Logo
ब्रेकिंग
Khunti Human Trafficking: खूंटी पुलिस ने नाकाम की मानव तस्करी की साजिश, 20 हजार की नौकरी का झांसा दे... Haryana Weather Update: हरियाणा में फिर सक्रिय हुआ मानसून, 18 सितंबर तक झमाझम बारिश; यमुनानगर में आं... Haryana Sports News: बहादुरगढ़ में 1600 तैराकों का महाकुंभ, मुख्य अतिथि अविनाश चोपड़ा ने की अनिल खत्... How to Deactivate FASTag: पुरानी कार बेच दी है तो तुरंत डिएक्टिवेट करें FASTag, वरना कटता रहेगा आपका... Chhattisgarh Weather News: छत्तीसगढ़ में थमा भारी बारिश का दौर, अगले कुछ दिनों तक हल्की से मध्यम वर्... Jalandhar Road Accident: जालंधर-जम्मू नेशनल हाईवे पर दर्दनाक हादसा, वैष्णो देवी से लौट रहे 2 श्रद्धा... Gurdaspur Crime News: फर्जी वसीयत बनाकर हड़पी जमीन, दोरांगला पुलिस ने जालंधर के 4 लोगों पर दर्ज किया... Jalandhar Weather Update: जालंधर में पॉकेट रेन से गिरा तापमान, उमस से मिली राहत; कई इलाकों में हुआ ज... Jalandhar Food Safety Raid: जालंधर में मिलावटखोरी पर स्वास्थ्य विभाग का शिकंजा, 75 किलो पनीर जब्त; ख... Bijapur Crime News: रुद्रारम एकलव्य आवासीय विद्यालय के शिक्षक पर गंभीर आरोप, बच्चों के साथ अनुचित व्...
Header Ad

ठेकेदारों ने नर्क बना दी जिंदगी! परेशान होकर PM मोदी को अपने खून से लिखा लेटर

0

मध्य प्रदेश में संविदा आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष कोमल सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खून से लेटर लिखा है. इस लेटर में उन्होंने आउटसोर्स कर्मचारीयो के साथ हो रहे शोषण, वेतन में देरी और ठेकेदारों की मनमानी का जिक्र किया है.

खून से लिखे इस पत्र के जरिए कोमल सिंह ने पीएम नरेंद्र मोदी जी से गुहार लगाई है कि मध्य प्रदेश सरकार ने आज तक आउटसोर्स कर्मचारीयो के लिए कोई स्पष्ट नीति तय नहीं की है, इस वजह से आउटसोर्सिंग एजेंसियों और ठेकेदारों की मनमानी चरम पर पहुंच गई है. कर्मचारियों की तरह न तो तयशुदा दर पर और न ही समय पर वेतन मिलता है. कई बार तो महीनों तक वेतन अटक जाता है, इसके साथ ही उन्होंने यह भी लिखा कि EPF की राशि भी नियमित रूप से जमा नहीं की जाती,.जब कर्मचारी जानकारी मांगते हैं तो उन्हें जवाब नहीं दिया जाता या फिर धमकाया जाता है.

कोमल सिंह का कहना है. स्वास्थ्य विभाग में आउटसोर्स कर्मचारी वही कार्य करते हैं जो स्थाई कर्मचारी करते हैं, लेकिन उन्हें मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखा जाता है. खून से लिखी चिट्ठी में कोमल ने प्रधानमंत्री मोदी से हस्तक्षेप कर मामले में दखल देने की अपील की है, ताकि मध्य प्रदेश शासन को निर्देशित किया जा सके कि वो आउटसोर्स कर्मचारी के लिए ठोस नीति बनाएं.

उन्होंने कहा- मध्य प्रदेश में आउटसोर्स कर्मचारी, ठेकेदारी प्रथा के कारण लंबे समय से शोषण का शिकार हो रहे है. इसके लिए कोई विशेष नीति नहीं है. उत्तर प्रदेश में हाल ही में आउटसोर्स सेवा निगम का गठन किया है. इसमें न्यूनतम वेतन 20 हजार रुपाए तय किया है, साथ ही अन्य सुविधाएं भी दी जाएगी. देश के कुछ और राज्यों में इस तरह की व्यवस्था है. अगर उप्र की तरह यहां भी आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए नीति बने तो कर्मचारियों को राहत मिल सकती है. आउटसोर्स कर्मचारी लगातार इसे लेकर मांग भी कर रहे है. सरकार के तकरीबन हर विभाग में आउटसोर्स कर्मचारी है. प्रदेश में इन कर्मचारियों की संख्या 2 लाख से अधिक है. इसमें 50 हजार ऐसे कर्मचारी है, जिन्हें कुछ समय के लिए काम और जरूरत के हिसाब से रखा जाता है.

ठोस नीति तैयार करने की मांग

कोमल सिंह बोले- विभिन्न विभागों में प्राइवेट एजेंसी के जरिए कर्मचारियों को रखा जाता है. ऐसे में न तो सरकारी सुविधा मिल रही है और न ही पीएफ, ग्रेज्यूटी, स्वास्थ्य बीमा सहित अन्य योजनाओं का लाभ मिल रहा है, संघ के प्रदेश अध्यक्ष कोमल सिंह ने बताया कि कई स्थानों पर तो 5 से 6 माह तक वेतन नहीं मिला है. हमारी मांग है कि आउटसोर्स कर्मचारियोंके लिए ठोस नीति तैयार की जाए.

Leave A Reply

Your email address will not be published.