Logo
ब्रेकिंग
कवर्धा में फर्जी डिजिटल पेमेंट का भंडाफोड़: फर्जी रिसीविंग दिखाकर नकद राशि ऐंठने वाले गिरोह पर एक्शन Bhilai News: भिलाई सेक्टर-2 में गटर की सफाई के दौरान मिला नवजात का शव, इलाके में सनसनी; जांच में जुट... Barwani News: बिजासन घाट में शिमला मिर्च से भरे मिनी ट्रक में लगी भीषण आग, कूदकर बची ड्राइवर की जान;... लाठीचार्ज के बाद भड़के डॉक्टर्स, सीनियर रेजिडेंट्स ने किया OPD का बहिष्कार; JDA का समर्थन MP High Court on Dacoity Act: जब प्रदेश में डकैत ही नहीं तो 45 साल पुराना एक्ट क्यों? हाईकोर्ट ने DG... भोपाल में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर अड़े इंटर्न डॉक्टर: कमला पार्क में धरना जारी, मिला कांग्रेस का... रतलाम में मॉडिफाइड साइलेंसरों पर गरजा पुलिस का बुलडोजर: 108 साइलेंसर कुचले, ₹1 लाख का जुर्माना वसूला Gwalior Achaleshwar Mandir: अचलेश्वर महादेव मंदिर की दानपेटी से निकली अनोखी चिट्ठियां, भक्त बोला- 'क... Chhindwara Patalkot School: पातालकोट में दावों की खुली पोल, 5 साल से छप्पर वाले कच्चे मकान में पढ़ने... सागर कांड के बाद छतरपुर प्रशासन का बड़ा एक्शन: अवैध शराब कारोबारियों पर संयुक्त प्रहार
Header Ad

सेक्स एजुकेशन पर पॉलिसी बनाए केंद्र, SC ने नोटिस भी जारी किया, एक्सपर्ट पैनल बनाने की दी सलाह

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से किशोरों के बीच आपसी सहमति से बनाए गए संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने पर विचार करने को कहा है, ताकि उन्हें सख्त पोक्सो कानून (Protection of Children from Sexual Offences Act, Pocso) के तहत जेल न जाना पड़े. साथ ही कोर्ट ने यौन और प्रजनन स्वास्थ्य शिक्षा पर नीति बनाने का भी सुझाव दिया.

जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस उज्जल भुयान की बेंच ने केंद्र को नोटिस जारी कर महिला एवं बाल विकास मंत्रालय से इस मसले का अध्ययन करने और 25 जुलाई तक रिपोर्ट पेश करने के लिए एक एक्सपर्ट पैनल गठित करने को कहा. कोर्ट ने कहा कि वह रिपोर्ट की समीक्षा करने के बाद ही आगे के निर्देश जारी करेगी.

क्या है मामला

कोर्ट के आदेश की वजह पश्चिम बंगाल की एक महिला की अपने पति की सुरक्षा के लिए कानूनी लड़ाई थी, जिसे 14 साल की उम्र में उसके साथ संबंध बनाने के लिए पोक्सो कानून के तहत 20 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी.

कोर्ट ने इस संवेदनशील मुद्दे पर मदद के लिए 2 सीनियर महिला एडवोकेट माधवी दीवान और लिज मैथ्यू को नियुक्त किया था और उन्होंने सुझाव दिया कि सहमति से संबंध बनाने वाले किशोरों को भी सुरक्षा की आवश्यकता है. उन्होंने सुझाव दिया कि पोक्सो कानून नाबालिगों को यौन शोषण से बचाने में एक जरूरी मकसद पूरा करता है, लेकिन किशोर संबंधों के लिहाज से इसके कठोर आवेदन से ऐसे रिजल्ट सामने आ सकते हैं जो अभियोक्ता और उसके आश्रितों के सर्वोत्तम हितों के अनुरूप नहीं हो सकते हैं.

‘पेनिट्रेशन’ का मामला एकतरफा कृत्य नहींः HC

सीनियर एडवोकेट के सुझावों को स्वीकार करते हुए, कोर्ट ने मामले में केंद्र को पक्षकार बनाया और नोटिस जारी किया. एडवोकेट ने यह भी बताया कि दिल्ली और मद्रास सहित कई हाई कोर्ट ने एक सूक्ष्म दृष्टिकोण अपनाया और पोक्सो कानून के मकसदों और कारणों के कथन की व्याख्या इस प्रकार की है कि इसका मकसद सहमति से बनाए गए रोमांटिक संबंधों को अपराध नहीं बनाना है.

कई मामलों में, मद्रास हाई कोर्ट ने एक कानूनी व्याख्या अपनाई कि सहमति से किए गए ‘पेनिट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट’ के अपराध में ‘हमले’ की जरुरत को पूरा नहीं करते हैं.

कलकत्ता हाई कोर्ट ने माना कि पोक्सो एक्ट में ‘पेनिट्रेशन’ को अभियुक्त द्वारा एकतरफा कृत्य के रूप में परिभाषित किया गया है और इसलिए, सहमति से शारिरिक संबंध बनाए जाने के मामलों में, ‘पेनिट्रेशन’ के लिए सिर्फ अभियुक्त को अकेले जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है. कई अन्य हाई कोर्ट ने भी इस प्रकार के अभियोजन से पीड़ित पर पड़ने वाले प्रभाव पर विचार किया, साथ ही केस को आगे बढ़ाने से पीड़ित को नुकसान पहुंचने की स्थिति में कार्यवाही को रद्द करने का आदेश भी दिया.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.