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छिंदवाड़ा में बांस व्यापारी और वन विभाग का बड़ा खेला, बिना टीपी बांस का परिवहन कर रहे ट्रक को ग्रामीणों ने पकड़ा

वन और वन्यप्राणियों की सुरक्षा का अहम जिम्मा वन विभाग के कंधों पर होता है। लेकिन आए दिन वन्यप्राणियों के शिकार और अवैध पेड़ों की कटाई के मामले सामने आते रहते हैं। इस बार तो वन विभाग अमले ने एक बड़ा ही खेल को अंजाम दे दिया। जिसमें वन समिति और वन विभाग के अधिकारियों की मिली भगत से बांस व्यापारी को लाखों रुपए के बांस बेच दिए गए। दरअसल एक ऐसा ही मामला पश्चिम वन मंडल के साँवरी रेंज से सामने आया है। जहां बीते गुरुवार को हिरावाड़ी वन परिक्षेत्र में बांस से भरे आयशर ट्रक को ग्रामीणों ने ग्राम महलपुर में रोका गया। जब जागरूक लोगों ने बांस ले जा रहे ट्रक चालक से बांस परिवहन के लिए टीपी मांगी तो ट्रक चालक के पास किसी भी प्रकार टीपी नही पाई गई। हालांकि ग्रामीणों को ट्रक चालक ने मनी रसीद दिखाया। जिस में हिरावाड़ी वन समिति द्वारा जारी मनी रसीद में 2 हजार बांस, जिस में एक नग बांस की कीमत दो रुपए पच्चीस पैसे दर्शायी गई थी।

तत्काल ग्रामीणों ने इसकी सूचना वन विभाग को दी। लेकिन उसके बाद भी वन विभाग मामले को गम्भीरता से न लेते हुए लगभग दो घण्टे बाद मौके पर पहुंचा। मौके पर पहुंचकर हिरावाड़ी में पदस्थ योगेश उईके ने ट्रक को टेमनी नाके पर खड़ा किया गया। और सम्बंधित रेंज के एसडीओ विजेंदर खोपागड़े और रेंजर कीर्ति बाला गुप्ता को मामले की जानकारी से अवगत कराया। लेकिन कुछ घण्टों बाद ही वन विभाग की टीम ने वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश के बाद बांस से भरा ट्रक को छोड़ दिया गया। जब इस मामले में डिप्टी रेंजर योगेश उइके से बात की गई तो उन्होंने कहा कि नाके में पर्याप्त जगह न होने पर ट्रक को रेंज कार्यालय छिंदवाड़ा में खड़ा कर दिया गया। जिसका बकायदा ऑडियो हमारे पास मौजूद है। लेकिन जब रेंज कार्यालय के जाकर देखा गया तो। बांस से भरा ट्रक वहां मौजूद नही था। पुनः डिप्टी रेंजर से चर्चा की गई तो उन्होंने हड़बाते हुए कहा कि आप रेंजर मेडम से बात कर लीजिए। मैं अधिकृत नही हूँ जबकि नियमानुसार रेंजर के नेतृत्व में डिप्टी रेंजर जब्त कार्यवाही के लिए अधिकृत होता है। आखिर क्या कारण है कि वन विभाग ने बिना टीपी बांस का परिवहन कर रहे वाहन चालक के पास टीपी नही होने के बाबजूद भी ट्रक को छोड़ दिया गया जबकि बांस को पांच किलोमीटर से दूर परिवहन करने पर टीपी की आवश्यकता होती है।

रेंजर साहिबा बोलीं… वन समिति पर हमारा कोई अधिकार नहीं

जब इस मामले में साँवरी रेंज की रेंजर कीर्ति बाला गुप्ता से बात की तो उन्होंने मामले को उलझाते हुए बताया कि वन समिति पर हमारा कोई अधिकार नही होता है। जब उनसे पूछा गया कि बांस का पहला हक ग्रामीण और किसानों का होता है। लेकिन वन समिति किसानों को 8 फिट का प्रति बांस 10 से 16 रु में बेच रही है। जबकि व्यापारी को लाभ पहुंचाते हुए उसे महज प्रति बांस 2 रु 25 पैसे में दिया गया। उन्होंने पुनः कहा कि हमारा वन समिति में कोई अधिकार क्षेत्र ही नहीं है। और वन समिति के अध्यक्ष का नम्बर देने से भी इंकार कर दिया। इससे साफ जाहिर होता है कि वन विभाग के अधिकारियों की सांठगांठ से बांस के नाम पर जमकर खेल चल रहा है।

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