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KBC प्रतिभागी शैलेश बोले ऐसा लगा स्वर्ग से आई आवाज, अब बच्चों की मोटेवेशनल क्लास चलाएंगे।

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बैतूल के सारनी की जानी-मानी शख्सियत और ट्यूटर शैलेश चौधरी को 25 वर्षों से जिस पल का इंतजार था, वह अब साकार हुआ है।

शैलेश चौधरी कौन बनेगा करोड़पति सीजन 17 की हॉट सीट पर बैठे और 29 अक्टूबर को महानायक अमिताभ बच्चन के सामने बैठने का उनका सपना पूरा हुआ।

शैलेश चौधरी बच्चों को पढ़ाते हैं और पिछले 25 सालों से लगातार केबीसी में चयन के लिए प्रयासरत थे। वे बताते हैं —

“यह जर्नी बहुत लंबी होती है, कुल सात राउंड होते हैं और सातवें राउंड में कॉल आता है। पढ़ाई का तो अपना महत्व है ही, पर भाग्य का भी साथ होना जरूरी है। हम कर्म तो करते ही जाते हैं। 40-50 करोड़ लोगों में से चयन होना और हॉट सीट पर बैठकर सवालों का जवाब देना एक सपना था जो आखिरकार सच हुआ।”

वे कहते हैं कि केबीसी में सवाल कहीं से भी आ सकते हैं — इतिहास, भूगोल या करंट अफेयर्स से।

“इसके लिए लगातार अखबार पढ़ना, टीवी न्यूज देखना जरूरी है। आप नहीं जानते कौन-सा सवाल आ जाए, इसलिए इसे ‘हॉट सीट’ कहते हैं।”

शैलेश बताते हैं कि वे 2022 में भी टॉप टेन तक पहुंचे थे लेकिन हॉट सीट तक नहीं जा सके थे। इस बार उन्होंने 12वें सवाल तक खेला और क्विट किया।

“तीन सवाल और बाकी थे करोड़पति बनने में। साढ़े सात लाख नगद जीते और करीब 10 गिफ्ट मिले — कुल मिलाकर लगभग 15 लाख का इनाम मिला।”

शैलेश ने कहा —

“अब भी यकीन नहीं हो रहा कि मैं धरती पर हूं। उस एपिसोड में अमिताभ बच्चन खूब हंसे। उन्होंने वादा किया है कि सारनी को नहीं भूलेंगे और अगले महीने हमें अपने घर डिनर पर बुलाया है।”

शैलेश ने बताया कि सबसे तनावपूर्ण पल ‘फास्टेस्ट फिंगर फर्स्ट’ का था।

“अगर उस समय कोई मेरा बीपी नापता तो शायद 300-320 होता। जब अमिताभ बच्चन ने मेरा नाम पुकारा, तो लगा जैसे आवाज स्वर्ग से आई हो। वो मेरे जीवन का सबसे खुशीभरा पल था।”

अब शैलेश अपने अनुभव से बच्चों को प्रेरित करने की सोच रहे हैं।

“अपने जिले के बच्चों के लिए मोटिवेशन क्लास शुरू कर दी है। अब सातों दिन प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करवाऊंगा।”

पत्नी साधना चौधरी ने भावुक होते हुए कहा —

“इनकी तैयारी तो 25 साल से चल रही थी, अब भाग्य ने साथ दिया। वे बच्चों को पढ़ाते थे, खुद भी स्टूडेंट बन गए थे। हम घर में होते हुए भी उन्हें दिखते नहीं थे। टीवी पर कोई एपिसोड मिस नहीं करते थे, बस दुआएं करती थी — वही दुआएं काम आईं।”

अमिताभ बच्चन के सामने बैठने का यह सपना अब न सिर्फ शैलेश चौधरी का गौरव है, बल्कि पूरे सारनी और बैतूल जिले के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बन गया है।

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