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पुतिन-ट्रंप की बात छोड़िए, इन 3 शर्तों के साथ ही रूस से समझौता करेगा यूक्रेन

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के प्रमुख व्लादिमीर पुतिन के बीच फोन पर बातचीत के बाद यूक्रेन युद्ध पर विराम लगने की बात कही जा रही है. इसी बीच यूक्रेन से जो खबरें निकलकर सामने आ रही है, उसके मुताबिक यूक्रेन की सरकार ने उन शर्तों को तैयार करना शुरू कर दिया है, जिसके तहत समझौता किया जाएगा.

कहा जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात में जेलेंस्की ये शर्तें सामने रखेंगे. ट्रंप ने गुरुवार को जल्द ही जेलेंस्की से मुलाकात की बात कही है.

किन शर्तों के साथ समझौता करेगा यूक्रेन?

यूक्रेनी अखबार द कीव इंडिपेंडेंट के मुताबिक यूक्रेन ने सबसे पहले यह तय किया है कि वो कब्जे वाले जमीन को आधिकारिक रूप से मान्यता नहीं देगी. यानी रूस ने अब तक युद्ध के जरिए जो जमीन यूक्रेन का कब्जा किया है, उसे यूक्रेन मान्यता नहीं देगा. रूस ने यूक्रेन के क्रीमिया, खेरसॉन, ज़ापोरिज्जिया, डोनेट्स्क और लुगांस्क के साथ-साथ ओब्लास्ट पर भी कब्जा कर लिया है.

यूक्रेन की कोशिश इन प्रांतो को वापस पाने की है. यूक्रेन से जुड़े जानकारों का कहना है कि जेलेंस्की रूस को उसका कुर्स्क ओब्लास्ट वापस कर अपना प्रांत वापस ले सकते हैं.

अखबार ने वहां के एक विपक्षी नेता वोलोडिमिर आर्येव के हवाले से बताया है कि यूक्रेन 2 चीजों पर समझौता नहीं कर सकता है. पहला सैन्य अभ्यास जारी रखने और हथियार बढ़ाने की पाबंदी से जुड़ा है. यूक्रेन को डर है कि इस तरह की पाबंदी लगाकर रूस उसके साथ खेल कर सकता है.

वहीं जमीन को लेकर भी यूक्रेन समझौते के मूड में नहीं है. यानी समझौता होगा या नहीं और होगा तो कब, यह इन 2 शर्तों पर रूस का रूख ही तय करेगा.

नाटो की सदस्यता पर यह चाहता है यूक्रेन

रूस-यूक्रेन युद्ध के शुरू होने की जो सबसे बड़ी वजह थी, वो थी- नाटो की सदस्यता. यूक्रेन नाटो की सदस्यता चाहता था, जो रूस को स्वीकार नहीं था. अब कहा जा रहा है कि डोनाल्ड ट्रंप इसको लेकर पेच फंसा सकते हैं.

यूक्रेन चाहता है कि अमेरिका नाटो को लेकर अभी कोई घोषणा न करे. अमेरिका अगर यह कहता है कि वो यूक्रेन को नाटो की सदस्यता नहीं देगा, तो इससे उसकी किरकिरी पूरी दुनिया में हो जाएगी.

जेलेंस्की की कोशिश इसे फिलहाल टालने की है, जिससे अपने देश में भी उनके खिलाफ माहौल न बन जाए.

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