
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक में कर्नाटक जाति जनगणना रिपोर्ट पेश की गई. इस रिपोर्ट में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षण को 32 प्रतिशत से बढ़ाकर 51 प्रतिशत करने की सिफारिश की गई है. 2020 में बीजेपी के नेतृत्व वाली कर्नाटक सरकार ने जयप्रकाश हेगड़े को जाति जनगणना आयोग का प्रमुख नियुक्त किया था, लेकिन रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया.
हेगड़े ने फरवरी 2024 में सिद्धारमैया सरकार को अंतिम रिपोर्ट सौंपी. रिपोर्ट के मुताबिक, जयप्रकाश हेगड़े आयोग ने ओबीसी श्रेणी के भीतर वर्गीकरण के पुनर्गठन की भी सिफारिश की है. सिद्धारमैया सरकार 17 अप्रैल को आयोग की सिफारिशों पर फैसला लेगी. श्रेणी 1 और 2A के कुछ समुदायों को श्रेणी 1B में किया जाएगा.
रिपोर्ट में मौजूदा श्रेणी 1 के बजाय श्रेणी 1ए और श्रेणी 1बी बनाने की सिफारिश की गई है:
श्रेणी 1ए: 6 प्रतिशत आरक्षण
श्रेणी 1बी: 12 प्रतिशत आरक्षण
श्रेणी 2ए: 10 प्रतिशत आरक्षण
श्रेणी 2बी: 8 प्रतिशत आरक्षण
श्रेणी 3ए: 7 प्रतिशत आरक्षण
श्रेणी 3बी: 8 प्रतिशत आरक्षण
रिपोर्ट के मुताबिक, इन बदलावों का उद्देश्य आरक्षण को ज्यादा सटीक और न्यायसंगत बंटवारा सुनिश्चित करना है.
वर्तमान में कर्नाटक में आरक्षण संरचना इस प्रकार है:
श्रेणी 1: 4 प्रतिशत
श्रेणी 2A: 15 प्रतिशत
श्रेणी 2B: 4 प्रतिशत
श्रेणी 3A: 4 प्रतिशत
श्रेणी 3B: 5 प्रतिशत
अनुसूचित जाति (SC): 17.15 प्रतिशत
अनुसूचित जनजाति (ST): 6.95 प्रतिशत
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS): 10 प्रतिशत
कुल आरक्षण: 66 प्रतिशत
जयप्रकाश हेगड़े आयोग ने व्यवसाय और सामाजिक स्थिति के आधार पर फिर से बंटवारे की सिफारिश की है. वर्तमान में श्रेणी 1 में शामिल कुछ जातियों को व्यावसायिक मानदंडों के आधार पर श्रेणी 1A में ले जाया जाएगा. श्रेणी 1 और 2A के कुछ समुदायों को वर्तमान सामाजिक स्थितियों के आधार पर श्रेणी 1B में पुनर्वर्गीकृत किया जाएगा. यह वर्गीकरण कौशल, खानाबदोश जीवनशैली और पारंपरिक व्यवसाय जैसे कारीगर और जाति-आधारित व्यवसायों पर आधारित है.
जनगणना रिपोर्ट से जाति-वार जनसंख्या डेटा इस प्रकार है:
जाति सर्वेक्षण में शामिल कुल जनसंख्या: 5,98,14,942
एससी जनसंख्या: 1,09,29,347
एसटी जनसंख्या: 42,81,289
श्रेणी 1ए: 34,96,638
श्रेणी 1बी: 73,92,313
श्रेणी 2ए: 77,78,209
श्रेणी 2बी: 75,25,880
श्रेणी 3ए: 72,99,577
श्रेणी 3बी: 81,37,536
यह रिपोर्ट राज्य मंत्रिमंडल को 46 से अधिक खंडों में प्रस्तुत की गई थी. जाति सर्वेक्षण के विभिन्न पहलुओं पर डेटा दो सीडी में रिकॉर्ड किया गया और सरकार को दिया गया.

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