवल 11 डॉक्टर ही कार्यरत हैं जबकि 20 पद खाली हैं।
हाल ही में डॉ. राहुल शर्मा (नेत्र रोग विशेषज्ञ), डॉ. प्रतिभा रघुवंशी (स्त्री रोग विशेषज्ञ) और डॉ. आयुष श्रीवास्तव भी सेवा छोड़ चुके हैं।
लगातार इस्तीफों के कारण जिला अस्पताल में मरीजों को इलाज के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग के सामने अब डॉक्टरों की कमी सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।
