
17वीं सदी का मंदिर, राजा ने करवाया था निर्माण… रांची में तालाबों से घिरे पहाड़ पर विराजते हैं भगवान जगन्नाथ
झारखंड की राजधानी रांची के धुर्वा थाना क्षेत्र के नीलांचल नामक एक जीवित पर्वत पर स्थित जगन्नाथपुर मंदिर का निर्माण वर्ष 1691 में कराया गया था. इस मंदिर का निर्माण बरकागढ़ रियासत के नागवंशी राजा ठाकुर ऐनी नाथ शाहदेव ने उत्कल पुरी के जगन्नाथपुर मंदिर के तर्ज पर करवाया गया था. यह मंदिर एक जीवित पहाड़ पर स्थित है मंदिर परिसर के चारों ओर घने वृक्ष हैं. वहीं इसके तीन छोर पर तालाब भी स्थित है. इसी मंदिर से लगभग 500 मीटर की दूरी पर स्थित एक और पहाड़ पर एक छोटा मंदिर का भी निर्माण किया गया है, जिसे मौसीबाड़ी के नाम से जाना जाता है. रथ यात्रा के अवसर पर महाप्रभु भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र के साथ भव्य रथ पर सवार होकर मुख्य मंदिर से मौसीबाड़ी पहुंचते है.
10 दिनों तक भगवान के तीनों विग्रह मौसीबाड़ी में ही रहते हैं और वहीं पर श्रद्धालुओं को दर्शन देते हैं. पुरी रथ यात्रा के दौरान 10 दिनों तक राजधानी रांची के धुर्वा थाना क्षेत्र के मौसीबाड़ी से लेकर मुख्य मंदिर तक के बीच में स्थित लभगभ 41.27 एकड़ क्षेत्रफल में भाग्य 10 दिवसीय रथ मेला का आयोजन होता है. जिसकी भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस मेले में शामिल होने के लिए, न सिर्फ झारखंड बल्कि देश के चार से पांच अन्य राज्यों के श्रद्धालु बड़ी संख्या में आते हैं.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.