
Mhow Crime News: महू में विस्फोटक चोरी कांड में बड़ा सुराग, कम तीव्रता वाले बॉक्स चोरी होने से कृषि ब्लास्टिंग नेटवर्क पर गहराया शक
महू (मध्य प्रदेश): बड़गोंदा थाना क्षेत्र के अंतर्गत सीतापाट स्थित एक निजी मैगजीन से 300 किलोग्राम विस्फोटक चोरी होने के सनसनीखेज मामले में पुलिस अनुसंधान अब जंगलों और खेतों में होने वाली अनधिकृत ब्लास्टिंग गतिविधियों तक पहुंच गया है।
जांच के दौरान पुलिस टीम को वारदात स्थल से मात्र 150 मीटर की दूरी पर जंगल में 25 एमएम नाइट्रेटेड मिक्सर का एक बाक्स, डेटोनेटिंग फ्यूज और लोहे की एक टामी बरामद हुई है। पुलिस को प्रबल आशंका है कि मैगजीन से विस्फोटक सामग्री की चोरी करने के बाद बदमाश भागते समय इन सामग्रियों को झाड़ियों में छोड़कर फरार हो गए होंगे।
🪟 टामी से खिड़की तोड़कर अंदर घुसे थे चोर: कम तीव्रता वाले बारूद को बनाया निशाना
वारदात के तरीके और चोरी की गई सामग्री का ब्योरा:
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खिड़की तोड़कर प्रवेश: घटनास्थल के तकनीकी मुआयने से स्पष्ट हुआ है कि बदमाशों ने लोहे की ग्रिल और खिड़की को टामी की मदद से तोड़कर मैगजीन के भीतर प्रवेश किया था।
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विशिष्ट सामग्री की चोरी: प्राथमिक विवेचना में यह तथ्य सामने आया है कि आरोपियों ने मुख्य रूप से 25 एमएम और 40 एमएम के नाइट्रेटेड मिक्सर बॉक्स को ही अपना निशाना बनाया।
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कम तीव्रता वाला बारूद: मैगजीन में रखी अत्यंत उच्च तीव्रता वाली विस्फोटक सामग्रियों को हाथ न लगाकर केवल कम और मध्यम क्षमता वाले बॉक्स ले जाना जांच एजेंसियों को एक बड़े सुराग की ओर इशारा कर रहा है।
🚜 कुओं और कृषि कार्यों में ब्लास्टिंग पर एसआईटी की नजर: सीमावर्ती गांवों में गहन पड़ताल
जांच की दिशा और तकनीकी तफ्तीश:
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कृषि ब्लास्टिंग सिंडिकेट: कम तीव्रता वाले विस्फोटक अमूमन खेतों में नए कुएं खोदने, पथरीली जमीन समतल करने अथवा स्थानीय छोटे निर्माण कार्यों के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। इसी आधार पर गठित विशेष जांच दल (SIT) ट्रैक्टर चालकों और कुओं में ब्लास्टिंग करने वालों का डेटा खंगाल रही है।
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सीमावर्ती इलाकों में दबिश: महू से लगे सीमावर्ती जिलों के ग्रामीण इलाकों और वन क्षेत्रों में संचालित होने वाली अवैध ब्लास्टिंग गतिविधियों की कड़ी निगरानी की जा रही है।
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सीसीटीवी और सीडीआर जांच: पुलिस टीम पूर्व में खदानों और ब्लास्टिंग कार्य से जुड़े संदिग्ध लोगों से पूछताछ कर चुकी है। इसके साथ ही सीतापाट मार्ग पर लगे सभी सीसीटीवी कैमरों के फुटेज और संबंधित टावर डंप के जरिए कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) का गहन विश्लेषण किया जा रहा है।

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