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राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा: देश में 11 लाख लोग कॉर्नियल दृष्टिहीनता के शिकार; PGI में 1,000 मरीज कतार में, जानिए आंकड़े

चंडीगढ़: आंखें हमें जीवित रहते हुए खूबसूरत संसार देखने का अवसर प्रदान करती हैं, लेकिन जीवन की अंतिम सांस के बाद भी यही आंखें किसी अन्य दृष्टिबाधित व्यक्ति के जीवन में रोशनी भर सकती हैं। मरणोपरांत नेत्रदान किसी ऐसे जरूरतमंद व्यक्ति के लिए नई सुबह की तरह है, जो वर्षों से उजाले की प्रतीक्षा कर रहा है।

हालांकि देश में नेत्रदान को लेकर जागरूकता और कॉर्निया कलेक्शन के आंकड़ों में प्रतिवर्ष सुधार देखा जा रहा है, लेकिन दृष्टिहीनता से जूझ रहे मरीजों की मांग और उपलब्ध कॉर्निया की संख्या के बीच का अंतर आज भी एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है। वर्तमान में भारत में लगभग 11 लाख लोग कॉर्नियल ब्लाइंडनेस (कॉर्निया जनित दृष्टिहीनता) से प्रभावित हैं, जबकि इसके सापेक्ष देश भर में प्रतिवर्ष मात्र 25,000 से 30,000 कॉर्निया ट्रांसप्लांट ही संभव हो पाते हैं।

🗓️ 25 अगस्त से 8 सितंबर तक ‘राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा’: जन-जागरूकता पर जोर

अभियान की मुख्य प्राथमिकताएं और उद्देश्य:

  • पखवाड़े का आयोजन: नेत्रदान के प्रति समाज में व्याप्त भ्रांतियों को दूर करने और लोगों को मरणोपरांत आंखें दान करने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से 25 अगस्त से 8 सितंबर तक देशव्यापी ‘राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा’ मनाया जा रहा है।

  • समयबद्ध सूचना का महत्व: इस अभियान का मुख्य लक्ष्य केवल संकल्प पत्र भरवाना नहीं, बल्कि परिजनों को यह समझाना है कि मृत्यु के 4 से 6 घंटे के भीतर नजदीकी आई बैंक या स्वास्थ्य संस्थान को सूचित करना अत्यंत अनिवार्य है।

  • भ्रांतियों का निवारण: कई बार जानकारी के अभाव अथवा समय पर सूचना न मिल पाने के कारण इच्छुक व्यक्तियों का नेत्रदान संपन्न नहीं हो पाता, जिसे दूर करने का प्रयास स्वास्थ्य विभाग कर रहा है।

📊 देश में 3 वर्षों में बढ़ा कॉर्निया कलेक्शन: 396 आई बैंक कर रहे काम

राष्ट्रीय स्तर पर अद्यतन आंकड़े और चुनौतियां:

  • वर्ष 2022-23: देश भर में कुल 62,370 कॉर्निया कलेक्शन दर्ज किए गए।

  • वर्ष 2023-24: यह संख्या बढ़कर 66,434 तक पहुंची।

  • वर्ष 2024-25: जागरूकता के फलस्वरूप कलेक्शन का आंकड़ा 69,848 दर्ज किया गया।

  • सफल ट्रांसप्लांट का अंतर: वर्तमान में देश में 396 से अधिक आई बैंक सक्रिय हैं। हालांकि, दान की गई प्रत्येक कॉर्निया चिकित्सकीय रूप से प्रत्यारोपण योग्य नहीं होती; गुणवत्ता और चिकित्सकीय मानकों के कारण कुल कलेक्शन और वास्तविक सफल ट्रांसप्लांट की संख्या में अंतर बना रहता है।

🏥 पीजीआई चंडीगढ़ में 1,000 से अधिक मरीज प्रतीक्षा सूची में

स्थानीय स्तर पर मांग और आपूर्ति का अंतर:

  • सालाना उपलब्धता: स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (PGIMER) चंडीगढ़ में प्रतिवर्ष केवल 400 से 500 डोनेटेड कॉर्निया ही प्राप्त हो पाती हैं।

  • लंबी वेटिंग लिस्ट: संस्थान में 1,000 से अधिक मरीज कॉर्निया ट्रांसप्लांट की प्रतीक्षा में हैं।

  • जिंदगी बदलने का जरिया: यह प्रतीक्षा सूची केवल आंकड़ों का हिस्सा नहीं है, बल्कि इसमें शामिल हर मरीज के लिए आंखों की रोशनी उसकी पढ़ाई, करियर, पारिवारिक जिम्मेदारियों और आत्मनिर्भर जीवन से जुड़ी हुई है।

📈 हरियाणा में कॉर्निया कलेक्शन में 40% की बढ़ोतरी: करनाल जिला शीर्ष पर

राज्य स्तर पर जिलावार प्रदर्शन:

  • उत्साहजनक आंकड़े: हरियाणा में वर्ष 2024-25 के दौरान 1,624 आई-बॉल का कलेक्शन हुआ था, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 2,268 हो गया। यानी एक वर्ष में 644 अधिक (करीब 40% वृद्धि) आई-बॉल एकत्र किए गए।

  • करनाल रहा अव्वल: वर्ष 2025-26 में करनाल जिले ने सर्वाधिक 916 आई-बॉल कलेक्शन के साथ प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया। इसके बाद गुरुग्राम में 291 और सिरसा में 146 कलेक्शन हुए।

  • सोनीपत में अभूतपूर्व उछाल: सोनीपत जिले में वर्ष 2024-25 में मात्र 6 आई-बॉल मिले थे, जो 2025-26 में बढ़कर 375 हो गए।

  • गिरावट वाले जिले: फरीदाबाद में कलेक्शन 150 से घटकर 133 और रोहतक में 220 से घटकर 114 पर आ गया, जिससे स्पष्ट है कि सभी जिलों में जागरूकता का प्रसार एक समान गति से होना अभी बाकी है।

💡 एक व्यक्ति का नेत्रदान रोशन कर सकता है दो जिंदगियां: परिवारों की भागीदारी जरूरी

नेत्रदान का प्रभाव और प्रक्रियात्मक सुझाव:

  • दो लोगों को नई दृष्टि: स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, एक मृतक व्यक्ति के नेत्रदान (दोनों कॉर्निया) से दो अलग-अलग दृष्टिबाधित मरीजों के जीवन में नई रोशनी लाई जा सकती है।

  • परिवार के साथ संवाद: कई बार व्यक्ति जीवनकाल में नेत्रदान का संकल्प लेता है, लेकिन परिजनों को इसकी जानकारी न होने से यह संभव नहीं हो पाता। इसलिए परिवार के सदस्यों से अपनी इस इच्छा को पहले से साझा करना जरूरी है।

  • समय पर कदम: मृत्यु होने पर आंखें बंद रखें, पंखा बंद कर दें, गीली रुई आंखों पर रखें और बिना देरी किए नजदीकी आई बैंक या हेल्पलाइन पर तुरंत संपर्क करें।

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