Logo
ब्रेकिंग
शनिवार बैतूल आयेंगे सीएम मोहन यादव,सुरभि खण्डेलवाल को अर्पित करेंगे श्रद्धा सुमन India Heatwave Alert: कई राज्यों में 40°C पार, IMD की बड़ी चेतावनी चार साल की जैनब ने रखा रोजा। आत्मसंयम,सब्र,अनुशासन का दिया संदेश धुरंधर का दूसरा वर्जन इसी महीने होगा रिलीज, रणवीर नजर आएंगे अंडर कव्हर एजेंट सांझवीर टाईम्स के प्रतिष्ठा अलंकरण समारोह में जिले की 22 विभूतियां सम्मानित आर डी कोचिंग के विद्यार्थियों ने जे ई ई मैंस में हासिल की उत्कृष्ट सफलता, 99.68 परसेंटाइल हासिल कर स... Live: एमपी विधानसभा में बजट पेश कर रहे वित्त मंत्री देवड़ा, जानिए किसको क्या मिला नई दिल्ली से ताम्रम जा रही GT एक्सप्रेस के पार्सल वैन में लगी आग, बड़ा हादसा टला 13 फरवरी को सारणी में लगेगा रोजगार मेला, 9 कंपनियां करेंगी भर्ती, 775 से अधिक पदों पर मौका नागपुर एम्स में चार साल के हर्ष की मौत, कोल्ड्रिफ कफ सिरप कांड का था पीड़ित, चार माह से ICU में चल र...
Header Ad

एक दादी की जिद ने बदल दिया फैसला

0

राष्ट्रीय राजमार्ग पंखा पर 17 एकड़ भूमि विवाद में न्यायालय में आया भावनात्मक मोड़ — दादी बोलीं, “मैं अपनी पोती को बंजर नहीं, उपजाऊ जमीन दूंगी”

 

आमला:- कभी-कभी रिश्तों की गर्माहट वो कर दिखाती है, जो कानून भी नहीं कर पाता। राष्ट्रीय राजमार्ग पंखा के पास करीब 17 एकड़ जमीन के विवाद में शुक्रवार को आमला न्यायालय में ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जब एक बुजुर्ग दादी की भावनात्मक जिद ने दो साल पुराने पारिवारिक विवाद को खत्म कर दिया।

 

मामले की सुनवाई के दौरान जब बहू और सास आमने-सामने बैठीं, तो अचानक दादी ने दृढ़ स्वर में कहा —

 

> “मैं अपनी पोती को अनुपजाऊ जमीन नहीं दूंगी, उसे वही दूंगी जहां धरती सोना उगले।”

 

उनकी इस एक बात ने माहौल को बदल दिया। न्यायालय में मौजूद लोग भावुक हो उठे, और वर्षों से चला आ रहा विवाद सुलह की राह पर चल पड़ा।

 

दरअसल, वर्ष 2022 में बैतूल के एक चिकित्सक की सड़क दुर्घटना में मृत्यु के बाद परिवार में संपत्ति और जमीन को लेकर मतभेद शुरू हो गए थे। बहू ने सास, जेठ और ननद के खिलाफ सिविल वाद दायर कर अपने और पुत्री के हिस्से की जमीन मांगी थी, जबकि सास पक्ष का कहना था कि दुर्घटना के लिए बहू जिम्मेदार है, इसलिए उसे कोई हिस्सा नहीं दिया जाएगा।

 

करीब दो साल तक चले इस मुकदमे को कनिष्ठ खंड व्यवहार न्यायाधीश आमला ने मध्यस्थता के लिए अपर जिला न्यायाधीश आमला के न्यायालय को भेजा। वहां दोनों पक्षों के वकील — **संजय शुक्ला** (बहू पक्ष) और **राजेंद्र उपाध्याय** (सास पक्ष) — ने कई दौर की बैठकों में समझौते की कोशिश की।

 

पहले परिवार के सदस्य अनुपजाऊ जमीन देने को तैयार हुए, जो राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे थी। बहू भी इसे मानने को तैयार हो गई। लेकिन जैसे ही दादी को यह बात पता चली, उन्होंने बेटे से कहा —

 

> “मैं अपनी पोती को बंजर जमीन नहीं दूंगी। उसे उपजाऊ काली मिट्टी की जमीन ही दूंगी।”

 

16 अक्टूबर को सास स्वयं न्यायालय में उपस्थित हुईं और न्यायाधीश से बोलीं —

 

> “मैं अपनी बहू को पौने दो एकड़ नहीं, उससे भी ज्यादा दूंगी, वो भी रोड की ओर की सबसे उपजाऊ जमीन।”

 

उनकी इस बात ने अदालत में मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर दिया। न्यायाधीश, वकील और परिवार के सदस्यों ने बैठकर फिर से समझौते की रूपरेखा तय की। अंततः यह निर्णय हुआ कि **बहू और पोती को राष्ट्रीय राजमार्ग पर 1 एकड़ 85 डिसमिल उपजाऊ भूमि हिस्से में दी जाएगी।**

 

बहू ने भी बाकी विवादों से हाथ खींच लिया और अपने ससुराल पक्ष के साथ समझौता कर लिया।

 

करीब दो साल से चला आ रहा झगड़ा उस दिन मुस्कान में बदल गया। अदालत कक्ष में मौजूद लोगों ने कहा —

 

> “आज अदालत में न्याय नहीं, रिश्ते जीते हैं।”

Leave A Reply

Your email address will not be published.