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तकनीकी खामी, बड़ी लापरवाही या साइबर अटैक? आखिर कैसे क्रैश हुआ प्लेन?

अहमदाबाद प्लेन क्रैश ने कभी न भूल पाने वाला दर्द दिया है. इस हादसे में आंसू, दुख और दर्द के साथ सस्पेंस और कई सवाल हैं.इस हादसे ने सिर्फ 360 सेकेंड में 265 ज़िंदगियां छीन लीं. हादसे के बाद अगर कुछ बचा है तो वो हैं सवाल, जिनका जवाब हर कोई जानना चाहता है. पहला सवाल- क्या कोई तकनीकी खामी बोइंग 787 के क्रैश की वजह बन गई? दूसरा सवाल- क्या टेकऑफ के वक्त विमान में कोई बड़ी लापरवाही हुई?

सवालों का जवाब सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि दूसरे देशों की भी कई एजेंसियां जानना चाहती हैं. अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देश अपनी स्पेशल टीम भेज रहे हैं, जिससे पता चल सके कि प्लेन क्रैश हुआ कैसे. क्या प्लेन में उड़ान भरने से पहले कोई तकनीकी खामी थी, जिसे दूर नहीं किया गया. क्या प्लेन में अचानक कोई गड़बड़ी हुई? या विमान के मेंटनेंस में लापरवाही हुई?

पायलट से किसी तरह की चूक हुई?

एक सवाल और है, वो ये कि क्या ये हादसा किसी मानवीय भूल की वजह से हुआ. क्या टेक ऑफ के वक्त पायलट से किसी तरह की चूक हुई? क्योंकि एक रिपोर्ट के अनुसार टेकऑफ के दौरान 65% हादसे मानवीय भूल की वजह से होते हैं. इसमें एक सवाल साजिश के एंगल पर भी घूम रहा है. जिसमें साइबर अटैक वाली आशंकाएं हैं. क्या किसी साइबर अटैक की वजह से एअर इंडिया का प्लेन हादसे का शिकार हुआ?

12 जून को अहमदाबाद में एयर इंडिया की फ्लाइट AI171 तब हादसे का शिकार हुई जब उसे 2 अनुभवी पायलट कंट्रोल कर रहे थे और मौसम भी बिल्कुल साफ था. इसीलिए लोगों में इस बात को लेकर और ज़्यादा जिज्ञासा है कि आखिर जो प्लेन सही तरह से टेकऑफ करता हुआ दिखा, वो थोड़ी ऊंचाई पर जाने के बाद गिर कैसे गया. क्या फ्लैप्स की गलत सेटिंग की वजह से ये हादसा हुआ? क्या इंजन को थ्रस्ट पावर कम मिला? या 3505 मीटर के रनवे से प्लेन ने समय से पहले टेकऑफ किया और एक सस्पेंस लैंडिंग गियर के समय पर ना उठने को लेकर भी है. ये सभी वो कारण हैं जो विमान के लिफ्ट करने और ऊंचाई पकड़ने की क्षमता प्रभावित करते हैं.

अचानक प्लेन स्टॉल कैसे करने लगा?

आखिर 625 फीट ऊपर जाने के बाद अचानक प्लेन स्टॉल कैसे करने लगा…यानी गिरने कैसे लगा? दावा किया जा रहा है कि टेकऑफ करते वक्त प्लेन की रफ्तार 174 नॉट थी. जबकि बोइंग 787 ड्रीमलाइनर को इस वजन पर कम से कम 200 से 250 नॉट की रफ्तार चाहिए होती है. प्लेन क्रैश का जो वीडियो है, उसमें विमान के लैंडिंग गियर नीचे दिखाई दे रहे हैं, जो टेकऑफ के वक्त ऐसे नहीं होने चाहिए थे.

एक सस्पेंस इस बात को लेकर भी है कि प्लेन में टेकऑफ के वक्त क़रीब सवा लाख लीटर फ्यूल था. तो क्या ज्यादा वजन की वजह से इंजन को पर्याप्त थ्रस्ट नहीं मिला? जो प्लेन के उड़ान भरने के लिए ज़रूरी होता है. हालांकि आज जांच एजेंसियों को प्लेन का ब्लैक बॉक्स मिल गया है लेकिन क्या इससे भी विमान हादसा का पूरा सच सामने आएगा?

प्लेन क्रैश को लेकर एक और थ्योरी

इस सवाल का भी कोई स्पष्ट जवाब नहीं है. अहमदाबाद प्लेन क्रैश को लेकर एक थ्योरी साइबर अटैक से भी जुड़ी है और लोगों के मन में सवाल है- क्या किसी प्लेन को साइबर अटैक से गिराया जा सकता है? तो इसका जवाब है- हां. ऐसे सबूत अप्रैल 2025 में मिले थे जब भारत ने म्यांमार में भूकंप पीड़ितों की मदद के लिए ऑपरेशन ब्रह्मा शुरू किया था, तो भारतीय वायुसेना के विमान पर साइबर हमला हुआ था. तब पायलटों ने बैकअप सिस्टम से अपना मिशन पूरा किया था.

इसी तरह 19 सितंबर 2016 को बोइंग 757 विमान का अटलांटिक एयरपोर्ट पर ऑपरेटिंग सिस्टम को हैक किया गया, थोड़ी देर के बाद विमान एकदम ठीक हो गया. बाद में अमेरिका के होमलैंड डिपार्टमेंट ने दावा किया कि ये रिहर्सल था. लेकिन क्या अहमदाबाद के प्लेन क्रैश में भी साइबर अटैक वाला कोई एंगल है? ये जांच का विषय है.

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