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बैतूल जनपद में 40 लाख का घोटाला। MPEB बिल भुगतान की रकम निजी खातों में भेजी

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बैतूल। जिले में जनपद पंचायत बैतूल के अधीन आदिवासी छात्रावासों के बिजली बिलों में करीब 40 लाख रुपए का घोटाला सामने आया है। यह रकम मध्यप्रदेश विद्युत वितरण कंपनी (MPEB) के नाम से बने बिलों में हेराफेरी कर निजी व्यक्तियों के खातों में ट्रांसफर की गई थी। मामले की जानकारी सामने आने के बाद प्रशासन ने तीन कर्मचारियों को निलंबित करते हुए एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

जानकारी के अनुसार, सीईओ जनपद पंचायत बैतूल ने हाल ही में छात्रावासों के बिजली बिलों के भुगतान रिकॉर्ड की जांच की। उन्होंने पाया कि MPEB को किए गए भुगतान के खाते के नंबर वास्तविक खाते से मेल नहीं खा रहे थे।

मामला संदिग्ध लगने पर उन्होंने यह बात सीईओ जिला पंचायत बैतूल अक्षत जैन को बताई।

 

जिला पंचायत सीईओ ने जब सीईओ जनपद और ट्रेज़री ऑफिसर से जांच करवाई तो खुलासा हुआ कि करीब 40 लाख रुपए के बिल MPEB के नाम से थे, लेकिन भुगतान के समय एकाउंट नंबर बदलकर चार अलग-अलग निजी व्यक्तियों के खातों में राशि डाल दी गई।

 

प्राथमिक जांच में जनपद के कंप्यूटर ऑपरेटर ने स्वीकार किया कि एकाउंट नंबर में परिवर्तन उसने किया था। यह धोखाधड़ी दो वर्षों से जारी थी, जिसमें ट्राइबल विभाग के तीन कर्मचारी, जो जनपद में अटैच थे, शामिल पाए गए।

जांच में दोषी पाए गए कर्मचारियों में शामिल हैं —

क्षत्रपाल मास्कोले (पियून)

नितेन्द्र पांडे (सहायक ग्रेड-3)

वर्षा कामाविसदार (सहायक ग्रेड-2)

तीनों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है, और एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया चल रही है।

यह पूरा घोटाला बैतूल ब्लॉक के आदिवासी छात्रावासों के बिजली बिलों से जुड़ा है।

कैसे हुआ 40 लाख का घोटाला — 4 स्टेप में समझिए

 

1️⃣ बिल बनाना:

आदिवासी छात्रावासों के बिजली बिल MPEB (विद्युत वितरण कंपनी) के नाम से तैयार किए गए।

 

2️⃣ एकाउंट बदलना:

जनपद के कंप्यूटर ऑपरेटर ने बिल तैयार करते समय MPEB के बैंक खाते की जगह **चार निजी व्यक्तियों के खातों के नंबर दर्ज कर दिए।

 

3️⃣ भुगतान पास होना:

ये फर्जी बिल ट्रेजरी में भेजे गए और भुगतान के दौरान अधिकारियों को **नाम MPEB दिखा**, इसलिए रकम पास हो गई।

 

4️⃣ निजी खातों में ट्रांसफर:

करीब 40 लाख रुपए दो सालों में अलग-अलग किश्तों में चार निजी खातों में जमा** हो गए।

बाद में सीईओ जनपद ने रिकॉर्ड जांचते समय एकाउंट नंबरों में मिसमैच पकड़ा और मामला खुला।

 

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