Logo
ब्रेकिंग
परिसीमन पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने PM मोदी को लिखा पत्र: सर्वदलीय बैठक की मांग दोहराई नेपाल के हिमालयी सीमावर्ती क्षेत्र में प्रलयंकारी बाढ़: 300 से अधिक भारतीय लापता, रेस्क्यू ऑपरेशन जा... ₹200 जुर्माने वाले मामले में 12 साल की देरी: मंडी कोर्ट ने पुलिस का चालान किया खारिज, आरोपी बरी कानपुर के नत्थापुरवा गांव में गिरा 4-सीटर ट्विन-इंजन विमान; ट्रेनर सचिन भाटिया और ट्रेनी अभिषेक की म... राहुल गांधी के दबाव में बैकफुट पर मोदी सरकार? कांग्रेस जनता के बीच ले जाएगी ये 5 बड़े मुद्दे, प्रचार... धमतरी: 10 साल से बिस्तर पर जिंदगी काट रहे शशिकांत ने मांगी इच्छामृत्यु; हमले की CBI जांच और इलाज की ... उत्तर प्रदेश सर्किल रेट लिस्ट 2026: 9 साल बाद बदलने जा रहे हैं प्रॉपर्टी के सरकारी रेट, जेवर एयरपोर्... झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: असिस्टेंट पब्लिक प्रॉसिक्यूटर परीक्षा पर रोक से इनकार, सरकार से 2 हफ्... गोरखपुर में पति-पत्नी के झगड़े से 1000 घरों की बिजली गुल: गुस्से में 11 KV हाईटेंशन तार पर फेंके कपड... कोटा में फिर NEET छात्रा ने की खुदकुशी: फ्लैट में फंदे से लटकी मिली खुशबू पटेल, छतरपुर से आकर कर रही...
Header Ad

रामचरितमानस का सूत्र: ये 8 अहंकार कर सकते हैं आपका सर्वनाश!

भारतीय धर्मग्रंथों में अहंकार को मानव जीवन का सबसे बड़ा शत्रु बताया गया है. श्रीरामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास ने विस्तार से बताया है कि किस तरह से अहंकार इंसान की बुद्धि को ढक लेता है और उसके विनाश का कारण बनता है. तुलसीदास जी के अनुसार, अहंकार केवल बाहरी दिखावे या गर्व तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मन के भीतर छिपी आठ तरह की प्रवृत्तियों का रूप है, जो व्यक्ति को धर्म, सद्गुण और सुख से दूर कर देती हैं. ये आठ अहंकार कौन से हैं और इनसे बचने के उपाय क्या हैं?

रामचरितमानस का यह संदेश है कि अहंकार चाहे किसी भी रूप में हो विनाश का कारण बनता है. श्रीराम जैसे मर्यादा पुरुषोत्तम हमें सिखाते हैं कि विनम्रता, भक्ति और सेवा ही जीवन की सच्ची शक्ति हैं. रामचरितमानस के आठ अहंकार हमारे मन की बाधाएं हैं, जो हमें सही रास्ते से भटकाने की कोशिश करते हैं. इन्हें पहचान कर और सही आचरण अपनाकर हम न केवल अपने जीवन को सुखमय बना सकते हैं, बल्कि समाज में भी एक बेहतर स्थान पा सकते हैं.

रूप का अहंकार

सुंदरता पर गर्व सबसे आम अहंकार है. इंसान अपने रूप पर इतना मोहित हो जाता है कि उसे लगता है, उसकी सुंदरता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है.

उदाहरण: शूर्पणखा ने अपने रूप और यौवन पर घमंड करते हुए सीता जी को अपमानित करने की कोशिश की.

चौपाई

रूप लावण्य तनु अभिमाना, चहति समर निज बल गहि ठाना।

अर्थ: रूप और लावण्य के अभिमान में व्यक्ति अपने बल को गलत दिशा में प्रयोग करता है.

कैसे बचें: सुंदरता अस्थायी है, कर्म और चरित्र ही असली आकर्षण है.

बल का अहंकार

शारीरिक ताकत पर घमंड व्यक्ति को धर्म से भटका देता है.

उदाहरण: रावण और कुंभकर्ण ने अपनी शक्ति का उपयोग अहंकार में किया, जिससे उनका विनाश हुआ.

चौपाई

बल बड़ाई जग में करई, बुद्धि बिनु नाश पथ धरई।

अर्थ: केवल बल का अहंकार व्यक्ति को नाश के मार्ग पर ले जाता है

ज्ञान का अहंकार

ज्ञान पर गर्व व्यक्ति को दूसरों की बुद्धि को तुच्छ मानने पर मजबूर करता है.

उदाहरण: रावण ने विभीषण की नीति को नकार दिया क्योंकि उसे अपने ज्ञान पर अभिमान था।

चौपाई:

बिनय न मानत जलधि जड़, गए तीन दिन बीत

अर्थ: यहाँ जड़ शब्द अहंकारी को दर्शाता है, जो बुद्धि होते हुए भी अड़ियल होता है

धन का अहंकार

धन इंसान के स्वभाव को बदल देता है और वह दूसरों को कमतर समझने लगता है.

उदाहरण: रावण की असीम संपत्ति भी उसे विनम्र नहीं बना पाई.

चौपाई

धनु धरि अहंकार करि भारी, निज धरम बिसारि अति संसारी

अर्थ: धन के अहंकार में व्यक्ति अपना धर्म भूल जाता है.

कुल (वंश) का अहंकार

वंश पर गर्व करने वाला व्यक्ति अपने कर्मों को भूल जाता है.

उदाहरण: रावण को अपने वंश का अभिमान था कि वह विश्रवा ऋषि का पुत्र है, लेकिन कर्म विपरीत थे.

तप का अहंकार

तपस्या का गर्व व्यक्ति को सोचने पर मजबूर कर देता है कि वह दूसरों से श्रेष्ठ है.

उदाहरण: अहिरावण ने अपने तप का उपयोग बुराई के लिए किया.

यौवन का अहंकार

युवा अवस्था में शक्ति और सौंदर्य का घमंड इंसान को गलत रास्ते पर ले जाता है.

उदाहरण: शूर्पणखा का व्यवहार इसी अहंकार का परिणाम था.

पद का अहंकार

पद और अधिकार का घमंड सबसे खतरनाक है.

उदाहरण: लंका के राजा होने के अहंकार में रावण ने अपने पद का दुरुपयोग किया.

चौपाई

अहंकार अंध सब लोक, न जानत निकट काल भई चोट

अर्थ: अहंकार में डूबा व्यक्ति समय की मार को नहीं समझ पाता.

अहंकार से बचने के उपाय

  • विनम्रता अपनाएं: हमेशा दूसरों के प्रति सम्मान रखें.
  • सेवा भाव: स्वार्थ रहित सेवा अहंकार को मिटाती है.
  • सत्संग: संतों और अच्छे लोगों का साथ.
  • ईश्वर स्मरण: ध्यान और भक्ति से नम्रता आती है.
  • आत्मचिंतन: अपने कर्मों की समीक्षा करें.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.