
उत्तर सिक्किम में हुए भीषण भूस्खलन (Landslide) ने भारी तबाही मचाई है. खराब मौसम, ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी रास्ते और अस्थिर ज़मीन ने हालात को बेहद मुश्किल बना दिया है. फिर भी भारतीय सेना पूरे समर्पण के साथ राहत और बचाव कार्य (Rescue operations) में जुटी हुई है. ऐसे में हर जवान अपनी जान की परवाह किए बिना लोगों की मदद के लिए डटा है.
लाचेन, उत्तर सिक्किम का एक प्रमुख टूरिस्ट प्लेस है. जो लैंडस्लाइड के कारण मेनलैंड से पूरी तरह कट गया था. भारतीय सेना ने पैदल रास्ता बनाकर 113 फंसे हुए टूरिस्टों तक अपनी पहुंच बनाई है, जिनमें बुजुर्ग और बच्चे भी शामिल हैं. 3 जून को एयरफोर्स के हेलिकॉप्टरों की मदद से 30 टूरिस्टों को सुरक्षित निकाला गया था, जिनमें कुछ विदेशी नागरिक भी थे. बाकी लोगों को जल्द से जल्द निकालने की योजना तैयार की जा रही है. सेना की तेज कार्रवाई ने इस दूरदराज गांव में फंसे लोगों के लिए एक उम्मीद की किरण जगाई है.
सैन्य शिविर में लापता लोगों की तलाश जारी
लैंडस्लाइड का सबसे बुरा असर चेतन के सैन्य शिविर पर पड़ा, जहां 6 लोग अब भी लापता हैं. इनमें शामिल हैं- लेफ्टिनेंट कर्नल पृतपाल सिंह संधू, सूबेदार धर्मवीर, नायक सुनीलाल मुचाहारी, सिपाही सैनीउद्दीन पी.के., स्क्वाड्रन लीडर आरती संधू (सेवानिवृत्त), लेफ्टिनेंट कर्नल संधू की पत्नी मिस अमायरा संधू और उनकी बेटी. सेना ने विशेष खोजी दलों और इंजीनियरिंग उपकरणों को तैनात किया है. लेकिन लगातार खराब मौसम, अस्थिर जमीन और ऊंचाई वाले दुर्गम इलाके खोज कार्य (Search Operations) में बड़ी मुसीबत बन रहे हैं. फिर भी सेना अपनी हर संभव कोशिश कर रही है ताकि लापता लोगों को जल्द से जल्द ढूंढा जा सके.
सेना का अटूट संकल्प
भारतीय सेना न केवल लापता सैनिकों और नागरिकों की तलाश में जुटी है, बल्कि पूरे क्षेत्र में राहत कार्यों को तेज करने के लिए हर संसाधन का उपयोग कर रही है. स्थानीय लोगों को सहायता पहुंचाने से लेकर सड़कें और संपर्क बहाल करने तक, सेना का हर कदम इस संकट में उम्मीद की रोशनी बिखेर रही है. भारतीय सेना ने अपने समर्पण को हर पल साबित किया है कि ‘हमारे लिए हर एक जिंदगी मायने रखती है.’

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