Logo
ब्रेकिंग
सिविल जज बनने के बाद भी नहीं डिगा वैराग्य का संकल्प, प्रखरश्री ने चुना मोक्ष का मार्ग बैतूल बनेगा खेलो का हब, कुकरु को मिनी शिमला बनाने की तैयारी,हेमंत खंडेलवाल के प्रयास रंग लाए, मिली 4... जरूरतमंदों के जीवन की रक्षा का संदेश लेकर आगे बढ़ा रक्तदान अभियान, सनातनी विनोद कुमार बिंदल के मंदिर... सतपुड़ा वैली पब्लिक स्कूल बना बैतूल का नंबर 1 को-एड डे स्कूल, एजुकेशनवर्ल्ड इंडिया स्कूल रैंकिंग 202... बैतूल में SevaMitra की शुरुआत, अब घर बैठे बुक करें होम सर्विस फोन नहीं उठाते सीईओ,मीडियाकर्मियों में नाराजगी,ज्ञापन सौंपा Ola Uber Ban Chandigarh: ओला-उबर के लाइसेंस रद्द होने के बाद शुरू हुई 'भारत टैक्सी', जानिए यात्रियों... Haryana News: लगातार चौथी बार देश में अव्वल रही करनाल शुगर मिल, केंद्रीय मंत्रियों ने दी प्रतिष्ठित ... NCC DG Team Selection: हरियाणा के होनहार शूटर विजयन्त ढाण्डा ने बढ़ाया राज्य का मान, देश के टॉप-12 शू... Haryana Road Mishap: नूंह सड़क हादसे में चार लोगों की मौत, पत्नी गंभीर रूप से घायल; पुलिस जांच में ज...
Seva Mitra
Header Ad

Lord Ganesha Original Head Mystery: पाताल भुवनेश्वर गुफा से जुड़ा है गणेश जी का सिर, ब्रह्मकमल से जुड़ी है यह खास बात

पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती के उबटन से रचे गए भगवान गणेश का सिर जब क्रोधित भगवान शिव ने त्रिशूल से काट दिया था, तब मान्यता के अनुसार उनका वही मूल मानव सिर उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में गंगोलीहाट के पास स्थित पाताल भुवनेश्वर गुफा में आज भी सुरक्षित रखा हुआ है, जहाँ इसे ‘आदि गणेश’ के रूप में पूजा जाता है.

🪨 2. गुफा के भीतर शिला के रूप में विराजमान हैं ‘आदि गणेश’, ब्रह्मकमल से लगातार गिरती हैं जल की बूंदें

पाताल भुवनेश्वर गुफा के अंदर एक विशेष शिला को भगवान गणेश के कटे हुए मस्तक का प्रतीक माना जाता है. इस आदि गणेश शिला के ठीक ऊपर प्राकृतिक रूप से 108 पंखुड़ियों वाला ब्रह्मकमल स्थित होने की मान्यता है, जिससे निरंतर जल की बूंदें गणेश जी के मस्तक पर गिरती रहती हैं और श्रद्धालु इसे एक अत्यंत दिव्य व पवित्र संरचना मानते हैं.

🔱 3. भगवान शिव खुद करते हैं मस्तक की रक्षा, कलियुग में आदि शंकराचार्य ने की थी इस पवित्र गुफा की खोज

लोकमान्यताओं के अनुसार, स्वयं भगवान शिव पाताल भुवनेश्वर गुफा में गणेश जी के इस कटे हुए सिर की रक्षा करते हैं, जिससे यह स्थल और अधिक रहस्यमयी बन जाता है. धार्मिक परंपराओं के मुताबिक, कलियुग में इस पवित्र और अद्भुत गुफा की खोज महान संत आदि शंकराचार्य द्वारा की गई थी, जिसके भीतर की प्राकृतिक आकृतियाँ आज भी देश-दुनिया के श्रद्धालुओं को आकर्षित करती हैं.

Comments are closed.