Logo
ब्रेकिंग
The court's decision शादी में चाकू बाजी में हुई हत्या के दोषियों को उम्रकैद अंतर्राज्यीय बाइक चोर पकड़ाया, भैंसदेही पुलिस ने जंगल में छिपाकर रखी बाइकें बरामद भाजपा नेता की जमीन नपवाने गए राजस्व, पुलिस अमले पर हमला बैतूल में हेलमेट चेकिंग अभियान: 14 कर्मचारियों पर जुर्माना, प्रशासन की सख्ती बढ़ी शनिवार बैतूल आयेंगे सीएम मोहन यादव,सुरभि खण्डेलवाल को अर्पित करेंगे श्रद्धा सुमन India Heatwave Alert: कई राज्यों में 40°C पार, IMD की बड़ी चेतावनी चार साल की जैनब ने रखा रोजा। आत्मसंयम,सब्र,अनुशासन का दिया संदेश धुरंधर का दूसरा वर्जन इसी महीने होगा रिलीज, रणवीर नजर आएंगे अंडर कव्हर एजेंट सांझवीर टाईम्स के प्रतिष्ठा अलंकरण समारोह में जिले की 22 विभूतियां सम्मानित आर डी कोचिंग के विद्यार्थियों ने जे ई ई मैंस में हासिल की उत्कृष्ट सफलता, 99.68 परसेंटाइल हासिल कर स...
Header Ad

परिवार ने अपना लिया था ईसाई धर्म, मां की मौत हुई तो लोगों ने किया बहिष्कार, शव दफनाने से रोका… मांगी माफी, तब जाकर हुआ अंतिम संस्कार

0

मध्य प्रदेश के बैतूल जिले से धर्मांतरण का हैरान करने वाला मामला सामने आया है. यहां धर्मांतरण के विवाद के चलते एक महिला का अंतिम संस्कार रोक दिया गया. साथ ही महिला के अंतिम संस्कार में शामिल होने गांव का कोई भी व्यक्ति नहीं पहुंचा. यहां तक की गांव के लोगों ने महिला के शव को श्मशान दफनाने भी नहीं दिया. लोगों का कहना था कि मृतक महिला के परिवार ने समाज से अलग होकर ईसाई धर्म अपना लिया था.

मामला जिले के आमला ब्लॉक के कन्नड़गांव का है. यहां शनिवार धर्मांतरण के विवाद के चलते महिला का अंतिम संस्कार रुक गया. जानकारी के मुताबिक, गांव के रहने वाले राजाराम परते की मां ललिता परते का शनिवार को निधन हो गया. उनकी उम्र करीब 50 साल थी. राजाराम को उम्मीद थी कि इस दुखद समय में गांव के लोग उसके साथ खड़े होंगे, लेकिन गांव के लोगों ने उनसे या मुंह मोड़ लिया.

शव को श्मशान घाट में दफनाने से रोका

ग्रामीणों का कहना है कि ललिता का परिवार कई साल पहले ईसाई धर्म अपना चुका है. वे आदिवासी समाज के रीति रिवाजों को नहीं मानते. उसका अदिवासी समाज से कोई लेना देना नहीं है तो ऐसे में वे उसके उसके घर क्यों ही जाएं. गांव वाले उससे इतना नाराज थे कि उन्होंने मृतका के शव को श्मशान घाट में दफनाने तक नहीं दिया.

ऐसे सुलझा विवाद

मामला तब जाकर शांत हुआ, जब मृतका के परिवार ने गांव की पंचायत के सामने माफी मांगी. साथ में उन लोगों ने गांव के देवी-देवताओं की कसम ली और कहा कि वे फिर से आदिवासी समाज और परंपराओं को अपनाएंगे और फिर से कभी दूसरे धर्म को नहीं अपनाएंगे. इसके बाद गांव के लोगों ने मृतका का अंतिम संस्कार गांव के श्मशान घाट में करने का इजाजत दिया.

मामले में जब मृतका के परिवार ने आदिवासी समाज को अपनाया लिया तो गांव के लोग मान गए. इसके बाद गांव के बड़े बुजुर्ग और पंचायत की मौजूदगी में देर रात महिला का अंतिम संस्कार किया गया. अंतिम संस्कार आदिवासी समाज के रीति-रिवाजों से संपन्न हुआ. इस गांव में करीब 70 फीसदी लोग आदिवासी समाज के हैं.

Leave A Reply

Your email address will not be published.