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झारखंड में कैदियों के लिए ओपन जेल व्यवस्था: अच्छे आचरण वाले बंदी परिवार के साथ रहेंगे, बाहर जाकर नौकरी भी कर सकेंगे

रांची (झारखंड): झारखंड में आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को लंबे समय से ओपन जेल में परिवार के साथ रहने का अवसर मिलता रहा है। अब राज्य सरकार इस सुधारात्मक व्यवस्था का दायरा सामान्य बंदियों तक बढ़ाने जा रही है।

जेल में लगातार अच्छा आचरण प्रदर्शित करने वाले और सुधार की राह पर आगे बढ़ चुके अन्य बंदियों को भी अपने परिवार के साथ रहने और दिन में जेल से बाहर निकलकर आजीविका कमाने की अनुमति मिल सकेगी। इस कदम का मुख्य उद्देश्य जेलों को केवल दंड देने का केंद्र न बनाकर बंदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का जरिया बनाना है।

जेल आईजी सुदर्शन मंडल ने जानकारी दी कि ‘ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूट’ का मूल ध्येय बंदियों को नियंत्रित परिस्थितियों में सामान्य जीवन जीने, रोजगार करने और आत्मनिर्भर बनने का अवसर देना है।

📜 5 दशक पुरानी है ओपन जेल की अवधारणा: सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर विस्तार

इतिहास और नीतिगत बदलाव:

  • सांगानेर से हुई थी शुरुआत: भारत में ओपन जेल की शुरुआत पांच दशक पूर्व राजस्थान के जयपुर स्थित सांगानेर से हुई थी।

  • झारखंड में नक्सल जेल का इतिहास: इसी मॉडल पर झारखंड में पूर्व में ‘नक्सल प्रिजन’ स्थापित किया गया था, जिसे वर्ष 2018 में आधिकारिक रूप से ‘सरेंडर नक्सल जेल’ में परिवर्तित किया गया।

  • सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन: उच्चतम न्यायालय द्वारा सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूट स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि बंदियों का समुचित पुनर्वास सुनिश्चित हो सके।

🏢 राज्य की 4 केंद्रीय जेलों में खुलेंगे ओपन और सेमी-ओपन बैरक

प्रस्तावित ढांचा और योजना:

  • सेंट्रल जेलों का चयन: झारखंड सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत राज्य की चार प्रमुख केंद्रीय जेलों (Central Jails) में ओपन अथवा सेमी-ओपन बैरक विकसित करने का विधिवत प्रस्ताव तैयार किया है।

  • सुधारात्मक वातावरण: मौजूदा जेल व्यवस्था में आवश्यक रूपांतरण कर पात्र बंदियों के लिए पृथक बैरक और सुधारात्मक माहौल तैयार किया जाएगा।

⏰ सुबह काम पर निकलेंगे, शाम को बैरक लौटेंगे: आजीविका कमाने का मिलेगा अवसर

दैनिक दिनचर्या और कार्यप्रणाली:

  • समय-सारणी: निर्धारित मानकों पर खरे उतरने वाले पात्र बंदी सुबह लगभग 6:00 बजे जेल परिसर से बाहर जाकर अपनी नौकरी अथवा दैनिक व्यवसाय कर सकेंगे और शाम 6:00 से 7:00 बजे तक वापस बैरक में लौटेंगे।

  • कौशल विकास: इस व्यवस्था से बंदियों को नया कौशल सीखने, आजीविका चलाने और अपनी मेहनत की कमाई से स्वावलंबी बनने का प्रत्यक्ष अनुभव मिलेगा।

👨‍👩‍👧‍👦 परिवार के साथ रहकर जीवन बिताने की छूट: घर-परिवार की उठाएंगे जिम्मेदारी

पारिवारिक जुड़ाव और सामाजिक सामंजस्य:

  • परिवार के साथ निवास: ओपन करेक्शनल व्यवस्था की सबसे प्रमुख विशेषता यह है कि चयनित कैदी अपने परिवार के साथ रहकर सामान्य पारिवारिक जीवन व्यतीत कर सकेंगे।

  • भरण-पोषण की जवाबदेही: बाहर काम करके बंदी अपने बच्चों की पढ़ाई, भोजन और परिवार के दैनिक खर्चों की जिम्मेदारी खुद वहन करेंगे, जिससे उनमें सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना जाग्रत होगी।

⚖️ गृह सचिव की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय कमेटी करेगी पात्र बंदियों का चयन

कड़े नियम और चयन प्रक्रिया:

  • कमेटी का गठन: ओपन जेल में जाने के लिए चयन समिति के अध्यक्ष गृह सचिव होंगे, जबकि आईजी (जेल) सदस्य सचिव और संबंधित जिले के उपायुक्त (DC) सहित अन्य उच्चाधिकारी इसके सदस्य होंगे।

  • मूल्यांकन के कड़े मानक: कमेटी बंदी के पुराने रिकॉर्ड, जेल में उसके व्यवहार, अपराध की प्रकृति और उसमें आए सुधारात्मक बदलावों की गहन समीक्षा करने के बाद ही ओपन जेल की अनुमति देगी।

  • सजा में छूट नहीं: जेल प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ओपन जेल भेजना सजा की समाप्ति नहीं है, बल्कि सजा अवधि के दौरान नियमों और कड़े अनुशासन के तहत समाज से जोड़ने की एक प्रक्रिया है।

🛡️ रिहाई के बाद अपराध की दुनिया में लौटने से रोकने की रणनीति

पुनर्वास और दीर्घकालिक प्रभाव:

  • जेल और समाज के बीच का सेतु: लंबी सजा के बाद एकाएक रिहा होने पर कई बंदी समाज में सामंजस्य नहीं बैठा पाते। ओपन जेल उनके लिए जेल और समाज के बीच एक सेतु (Bridge) की तरह कार्य करेगी।

  • अपराध से दूरी: जब बंदी जेल में रहते हुए ही काम करने, कमाने और पारिवारिक जिम्मेदारियों को निभाने का आदी हो जाएगा, तो रिहाई के बाद उसके पुनः अपराध के रास्ते पर जाने की संभावना नगण्य हो जाएगी।

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