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क्या 300 दिनों में गोल्ड के दाम पहुंच जाएंगे एक लाख रुपए के पार?

मौजूदा समय में सोना रॉकेट की रफ्तार के साथ भाग रहा है. एक दशक से अधिक समय में यह 25,000 रुपए से बढ़कर 84,300 रुपए पर पहुंच गया है. अगस्त 2011 में सोना पहली बार 25,000 रुपए के लेवल पर पहुंचा और जुलाई 2020 में दस ग्राम सोने के लिए 50,000 रुपये का आंकड़ा पार हो गया. सोने को 25,000 से 50,000 तक पहुंचने में 108 महीने लगे, लेकिन 50,000 के लेवल से 75,000 तक पहुंचने में केवल 48 महीने लगे. सितंबर 2024 में सोने की कीमत 75,000 रुपए पर पहुंच गई. भारत में आज 24 कैरेट सोने का भाव 1 ग्राम 8,430 रुपए है.

सोने के लिए अगला बड़ा मील का पत्थर 1,00,000 रुपए का लेवल है. सवाल यह है कि क्या सोना 2025 के बाकी बचे 300 से 330 दिनों के बीच में 1 लाख रुपये के आंकड़े तक पहुंच जाएगा. अगर सोने को 1 लाख रुपये तक पहुंचना है तो उसे मौजूदा लेवल से सिर्फ 13.5 फीसदी की तेजी दिखानी होगी. ताज्जुब की बात तो ये है कि कुछ जानकार इस साल गोल्ड के करीब 1.50 लाख के पहुंचने का भी अनुमान लगा रहे हैं. क्या ये संभव है?

जब से डोनाल्ड ट्रंप ने जनवरी में दोबारा सत्ता संभाली है, तब से दुनिया तेजी से बदल रही है. ट्रम्प की टैरिफ-संबंधी पॉलिसीज से आम लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. महंगाई में इजाफा देखने को मिलता है. अब जब इसमें ग्लोबल अनिश्चितताओं को भी जोड़ देंगे जो साफ नजर आने लगेगा कि सोने की कीमतों में तेजी जल्द खत्म होने वाली नहीं है.

क्यों आ रही है सोने में तेजी

मीडिया रिपोर्ट में कामा ज्वेलरी के एमडी कॉलिन शाह ने कहा कि ट्रंप की टैरिफ धमकियों ने आर्थिक अनिश्चितता को बढ़ावा दिया है, जिससे सोने की अपील बढ़ी है और कीमतों में बढ़ोतरी हुई है. जियो पॉलिटिकल टेंशन, संभावित अमेरिकी टैरिफ और आर्थिक मंदी की चिंताओं के साथ, सोना 2025 में नई ऊंचाई छूने के लिए तैयार है क्योंकि निवेशक सेफ असेट की तलाश में हैं. हालांकि, इसमें विरोधाभासी विचार भी हैं.

ऑगमोंट की रिसर्च हेड डॉ. रेनिशा चैनानी ने मीडिया रिपोर्ट में कहा कि टैरिफ से संबंधित अधिकांश अनिश्चितताओं की वजह से गोल्ड की कीमतों अधिकांश समय तक सोने के दाम में गिरावट देखी गई है. ऐसे में ऐसा लग नहीं रहा है कि गोल्ड के दाम इस वर्ष एक लाख रुपए के लेवल को पार कर पाएगा. डॉ. चैनानी कहते हैं कि अगर इस साल भू-राजनीतिक तनाव, टैरिफ वॉर, विश्व युद्ध, आयात शुल्क में बदलाव आदि जैसे कुछ नए बुनियादी ट्रिगर होते हैं, जो अनिश्चित है, तो सोने के 1 लाख मील का पत्थर छूने की उम्मीद है.

अमेरिका डॉलर में गोल्ड को समझें

अमेरिकी डॉलर में सोना भी 3,000 डॉलर के मील के पत्थर तक पहुंच रहा है. वर्तमान में, एक औंस सोना 2,858 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा है. यह लगभग 1,027 डॉलर प्रति 10 ग्राम है. इसका मतलब है कि भारतीय रुपए में सोना करीब 89,400 रुपए है, जो भारत में सोने की कीमत के करीब है. मेकलाई फाइनेंशियल के सीईओ जमाल मेकलाई ने मीडिया रिपोर्ट में कहा कि बाजार में कुछ भी संभव है, भले ही यह अजीब लगे.

जैसे-जैसे सोना 3,000 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंच रहा है, बाजार उतना ही बाजार घबराता हुआ दिखाई दे रहा है. जिसका मतलब यह नहीं है कि इसमें बदलाव आएगा; मेरे विचार से ऐसा होना चाहिए. अगर भू-राजनीतिक अनिश्चितता का एक और झटका लगता है और यह 3,000 अमेरिकी डॉलर को पार कर जाता है, तो गोल्ड की कीमतों में और भी तेजी देखने को मिल सकती है.

सोना और यूएस फेड

ट्रम्प के टैरिफ से गोल्ड के सेंटीमेंट पर असर पड़ने के अलावा, यूएस फेड की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है. दरों में 100 बीपीएस यानी 1% की कटौती के बाद, यूएस फेड ने दरों में कोई बदलाव नहीं किया है और दरों को कम करने की कोई जल्दी नहीं है. यदि महंगाई बढ़ती है तो फेड दरें भी बढ़ा सकता है. हाई रेट का सिनेरियो डॉलर के लिए पॉजिटिव है, और जब डॉलर इंडेक्स मजबूत होता है, तो सोने की कीमत गिर जाती है.

ट्रम्प टैरिफ की वजह से मजबूत होगा, जिससे सोने की कीमतें भी गिरेंगी. ऐसा इसलिए है क्योंकि पैसा हाई-यील्ड वाले असेट्स की ओर मूव कर जाता है. संपत्तियों में चला जाता है, और जब डॉलर मजबूत होता है, तो सोने की कीमत गिर जाती है. यूएस फेड रेट में कटौती से सोने की कीमतें बढ़ सकती हैं, जबकि ट्रम्प की आर्थिक नीतियां डॉलर को मजबूत कर सकती हैं, जिससे सोना सस्ता हो जाएगा. इन फैक्टर्स के बीच संतुलन बाजार को आकार देगा.

फेड के फैसलों का असर?

डॉ. चैनानी ने बताया ने कहा कि सोने को यहां से ऊपर ले जाने के लिए, यूएस फेड को दर में कटौती का सहारा लेना होगा. 2025 में सोने की कीमतें अमेरिकी फेडरल रिजर्व रेट फैसलों और अमेरिकी डॉलर की ताकत से काफी प्रभावित होंगी. यदि फेड ब्याज दरों में कटौती करता है, तो बांड यील्ड में गिरावट आ सकती है, जिससे सोना एक सेफ असेट्स के रूप में अधिक आकर्षक हो जाएगा. लेकिन, अमेरिका में महंगाई जल्द ही कम होती नहीं दिख रही है, और ट्रम्प की टैरिफ नीतियों के बाद, डॉलर की मजबूती से सोने की कीमत पर दबाव पड़ने की संभावना है.

मेकलाई कहते हैं कि ध्यान देने वाली एक और बात यह है कि सोना निकालने की लागत लगभग 1,300 डॉलर प्रति औंस है – दूसरे शब्दों में, कीमत बेस प्रााइस से बहुत अधिक है, जो यह संकेत देता है कि सोना बहुत अधिक है और नीचे आ जाएगा. सैमको सिक्योरिटीज में मार्केट पर्सपेक्टिव और रिसर्च हेड अपूर्व शेठ के अनुसार, सोना 1,48,071 रुपये के सुनहरे अंक को छूने वाला है!

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