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नाबालिग की हिरासत में पिटाई और यौन उत्पीड़न का मामला, SC का सुनवाई से इनकार, हाई कोर्ट जाने का निर्देश

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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (15 सितंबर) को गुजरात पुलिस द्वारा 17 साल के नाबालिग लड़के के कथित यौन उत्पीड़न और हिरासत में पिटाई के आरोपों पर दायर याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया. कोर्ट ने याचिकाकर्ता को गुजरात हाई कोर्ट जाने की सलाह दी है.

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने याचिकाकर्ता के प्रति सहानुभूति जताई और याचिकाकर्ता के वकील से सवाल किया कि आपने हाई कोर्ट का दरवाजा क्यों नहीं खटखटाया?. बेंच ने कहा ‘हमें आपसे पूरी सहानुभूति है, लेकिन आपने हाईकोर्ट का रुख क्यों नहीं किया?’. कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाई कोर्ट से राहत मांगी जा सकती है.

पीड़ित की बहन का आरोप

पीड़ित की बहन की तरफ से दायर याचिका में आरोप लगाया गया था कि 18 अगस्त को गुजरात ते बोटाद कस्बे की पुलिस ने लड़के को सोना और कैश चोरी के शक में उठाया और 19 से 28 अगस्त तक हिरासत में रखा. इस दौरान पुलिसकर्मियों ने उसके साथ न सिर्फ बेरहमी से मारपीट की बल्कि उसका यौन शोषण भी किया.

‘पुलिस ने नहीं कराई मेडिकल जांच’

याचिका में दावा किया गया कि लड़के को हिरासत में लिए जाने के 24 घंटे के भीतर न तो किशोर न्याय बोर्ड और न ही मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया. इसमें कहा गया है कि हिरासत में लेने के बाद पुलिस ने उसकी मेडिकल जांच भी नहीं कराई. इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS), पोक्सो अधिनियम और किशोर न्याय अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कर स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई.

सीबीआई जांच कराने की मांग

याचिकाकर्ता ने गुजरात कैडर के अधिकारियों को छोड़कर विशेष जांच दल (SIT) गठित करने या वैकल्पिक रूप से कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच कराने की मांग की. इसके अलावा अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), दिल्ली से मेडिकल बोर्ड बनाकर पीड़ित की चोटों की जांच करने का निर्देश देने की गुहार भी लगाई.

‘ऐसी मांगों पर हाई कोर्ट भी विचार कर सकता’

हालांकि बेंच ने कहा कि ऐसी मांगों पर हाई कोर्ट भी विचार कर सकता है. जब वकील ने तर्क दिया कि यह मुद्दा पूरे देश में नाबालिगों की पुलिस हिरासत में यातना से जुड़ा है, तो अदालत ने कहा, ‘आप हाईकोर्ट जाइए, अगर हाईकोर्ट आपके मामले पर विचार नहीं करता है तो वापस आइए। हम आपकी याचिका पर गौर करेंगे’.

याचिकाकर्ता ने बोटाद थाने की सीसीटीवी फुटेज नष्ट होने की आशंका भी जताई. इस पर बेंच ने कहा, ‘यदि आप समय से हाई कोर्ट जाएंगे तो फुटेज नष्ट नहीं होगा’. इसके बाद कोर्ट ने याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी.

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