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कफ सिरप मौतें: MP से तमिलनाडु तक जांच, फैक्ट्री में बड़ा ‘खेला’ सामने आया, चौंकाने वाले खुलासे

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मध्य प्रदेश में बच्चों की मौत के मामले में कोल्ड्रिफ कफ सिरप के कांचीपुरम स्थित विनिर्माता के खिलाफ जांच की गई. जांच में तमिलनाडु खाद्य एवं औषधि विभाग (टीएनएफडीए) द्वारा बुनियादी नियामक मानदंडों को लागू करने में चूक सामने आई है. केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) सूत्रों ने यह जानकारी दी.

जानकारी के मुताबिक, तमिलनाडु खाद्य एवं औषधि प्रशासन (टीएनएफडीए) द्वारा 2011 में लाइसेंस मिलने के बाद श्रीसन फार्मा ने अपने खराब बुनियादी ढांचे और राष्ट्रीय औषधि सुरक्षा नियमों का उल्ंलघन जारी रहा. कई उल्लंघनों के बावजूद एक दशक से अधिक समय तक बिना किसी रोक-टोक के दवाएं निर्मित करने का संचालन जारी रखा.

नियमों की जमकर हुई अनदेखी

सीडीएससीओ द्वारा हाल ही में की गई एक जांच में इकाई की भयावह स्थिति और वस्तु विनिर्माण प्रक्रिया (जीएमपी) का पूरी तरह गैर अनुपालन किए जाने का मामला सामने आया है. सीडीएससीओ श्रीसन फार्मा में किसी भी ऑडिट में शामिल नहीं रहा है. चूंकि सीडीएससीओ शामिल नहीं था और राज्य एफडीए (खाद्य एवं औषधि प्रशासन) ने सीडीएससीओ को इस कंपनी के बारे में किसी भी तरह से सूचित नहीं किया. लिहाजा यह कंपनी सीडीएससीओ के किसी भी डेटाबेस का हिस्सा नहीं थी. हालांकि टीएनएफडीए के अधिकारियों ने इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.

नहीं कराया गया था रजिस्ट्रेशन

जानकारी के मुताबिक, नियमों के तहत विनिर्माताओं को सुगम पोर्टल पर अपने सभी अनुमोदित उत्पादों को पंजीकृत करना आवश्यक है. इस नियम को देश में सभी रजिस्ट्रेशन के बाद उत्पादों का राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार करने के लिए अधिसूचित किया गया था ताकि बेहतर निगरानी हो सके.

कंपनी ने अपने उत्पादों को डेटाबेस पर पंजीकृत नहीं किया. इस तरह, इसने इस नियम का उल्लंघन किया, राज्य नियामक की जिम्मेदारी है कि वह राज्य में इस नियमकोलागूकरवाए. दरअसल, कोल्ड्रिफ सिरप पीने से बच्चों की मौत होने के बाद लगातार जांच और कार्रवाई जारी है. जांच में श्रीसन फार्मा द्वारा नियमों की अनदेखी किए जाने का मामला सामने आया है.

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