
मणिपुर में फिर तनाव, मैतेई नेता की गिरफ्तारी के बाद बिगड़े हालात, बिश्नुपुर में कर्फ्यू, कई जगह इंटरनेट बंद
मणिपुर में पिछले कुछ महीनों से राष्ट्रपति शासन लगा हुआ है. इसके बाद से ही इलाके में शांति बनी हुई थी. हालांकि पिछले कुछ दिनों से यहां एक बार फिर विरोध और हिंसा देखने को मिल रही है. इसी को देखते हुए कानून व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति के मद्देनजर, इम्फाल पश्चिम, इम्फाल पूर्व, थौबल, काकचिंग और विष्णुपुर जिलों में जिला मजिस्ट्रेटों की तरफ निषेधाज्ञा जारी की गई है. इम्फाल पश्चिम, इम्फाल पूर्व, थौबल और काकचिंग जिलों में चार या अधिक व्यक्तियों के एकत्रित होने पर रोक लगा दी गई है, जबकि विष्णुपुर में पूर्ण कर्फ्यू लगाया गया है.
मणिपुर में शनिवार रात 11:45 बजे से 5 जिलों में इंटरनेट बंद कर दिया गया है. इन जिलों के नाम हैं, इंफाल वेस्ट, इंफाल ईस्ट, थौबल, विष्णुपुर और ककचिंग हैं. इन जिलों में इंटरनेट और मोबाइल डेटा सेवाएं 5 दिनों के लिए सस्पेंड करने का फैसला लिया गया है. प्रशासन के इस फैसले की वजह अरामबाई तेंगगोल संगठन के नेता की गिरफ्तारी मानी जा रही है. ताकि किसी भी तरह की घटना न हो सके.
प्रशासन की तरफ से जारी आदेश में साफ कहा गया है कि यह कदम अफवाहों और उकसावे को रोकने के लिए उठाया गया है. ऐसे में अगर कोई आदेश का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
मैतेई नेता की गिरफ्तारी से मणिपुर में उग्र हुए समर्थक
मणिपुर में एक बार फिर तनावपूर्ण माहौल बन गया है. यहां मेइती संगठन अरंबाई तेंगगोल के एक नेता की गिरफ्तारी से लोग नाराज हैं, यही कारण है कि लोग केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं. जैसे ही लोगों को नेता की गिरफ्तारी की खबर मिली लोगों ने विरोध शुरू कर दिया. इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर टायर और फर्नीचर भी जलाए और अपने नेता की रिहाई की मांग की. प्रशासन ने आगे आने वाली ऐसी किसी भी स्थिति से निपटने के लिए इंटरनेट बंद किया है. इसके साथ ही लोगों को साफ हिदायत दी है.
मणिपुर में लगा है राष्ट्रपति शासन
मणिपुर में हिंसा में अब तक 258 लोगों की जान गई. 5,600 अधिक सरकारी हथियारों और 6.5 लाख राउंड गोला-बारूद की लूट हुई. 60,000 से अधिक लोग विस्थापन के शिकार हुए और अभी भी हजारों लोग अभी भी राहत शिविरों में रहने के लिए बाध्य हैं.
9 फरवरी को राज्य के सीएम बीरेन सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दिया था. ये इस्तीफा उन्होंने राज्य में चली आ रही जातीय हिंसा के करीब दो साल बाद दिया था. यही कारण है कि उन्होंने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया था. उसके बाद विधानसभा को निलंबित कर दिया गया और 14 फरवरी को राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया.

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