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पुरुष धोती-कुर्ता, महिलाएं साड़ी… महाशिवरात्रि पर पहनकर आएं यही ड्रेस, तभी इस शिव मंदिर में मिलेगी एंट्री

मेरठ के सम्राट पैलेस स्थित राजराजेश्वरी मंदिर में महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर विशेष पूजा का आयोजन किया जाएगा. यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है, जहां भगवान त्रिपुर सुंदर महादेव विराजमान हैं. इस मंदिर की खासियत यह है कि यहां स्फटिक शिवलिंग स्थापित है, जिसमें शिव और शक्ति दोनों का वास माना जाता है.

महाशिवरात्रि पर यहां रात भर पूजा-अर्चना और शिव का अभिषेक किया जाएगा, जिसमें भक्तों का जमावड़ा उमड़ेगा. राजराजेश्वरी मंदिर में पूजा के लिए शास्त्रों के अनुसार विशेष नियम हैं. मंदिर के ब्रह्मचारी राधिकानंद के अनुसार, यहां आने वाले पुरुषों को धोती-कुर्ता पहनकर ही गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति मिलेगी.

वहीं, महिलाएं साड़ी में ही पूजा कर सकती हैं. यदि श्रद्धालु जींस, पैंट या अन्य आधुनिक कपड़े पहनकर मंदिर आते हैं तो उन्हें पूजा करने की अनुमति नहीं दी जाएगी. यह नियम प्राचीन परंपराओं को बनाए रखने और शास्त्रों के अनुसार पूजा करने के उद्देश्य से लागू किया गया है.

शंकराचार्य ने की थी स्फटिक शिवलिंग की स्थापना

राजराजेश्वरी मंदिर की स्थापना ब्रह्मलीन स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज ने की थी, जो दो प्रमुख पीठों के शंकराचार्य थे. उनके द्वारा स्थापित स्फटिक शिवलिंग, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपनी तरह का एकमात्र शिवलिंग माना जाता है. इस शिवलिंग की विशेषता यह है कि इसमें शिव और शक्ति दोनों का वास माना जाता है, इसलिए इसे पूजा करने से दोनों देवताओं की पूजा होती है.

महाशिवरात्रि पर होता है विशेष आयोजन

महाशिवरात्रि के दिन यहां रात्रि जागरण, विशेष पूजन और रुद्राभिषेक का आयोजन होने वाला है. श्रद्धालु बेलपत्र, दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से रुद्राभिषेक करेंगे. रातभर यह क्षेत्र भगवान शिव के भजन-कीर्तन से गूंजेंगे, जिससे वातावरण भक्तिमय हो जाएगा.

श्रद्धालुओं से अपील

मंदिर प्रबंधन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे मंदिर में प्रवेश से पहले शास्त्रों के अनुसार विशेष परिधान पहनकर आएं. इस तरह से उनकी श्रद्धा और भक्ति पूरी तरह से स्वीकार हो सकेगी. महाशिवरात्रि के इस पवित्र दिन पर, भगवान शिव और मां जगदम्बा का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए श्रद्धालु बड़ी संख्या में मंदिर पहुंचेंगे, जहां उनकी भक्ति और श्रद्धा का सही रूप में सम्मान होगा.

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