
बैतूल। हमको पानी नहीं है पीने के लिए, आप 1200 रुपये दे रहे हैं — हमें पैसों से मतलब नहीं, हमें पानी चाहिए!
यह गुहार है बल्हेगांव (विकासखंड प्रभातपट्टन) की ग्रामीण महिलाओं की, जो सोमवार को कलेक्ट्रेट पहुंचीं। दो हजार की आबादी वाले इस गांव में महिलाओं का कहना है कि वे अब किसानों के खेतों के हैंडपंप से आधा-आधा घंटा लगाकर मुश्किल से आधा लीटर पानी निकाल पाती हैं। हैंडपंप से लाल और गंदा पानी आ रहा है, जिससे गांव में सर्दी-जुकाम और पेट की बीमारियां बढ़ रही हैं।

महिलाओं ने कहा कि सरकार लाडली बहनों को हर महीने ₹1,250 दे रही है, पर जब पीने को साफ पानी ही नहीं है तो उस पैसे का क्या करेंगे। उन्होंने साफ कहा —“हमें पैसा नहीं, पानी चाहिए!”
ग्रामीण कमला बाई बारस्कर ने बताया कि तीन साल पहले गांव में पाइपलाइन बिछाई गई थी, लेकिन आज तक नल में पानी नहीं आया। सरपंच-सचिव कहते हैं कि उनके बस की बात नहीं। गांव में केवल एक ट्यूबवेल है, जिससे पर्याप्त पानी नहीं मिलता। नलचालक को ग्रामीण महिलाएं मिलजुलकर ₹50-₹50 इकट्ठा कर वेतन देती हैं।
आसपास के गांवों में भी अधूरा काम
जल जीवन मिशन के तहत चन्दोरा और निरापुर गांव में पाइपलाइन का काम पूरा हुआ है। बल्हेगांव में करीब एक किलोमीटर तक पाइपलाइन बिछाई गई, लेकिन ठेकेदार ने काम बीच में ही छोड़ दिया। जानकारी के अनुसार, ठेकेदार को भुगतान नहीं हुआ, जिसके चलते उसने काम रोक दिया।
सरपंच बोले— नया बोर चालू करेंगे
बल्हेगांव के सरपंच किशन सोलंकी ने खबरम को बताया कि जल जीवन मिशन की पाइपलाइन अस्त-व्यस्त है। गांव के तीनों हिस्सों में पानी नहीं पहुंच पा रहा। “हमने पिछले साल एक नया बोर कराया था, उसे चालू करके देखते हैं। उसका तार चोरी हो गया था, जिसकी रिपोर्ट दर्ज कराकर अब व्यवस्था की जा रही है,” उन्होंने कहा।
