Logo
ब्रेकिंग
टीईटी निरस्त कराने की मांग: बैतूल में महिला शिक्षिकाओं ने हेमंत खंडेलवाल को राखी बांधकर सौंपा ज्ञापन परिसीमन पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने PM मोदी को लिखा पत्र: सर्वदलीय बैठक की मांग दोहराई नेपाल के हिमालयी सीमावर्ती क्षेत्र में प्रलयंकारी बाढ़: 300 से अधिक भारतीय लापता, रेस्क्यू ऑपरेशन जा... ₹200 जुर्माने वाले मामले में 12 साल की देरी: मंडी कोर्ट ने पुलिस का चालान किया खारिज, आरोपी बरी कानपुर के नत्थापुरवा गांव में गिरा 4-सीटर ट्विन-इंजन विमान; ट्रेनर सचिन भाटिया और ट्रेनी अभिषेक की म... राहुल गांधी के दबाव में बैकफुट पर मोदी सरकार? कांग्रेस जनता के बीच ले जाएगी ये 5 बड़े मुद्दे, प्रचार... धमतरी: 10 साल से बिस्तर पर जिंदगी काट रहे शशिकांत ने मांगी इच्छामृत्यु; हमले की CBI जांच और इलाज की ... उत्तर प्रदेश सर्किल रेट लिस्ट 2026: 9 साल बाद बदलने जा रहे हैं प्रॉपर्टी के सरकारी रेट, जेवर एयरपोर्... झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: असिस्टेंट पब्लिक प्रॉसिक्यूटर परीक्षा पर रोक से इनकार, सरकार से 2 हफ्... गोरखपुर में पति-पत्नी के झगड़े से 1000 घरों की बिजली गुल: गुस्से में 11 KV हाईटेंशन तार पर फेंके कपड...
Header Ad

Google को कोर्ट का कड़ा आदेश, प्रतिद्वंद्वी कंपनियों को भी देना होगा सीक्रेट डेटा

0

एंटीट्रस्ट केस में Google को अमेरिकी अदालत से बड़ी राहत मिली है, पिछले साल इंटरनेट सर्च मामले में गूगल को अवैध एकाधिकार का दोषी पाया गया था जिसके बाद गूगल के खिलाफ सख्त कदम उठाने की सिफारिश की भी की गई थी. गूगल को क्रोम ब्राउजर तक को बेचने के लिए मजबूर होना पड़ता लेकिन अब अदालत ने आदेश दिया है कि गूगल को Chrome Browser बेचने की जरूरत नहीं है.

कंपनी को प्रतिस्पर्धियों के साथ जानकारी साझा करनी होगी. इसका मतलब ये है कि अब आदलत से मिले आदेश के बाद कंपनी को डेटा शेयरिंग को लेकर अपनी पॉलिसी में बड़ा बदलाव करना होगा. यह मामला Google के खुद के प्रोडक्ट्स जैसे कि एंड्रॉयड, क्रोम और यहां तक कि एपल डिवाइस पर गूगल को डिफॉल्ट सर्च इंजन सेट करने के इर्द-गिर्द घूम रहा था. बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, अब गूगल को न ही क्रोम ब्राउजर और न ही एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम को बेचना पड़ेगा, जो दुनिया के अधिकांश स्मार्टफोन में चलता है.

Google ने रखा था ये प्रस्ताव

अमेरिकी न्याय विभाग ने इस बात की मांग उठाई थी कि गूगल को क्रोम बेच देना चाहिए, लेकिन अब आदलत से मिली राहत के बाद अब गूगल क्रोम को अपने पास रख सकती है लेकिन अब कंपनी को प्रतिद्वंद्वियों के साथ भी सर्च डेटा को साझा करना होगा. गूगल ने एपल जैसी कंपनियों के साथ रेवेन्यू शेयरिंग एग्रीमेंट को सीमित करने और एपल डिवाइस और ब्राउजर पर सर्च इंजन को डिफॉल्ट रूप में सेट करने जैसे थोड़े कम कठोर समाधान का प्रस्ताव रखा था.

आपको ये जानकर थोड़ी हैरानी हो सकती है कि हर साल गूगल द्वारा ऐपल को अरबों डॉलर का भुगतान किया जाता है और वो भी सिर्फ इसलिए ताकि आईफोन पर गूगल डिफॉल्ट सर्च इंजन के रूप में बना रहे. कंपनी ने कहा कि वह आदलत के इस फैसले को एक जीत के रूप में देखती है.

Leave A Reply

Your email address will not be published.