Logo
ब्रेकिंग
Kosi River Elephant Video: कॉर्बेट लैंडस्केप में नदी पार कर रहा था हाथियों का झुंड, उफनती धारा में ब... West Bengal By-Elections Update: ममता बनर्जी के समर्थन के बाद गिरफ्तारी पर कांग्रेस का हमला, कोर्ट न... Dalhousie Bear Rescue Operation: डलहौजी में बस स्टैंड के पास मुंह में कनस्तर फंसे भालू का रेस्क्यू, ... Sambhal Lover Couple Suicide: संभल में पेड़ से लटके मिले प्रेमी युगल के शव, तीन महीने से था प्रेम सं... West Bengal Politics: ममता बनर्जी के समर्थन के बाद कांग्रेस उम्मीदवार की गिरफ्तारी पर बवाल, केसी वेण... Punjab AAP Campaign: सीएम भगवंत मान ने जारी किया AAP का चुनावी पैम्फलेट; रविवार से शुरू होगा घर-घर प... राहुल गांधी का छात्रों की गूँज Live यहां देखे Team India Asian Games News: एशियन गेम्स के लिए नागोया जा रही पुरुष क्रिकेट टीम को हुई परेशानी, जानि... Bollywood Actress Karishma Tanna News: बेटे को जन्म देने के बाद डिलीवरी और मदरहुड पर बोलीं करिश्मा त... Tarique Rahman Government News: भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में तनाव? चटगांव और मोंगला पोर्ट के सम...
Header Ad

मध्य प्रदेश निकाय व पंचायत चुनावों में बड़े बदलाव की तैयारी: अब 1 चरण में मतदान कराने पर विचार

भोपाल (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश में प्रस्तावित आगामी नगरीय निकाय और त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की व्यवस्था में बड़ा प्रशासनिक बदलाव देखने को मिल सकता है। राज्य निर्वाचन आयोग (State Election Commission) चुनाव चरणों की संख्या को कम करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। वर्तमान चुनावी व्यवस्था के अंतर्गत त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव तीन चरणों में और नगरीय निकाय चुनाव दो चरणों में संपन्न कराए जाते हैं। इन चरणों के कारण प्रदेश में लंबे समय तक आदर्श आचार संहिता प्रभावी रहती है, जिससे नियमित विकास कार्य और सामान्य प्रशासनिक गतिविधियां बाधित होती हैं।

⚡ एक ही चरण में चुनाव कराने का प्रस्ताव: घटेगी आचार संहिता की अवधि

प्रस्तावित योजना और इसके लाभ:

  • चरणों में कटौती: प्रस्तावित नई व्यवस्था के तहत नगरीय निकायों के चुनाव दो चरणों के स्थान पर एक ही चरण में और त्रिस्तरीय पंचायतों के चुनाव तीन चरणों के बजाय एक ही चरण में कराए जाने की योजना है।

  • समय की बचत: पूरी चुनाव प्रक्रिया कम समय में पूरी हो सकेगी, जिससे चुनाव प्रबंधन पर प्रशासनिक तंत्र का दबाव कम होगा।

  • विकास कार्यों को गति: चुनाव अवधि सीमित होने से आदर्श आचार संहिता की समय-सीमा में उल्लेखनीय कमी आएगी, जिससे जनहित और विकास से जुड़ी विकास परियोजनाओं पर विराम नहीं लगेगा।

Comments are closed.